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बच्चे स्कूल जाने की जगह सड़कों पर मांग रहे भीख

जून 2015 में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा प्रदेश के सभी कलेक्टर को भिक्षावृत्ति रोकने के लिए निर्देश जारी किए थे। इसके लिए महिला एवं बाल संरक्षण विभाग, पुलिस और चाइल्ड लाइन के अधिकारियों ने मिलकर 2016 में 200 से अधिक बच्चों को भिक्षावृत्ति करते हुए पकड़ा। इसमें 180 बच्चों के नाम स्कूल में थे लेकिन वह भीख मांग रहे थे। अधिकांश घुमक्कड़ जाति और कचरा बीनने वाले बच्चे शामिल थे। इनके लिए खुला आश्रय गृह खोलने का प्रस्ताव भी बनाकर भेजा गया। लेकिन शासन द्वारा अभी तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है।

इसलिए जरूरत है आश्रय गृह की
घुमक्कड़ जाति और कचरा बीनने वाले बच्चों का नाम लिखकर स्कूल में छात्र संख्या बढ़ाई जा रही है। इधर माता-पिता उन्हें स्कूूल भेजने में रुचि नहीं ले रहे हैं। बच्चे इधर-उधर घूमकर भीख मांग रहे हैं। वर्ष 2016 में 6 बच्चों को भिक्षावृत्ति करते पकड़कर नूतन स्कूल में प्रवेश दिलाया गया। उसके बाद से उनका कोई पता नहीं। खुले आश्रय गृह में बच्चों को दिनभर रखकर शैक्षणिक गतिविधियों और उन पर नजर रखने की योजना तैयार की गई थी। पर अभी तक इसके लिए कोई सक्षम स्वीकृति नहीं होने से बच्चों के माता-पिता से सिर्फ वचन पत्र लिया जा रहा है। इसके बाद बच्चा स्कूल जा रहा है या नहीं। इसकी जानकारी नहीं मिल पा रही है।

माता-पिता मंगवा रहे भीख
पिछले सप्ताह में रामगंज मंडी के छह साल के बच्चे को भीख मांगते हुए पुलिस ने पकड़ा था। पूछताछ की तो पता चला कि मां ने पशुपतिनाथ मंदिर में उसे भीख मांगने के लिए छोड़ दिया और खुद भी दूसरी जगह भिक्षावृत्ति के लिए निकल गई थी। मां चांदनी ने बताया कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से वह बेटे के साथ भिक्षावृत्ति कर रही थी। इस तरह से कई मामले सामने आए हैं। जिसमें बच्चों को खुद माता-पिता भीख मांगने के लिए भेज रहे हैं। हालांकि बच्चों से भीख मंगाने पर सजा का प्रावधान भी है। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

फिर से प्रक्रिया शुरू करेंगे
– जिस संस्था के नाम से खुले आश्रय गृह के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। उसके पास भवन नहीं होने के कारण स्वीकृति नहीं मिल पाई। एक बार फिर विज्ञप्ति निकालकर प्रक्रिया शुरू करेंगे।-राघवेंद्र शर्मा, बाल संरक्षण अधिकारी

भिक्षावृत्ति मिटाने में ये समस्याएं

– माता-पिता का निरक्षर होना।

– परिजनों का मजदूरी पर जाने के कारण बच्चों पर ध्यान नहीं देना।

– माता पिता का भी भिक्षावृत्ति में लिप्त होना।

– प्रशासन के प्रयास औपचारिकता तक सीमित होना।

– बच्चों का स्कूल में प्रवेश दिलाने तक कार्रवाई सीमित रहना।

– स्किल डेवलपमेंट योजना का अभाव।

– घर नहीं होने के कारण बच्चों को मुक्त कराकर रखने की समस्या।

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