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फिर समरस हुआ मंदसौर – सामाजिक समरसता मंच का दीपावली मिलन समारोह संपन्न

सामाजिक समरसता मंच मंदसौर का प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी दिपावली मिलन समारोह का कार्यक्रम आयोजित हुआ, यह कार्यक्रम प्रात: 11 बजे बंडीजी के बाग में प्रारम्‍भ हुआ। इस कार्यक्रम में लगभग 140 समाज के बंधुअों ने पधारकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ायी। अलग- अलग हिन्‍दू समाज के लगभग 1000 समाज बंधुओं ने भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया।
भारत चिरंजीवी है समाज की समरसता ही देश को सुदृड़ बनाएगी
, दुनिया में यदि देशभक्ति का भाव कहीं जागृत है तो वह हमारा भारत देश है। यह एक चिरंजीवी देश है इसकी अमरता कभी अक्षुष्णद नही हो सकती। समाज की समरसता ही इस देश को और अधिक सुदृड़ता प्रदान करेगी।
यह विचार सामाजिक समरसता मंच द्वारा बण्डीजी के बाग में आयोजित दीपावली मिलन समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में राष्ट्रीाय स्वयं सेवक संघ के विभाग प्रचारक श्रीमान नन्ददास दण्डोतिया ने व्याक्त किये। आपने कहा कि देश भक्ति का भाव प्रत्येक हिन्दु में जागृत होना चाहिये। दुनिया भारत के शौर्य व शक्ति को मान चुकी है, विश्व गुरु का हमारा स्थान स्थायी है फिर से भारत की संस्कृति पूरे संसार में छा जाएगी।
श्री दण्डोतिया ने कहा कि हमारी प्राचीन वर्ण व्यमवस्था कार्य के चयन के आधार पर थी, कार्य का वरण करना अर्थात्‌ चयन करना। ऋग्वेद में तो तीन ही वर्णों का उल्लेवख है। विकृति के रुप में अस्पृष्यनता का प्रवेश हुआ। छूआछूत का हमारी संस्कृति में कोई स्थान नही है इसे उखाड़ फेकना चाहिये। उन्होने उदाहरण देते हुए कहा कि रघुकुल के गुरु वसिष्ठृ नर्तकी के पुत्र थे, राम शबरी व केवट के प्रसंग का उल्ले ख किया। भगवान श्री कृष्णे ने दासीपुत्र विदूर के घर भोजन किया। देवताओं के ऋषि नारद दासी पुत्र थे। समाज में छूआछूत की विकृति बहुत बाद में आई। सभी समाजो में हमें पारस्परिक आत्मीयता के भाव जगाना है। समरसता का वातावरण व गतिविधियां नगर व शहरों के साथ गांवो में भी हो। उन्होनें चीनी सामान के बहिष्कारर का आहवान किया व कहा कि पूरे देश में चीन के सामान का विक्रय घटा है, चीन के भी कदम पीछे हट गए है। आपने समरसता मंच की गतिविधियों की सराहना की।
समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठी समाजसेवी राजमल जी गर्ग ने की। आपने उपस्थित सभी समाजजनों को दीपावली की बधाई व शुभकामनाएं दी।
इस अवसर पर समाजसेवी गुरुचरण बग्गा ने कहा कि सैनिको के सम्मान की उज्जावल परम्परा हमे आरंभ करनी चाहिये। किसी भी सार्वजनिक स्थल पर एक सेनिक भी दिखे तो हमें खड़े होकर उसे सम्मान देना चाहिये। कुछ देशों में यह परम्परा है। हाल ही में हमारे देश के सैनिकों ने जिस शौर्य को प्रदर्शित किया है उसकी जितनी तारीफ की जाय वह कम है। श्री बग्गा ने कहा कि समरसता मंच की गतिविधियों का ग्रामीण क्षेत्रों में भी विस्तार किया जाएगा। समरसता मंच के संयोजक सूरजमल गर्ग चाचाजी एवं अध्यक्ष दाऊभाई विजयवर्गय भी मंचासीन थे।
आरंभ में अतिथि परिचय श्रीमती वर्तिका पारिख ने दिया। सचिव प्रदीप भाटी ने उपस्थित समाज प्रमुखों का परिचय कराया। सहसचिव ब्रजेश आर्य ने कार्यक्रम की प्रस्ता।वना रखते हुए, समरसता मंच की गतिविधियों की जानकारी दी। सचिन सोनी ने गीत प्रस्तुत किया। समारोह के मुख्यय अतिथि व अध्यक्ष का स्वागत संयोजक सूरजमल गर्ग चाचाजी व अध्यक्ष दाऊभाई विजयवर्गय ने किया। संचालन राघवेन्द्र देराश्री ने किया आभार दाऊभाई विजयवर्गीय ने माना। समारोह में सांसद सुधीर गुप्ताि, नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अध्यक्ष मदनलाल राठौर सहित बड़ी संख्याु में समाज जन व मात्र शक्ति उपस्थित थी।

घाणावार तेली समाज ने डिस्पोजल के बहिष्काथर का संकल्पक लिया
समरसता मंच के दीपावली मिलन समारोह से प्रेरणा लेकर घाणावार तेली समाज ने आगामी 13 नवम्बर रविवार को समाज के अन्नकूट महोत्सव में प्लान‍स्टिक डिस्पोजल के बहिष्कासर का संकल्पा लिया। समाज के अध्यक्ष बालाराम हरवार व सचिव रामेश्वर दशौरा ने यह घोषणा की।

मारवाड़ी युवा मंच की जल सेवा
इस समारोह के पश्चात आयोजित स्नेह भोज में मारवाड़ी युवा मंच ने अध्यक्ष हेमंत अग्रवाल के नेतृत्व में लोठों से निःशुल्के जल सेवा की। मंच के कार्यकर्ता जलसेवा कार्य में लगे थे।

रैगर महासभा द्वारा जल लोठे दिए गए
प्‍लास्टिक के उपयोग को कम करने व डिस्‍पोजल का प्रयोग ना हो इस उद्देश्‍य से 15 जल के लोठों को समरसता मंच को अखिल भारतीय रैगर महासभा युवा प्रकोष्‍ठ के प्रदेश अध्‍यक्ष ब्रजेश आर्य हंजावलिया जी ने भेट किएा

सामाजिक समरसता मंच ने बढाया मंदसौर का मान
मनुष्य का जीवन सामाजिक होता है, कहते हैं यदि सामाजिक व्यवस्था नहीं होती तो मनुष्य व पशुओं में कोई अंतर नहीं होता। सब समान होकर एक साथ रहे, यह समाज की मूल अवधारणा हैं। अर्थात् विभिन्न जातिगत समूहों का एक साथ मिलन यही हैं सामाजिक समरसता है नि:सन्देह विगत एक दशक से नगर में समरसता मंच के श्रेष्‍ठ प्रयासों से सामाजिक समरसता का अनुकूल वातावरण बना है जिससे मंदसौर का मान देश में बढ़ा हैं।
दरअसल १० के दशक में समाज में पारंपरिक पर्वों व उत्‍सवों में फीकापन आने लगा था। यह सुना जाने लगा था कि अब त्‍यौहारों में वह बात नहीं रही किसी समय मंदसौर की होली बड़ी प्रसिद्ध थी किन्‍तु होली के रंग फीके पड़ने लगे थे, जातिगत समाजों के आदर्श पुरूषो्ं की जन्‍म जयंतियों पर निकलने वाले जुलूसों में संख्‍या बहुत कम रहती थी। टेलीवविजन के विस्‍तार ने लोगों को घरों में ही कैदकर विलया था सामाजिक जीवन एकरस होता जा रहा था। किन्‍तु सामाजिक जीवन एकरस होता जा रहा था। किन्‍तु आज वर्ष 2016 में हमारा नगर उस तटस्‍थ व एकरस जीवन से काफी उभर गया है। अब समाजों के जुलूसों में व्‍यापक भव्‍यता नजर आने लगी है, छोटे से छोटे व बड़े से बड़े आयोजनों को लेकर समाजजनों में उत्साह का .संचार हुआ हैं। इसका पूरा श्रेय यदि समरसता मज के प्रयासों को दिया जाय तो कोई अतिश्‍योक्ति नहीं होगी।
मीडिया का भी इन प्रयासों में उल्‍लेखनीय योगदान रहा। यदि हम किसी भी अव्‍यवस्‍था या विकृति की खुलकर आलोचना या निन्दा कर सकते हैं तो हमें किसी भी अच्छी प्रवृति व श्रेष्ठ प्रयासों की प्रशंसा करने में भी पीछे नहीं रहना चाहिये।
समरसता मंच के बेनर तले जब विभिन्‍न समाजों के जुलूसों चा चल समारोहों का अन्य समाजजन स्वागत करते हैं तो सचमुच नगर में बड़ा ही समरस वातावरण बन जाता हैं, सनातन हिन्दू संस्कृति के अन्तर्गत आने वाले सभी समाजों का एक ऐसा पुंजबन जाता हैं जो न केवल सामाजिक एकता को सुदुढ़ करता है वरन हमारी पर्व संस्‍कृति व परम्‍पराओं को नई पीढ़ी में सम्‍प्रेषण करने की भी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आज 6 नवम्‍बर रविवार को बंडीजी के बाम में समरसता मंच का दिपालवी मिलन समाराेह सम्‍पन्‍न हुआ जिसमें राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ के विभाग प्रचारक श्रीमान नन्‍ददास जी दण्‍डोतियां जी ने सामाजिक समरसता विषय पर अपना उद्भोदन दिया। दिपावली व होली इन दो बड़े पर्वों के माध्यम से नगर को समरसता पूर्ण वातावरण का निर्माण करने में राष्ट्रीय स्‍वंय सेवक संघ से प्रेरित यह अभिनव मिशन वास्‍तव में सामाजिक जीवन को सार्थकता प्रदान कर रहा है इसके लियें नगर में समरसता मंच के सभी दायित्‍ववान लोग साधुवाद के पात्र है। जब प्रांत व राष्‍ट्रीय स्‍तर पर मंदसौर के समरसता मंच की प्रशंसा होती है तो निश्चित ही मंदसौर का मान व हम नगर वासियों का गौरव बढ़ता हैं। गंदसौर नगर से यदि देश में सामाजिक समरसता का यह स्वरूप विस्तारित होता है तो इससे अच्‍छी बात हमारे लिया और क्‍या हो समती है।

सह सचिव ब्रजेश आर्य द्वारा दिए गए प्रस्‍तावना के अंश

सम्‍मानित मंच एवं कार्यक्रम में पधारे सभी समाज जन एवं मात्र शक्ति, सामाजिक समरसता मंच द्वारा आयोजित दिपावली मिलन कार्यक्रम में आप सभी का हार्दिक स्‍वागत एवं अभिनन्‍दन, प्रतिवर्षानुसार आज भी हम इस कार्यक्रम में निमित उपस्थित हुए है।
मनुष्‍य एक सामाजिक प्राणी है ओर वह अपने-अपने समाज में, समाज की रीति-निति एवं संस्‍कृति तथा समाज के महापुरूषों द्वारा बताए गए मार्ग का अनुसरण करता है। इस भारत भुमि पर रहने वाला प्रत्‍येक व्‍यक्ति हिन्‍दु है उसकी उपासना पद्धति चाहे जो कोई भी हो, भारत माता की संतान होने के नाते हम सभी आपस में बंधु है।
हिन्‍दु सहोदरा सर्वे, न हिन्‍दु पतितों भवे।
मम दिक्षा हिन्‍दु रक्षा, मम धर्म समानता।।
हम ऊँच-नीच व छुआ-छुत का भाव त्‍यागकर, समान भाव से एक दुसरे के प्रति आचरण करें। परम पुज्‍य बाला साहब जी देवरस ने कहा है कि ”यदि छुआ-छुत पाप नहीं है तो कोई भी कृत्‍य पाप नहीं हो सकता।”
हमारे देश में पूर्वकाल में जातिय प्रथा नही थी, कार्य के आधार पर वण्र व्‍यवस्‍था थी। हमारे देश में समाज को चार वर्णों में बांटा गया था। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वेश्‍य व शुद्र। यहां शुद्र का अर्थ अछुत नहीं है, सेवाकार्य करने वाले को शुद्र कहा गया है, लेकिन कालांतर में किन्‍ही कारणों से हमारे देश में जाति प्रथा प्रारम्‍भ हुई, इस प्रथा मे कही कुरिति के रूप में छुआ-छुत एवं ऊँच-नीच का भाव देखने में आता है हम सभी एक परम पिता परमेशवर की संतान है। अत: हम सभी में किसी भी प्रकार की असमानता नहीं होना चाहिए।
हमारे मंदिरों, जलस्‍त्रोंतों एवं शमशान घाटों पर सभी समाजों का समान अधिकार होना चाहिए। इसी भाव को पुष्‍ट करने लिए सामाजिक समरसता मंच ने सभी समाजों को एक जगह एकत्र लाने का प्रयास किया है। ओर हमे प्रसन्‍नता है कि इस कार्य में हमे पूर्ण सफलता प्राप्‍त हुई है। आज नगर में निवास करने वाले लगभग 140 समाज एक स्‍थान पर एकत्र आकर कार्यक्रमों में सम्मिलित होते हैं। ओर एक पंगत में बैठकर भोजन करते हैं। इसके साथ ही किसी भी समाज के महापुरूष व आराध्‍य देव की जयंती पर आयोजित शोभा यात्रा एवं अन्‍य कार्यक्रमों में सभी समाज सम्मिलित होते हैं। शोभा यात्राओं के समय पूरे नगर में स्‍वागत का एक अनुठा दृष्‍य उपस्थित होता है। समरसता मंच के इस प्रयास से सभी समाजों में जागृति आई है ओर सभी समाज विभिन्‍न प्रकार के धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।
सामाजिक समरसता मंव के माध्‍यम से हमने वृक्षारोपण, स्‍वच्‍छता, जल स्‍त्रोतों का संरक्षण एवं सफाई व अंर्तराष्‍ट्रीय योग दिवस पर सभी समाजों को इन कार्यक्रमों से जोड़ा है। सामाजिक समरसता मंच द्वारा प्रत्‍येक वर्ष दिपावली मिलन वर्ष प्रतिपदा उत्‍सव (गुड़ी पड़वा) एवं होली पर मिलन व फाग महोत्‍सव का आयोजन किया जाता है। जिसमें बड़ी संख्‍या में सभी समाजों के महानुभावों का सहयोग प्राप्‍त होता है। आगामी लक्ष्‍य के रूप में कुछ रचनात्‍मक कार्य प्रारम्‍भ किये जा सके ऐसी योजना है। इसी कड़ी में आप सभी इस दिपावली मिलन समारोह में यहां पधारे पुन: आज सभी का स्‍वागत् अभिनन्‍दन

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