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फिर खटाई में पड़ा मिड इंडिया फाटक पर अंडरब्रिज!

मंदसौर। नीमच-रतलाम रेल लाइन के दोहरीकरण और इलेक्ट्रिफिकेशन सहित रेलवे के अन्य निर्माण कार्य अगले कुछ माह में चालू होने के कारण मिड इंडिया रेलवे फाटक पर अंडरब्रिज खटाई में है। पहले जब सारी बातें अनुकूल थीं, नपा के पास रुपए भी आ चुके थे, तब दो बड़े लोगों की लड़ाई में जनप्रतिनिधियों ने भी इस कार्य को रोका था और अब यह मुश्किल में आ गया है। रेलवे के अपने नए प्रोजेक्ट के हिसाब से नई लाइनें, प्लेटफार्म के विस्तार, सिग्नल सहित अन्य उपकरणों की नए सिरे से स्थापना सहित ऐसे कार्य हैं, जो मंदसौर रेलवे स्टेशन पर कई परिवर्तन लाएंगे।

मिड इंडिया फाटक से प्रतिदिन आवागमन करने वाले शहर के 20 से 25 हजार लोगों को अभी भी लगभग दो साल तक और परेशानी झेलना ही है और उसके बाद भी तय नहीं है कि इसी जगह अंडरब्रिज या ओवरब्रिज बन जाए। क्योंकि तत्कालीन कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने 3 अगस्त 2018 को रेलवे, नगर पालिका सहित जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अंडरब्रिज की हाइट 10.5 फीट तय करा दी थी और इसी हिसाब से काम करने को कहा था। पर अपनी बेशकीमती जमीनों के आस-पास खुदाई फाटक के दोनों तरफ के प्रभावशालियों को नहीं भायी थी और एक जनप्रतिनिधि ने रेलवे में अपनी पहुंच का फायदा उठाते हुए इस प्रोजेक्ट को होल्ड करा दिया था। इसी बीच ठंडे बस्ते में पड़े नीमच-रतलाम रेलवे लाइन दोहरीकरण प्रोजेक्ट के लिए भी राशि मंजूर हुई और इस पर काम होने लगा तो रेलवे के अधिकारियों ने अधिकांश जगह अंडरब्रिज व ओवरब्रिज के प्रोजेक्ट पर नई लाइनों का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनने तक रोक लगा दी। इसकी जद में मिड इंडिया फाटक भी आ गई।

 

रेलवे स्टेशन की नजदीकी का हो रहा नुकसान

दरअसल मिड इंडिया रेलवे फाटक स्टेशन के बिलकुल नजदीक ही है और इसके पास ही सिग्नल व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी लगे हैं। अब दोहरीकरण के बाद फाटक के यहां ही पांच रेलवे लाइनें हो जाएंगी। इसके अलावा प्लेटफार्म दो व तीन की लंबाई भी अब फाटक की तरफ ही बढ़ेगी। पटरियों के ज्वाइंट और अन्य आवश्यक उपकरण भी फाटक के आस-पास ही लगेंगे। रेलवे स्टेशन के दूसरी तरफ शिवना नदी होने से भी उस तरफ अधिकतम विस्तार हो चुका है। अब शहर की आवश्यकताओं के हिसाब से रेलवे स्टेशन में जितने भी विस्तार होना है, वह मिड इंडिया रेलवे फाटक की तरफ ही होंगे।

 

24 में से 10 घंटे बंद रहती है फाटक

मिड इंडिया रेलवे फाटक रेलवे स्टेशन से लगी हुई है। इसलिए दूसरे फाटकों की तुलना में ज्यादा ही बंद रहती है। अभी रतलाम-अजमेर रेलमार्ग पर 24 घंटे में ट्रेन व मालगाड़ी मिलाकर लगभग 45 ट्रेनें गुजरती है। इस दौरान दिनभर में फाटक लगभग 10 घंटे तो बंद ही रहता है। बार-बार लोग परेशान होते रहते हैं।

 

स्वीकृति के बाद से ही चल रहा था झगड़ा

मिड इंडिया अंडरब्रिज की स्वीकृति के बाद से ही इसका झगड़ा चल रहा था। फाटक के एक तरफ शांतनु विहार, अग्रसेन नगर, कर्मचारी कॉलोनी, ग्रीन वेली, अभिनंदन नगर 1, 2, 3 के अलावा कई छोटी-छोटी कॉलोनिया भी हैं, जिनके लगभग 25 हजार लोगों का शहर से जुड़ाव इसी फाटक के जरिए होता है। इसके अलावा अंडरब्रिज के लिए माल गोदाम रोड पर होने वाली खुदाई से यहां के व्यवसायी और बसेर कॉलोनी सहित अन्य जगह के रहवासी प्रभावित हो रहे थे। कई दिनों तक दोनों ही तरफ के लोगों ने इसके पक्ष-विपक्ष में हंगामे किए थे। रेलवे फाटक के दोनों तरफ प्रभावित हो रहे प्रभावशालियों के दबाव में जनप्रतिनिधि लोगों की सुविधाओं को छोड़कर उनका ही ध्यान रखने में लगे थे। इस चक्कर मे अंडरब्रिज की डिजाइन चार बार बदल गई। उसकी ऊंचाई 18 से 15 फीट, 13 फीट और फिर 10.5 फीट पर आकर तय हुई है। इसके बाद भी अड़ंगेबाजी चल ही रही थी। बार-बार ऊंचाई बदलने से रेलवे के इंजीनियर भी परेशान हो गए थे और नाराजगी जताते हुए रतलाम मंडल के डीआरएम ने नगर पालिका से एक करोड़ रुपए लेने से मना कर दिया था। तब अभिनंदन नगर क्षेत्र के लोगों ने कलेक्टर के पास पहुंचकर कहा था कि तीन अगस्त तक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो पांच अगस्त को सीएम का विरोध करेंगे। इसके बाद सक्रिय हुए कलेक्टर ने रेलवे व नपा के अधिकारियों के साथ आनन-फानन में बैठक कर सारी स्थिति साफ की थी और अंडरब्रिज की ऊंचाई 10.5 फीट तय की थी। इसके बाद फिर से मामला ठंडे बस्ते में चला गया है।

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