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बसन्त आगमन के पूर्व स्वागत के लिये सरसों की पीली साड़ी पहनकर श्रृंगारित हो रही धरती माता – श्री टांक 

मन्दसौर। इन दिनों खेतों में खड़ी पीली सरसों की फसल आकर्षण का केन्द्र बनी हुई हैं। क्षेत्र में इस बार वर्षा कम होने से रबी की मुख्य फसल गेहूं, चना, धनिया आदि के स्थान पर कम पानी की फसल सरसों (रायड़ा) अधिक बोया गया है, जो तरूणाई पर होकर पीले फूलों से लबरेज है। गांवों में जैसे ही गांव से बाहर निकलकर जंगल में खेतो की ओर निगाह जाती है, दूर-दूर तक खेतों में लहलहाती पीली सरसों ऐसे लगती है मानों पीली किनारी लगी हरी साड़ी से श्रृंगारित होकर चूनरी पहनकर धरती माता बसन्त आगमन के स्वागत में पूर्व तैयारी से शोभायमान हो रही है।  सरसों फसल का एक दूसरा पहलू यह भी देखने में आया कि कहीं-कहीं खेतों में सरसों की फसल पानी के अभाव तथा उचित मात्रा में खाद नहीं मिलने से फसल कमजोर दिखाई दी वहीं कहीं पर फलियों से लदी सरसों भरपूर लहलहाती दिखाई दी। ऐसी ही फसल जो अन्य खेतों से काफी अच्छी दिखाई दी, अपनी यौवनावस्था के अंतिम छोर पर फूलों के स्थान पर मोटी-मोटी फलियों से पौधा लबालब भरा हुआ लाल घाटी के कृषक श्री धूरीलाल गुर्जर के खेत मेें दिखाई दिया। श्री गुर्जर से इसका कारण पूछने पर उन्होनंे बताया कि फसल की 5 बार उन्होनंे जहां भरपूर सिंचाई की वहीं उन्होंने जैविक गोबर उर्वरक देने से सरसों अपेक्षा से अधिक अच्छी खड़ी है और उन्हें भरपूर इसका लाभ मिलेगा। धूरीलाल ने अधिक लाभ लेने तथा जमीन की लम्बे समय तक उपजाऊ क्षमता बनी रहने के लिये किसान भाईयों से रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर गोबर, केंचूआ आदि जैविक खाद का अधिक से अधिक मात्रा में उपयोग करने का सुझाव दिया।  उक्त जानकारी बंशीलाल टांक ने दी।

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