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बालिका जन्म होते ही होगा लाड़ली लक्ष्मी योजना में पंजीयन

महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती चिटनिस ने कहा कि जिन अशासकीय संस्थाओं में 10 से अधिक महिलाएँ कार्यरत हैं वहाँ लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम-2013 के निर्देशों का बोर्ड लगाना तथा आंतरिक परिवाद समिति का गठन जनवरी 2017 तक सुनिश्चित कर लिया जाए। बैठक में भरण पोषण अधिनियम के अंतर्गत न्यायालय द्वारा जारी नोटिस की तामीली को सुनिश्चित करवाने के लिए जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारियों को जिला प्रशासन स्तर पर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए गए। महिला-बाल विकास मंत्री ने कहा कि “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” योजना का क्रियान्वयन प्रदेश के सभी जिलों में किया जायेगा। हिंसा से प्रभावित महिलाओं को एक ही स्थान पर पुलिस सहायता, चिकित्सा और सलाह-सांत्वना के लिए प्रदेश के 18 जिलों में वन स्टाप सेंटर “सखी” आरंभ किए जायेंगे।
महिला-बाल विकास मंत्री ने कहा कि कुपोषण की चुनौती का सामना करने के उद्देश्य से संपूर्ण प्रदेश में कुपोषित बच्चों के वास्तविक चिन्हांकन के लिए विशेष वजन अभियान संचालित किया जा रहा है। वजन लेने की प्रक्रिया में विभाग के उच्च अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। इससे बच्चों के वास्तविक चिन्हांकन उनकी स्थिति सुधारने और कुपोषित बच्चों के ग्रेड परिवर्तन के लिए व्यवस्थित प्रयास करने में मदद मिलेगी। बैठक में शौर्या दल के दायित्वों पर भी चर्चा हुई। श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि रक्त अल्पता दूर करने के लिए चलाये जा रहे लालिमा, पंचवटी से पोषण अभियान, शौचालय के उपयोग को प्रोत्साहित करने, सही उम्र में विवाह के लिए वातावरण बनाने जैसे कार्यों में शौर्या दल सहभागिता करे। उन्होंने कहा कि आँगनवाड़ी केंद्र में देश प्रेम तथा वीरता पर आधारित सत्य घटनाओं, मिट्टी, पानी और वृक्षों के प्रति संवेदनशीलता वाली जानकारियों और लोकगीत, नृत्य और स्थानीय रुचि के अनुसार सांस्कृतिक गतिविधियाँ करवाने में भी शौर्या दल सहयोग करेगा। बैठक में आँगनवाड़ी कार्यकत्ताओं की गृह भेंट, सांझा चूल्हा, स्नेह सरोकार कार्यक्रम, अटल बाल मिशन, आँगनवाड़ियों में उदिता कार्नर की स्थापना, पीसी पीएनडीटी एक्ट के क्रियान्वयन और आँगनवाड़ी कार्यकत्ताओं के प्रशिक्षण की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
बैठक में प्रमुख सचिव महिला-बाल विकास श्री जे. एन. कंसोटिया, आयुक्त एकीकृत बाल विकास कार्यक्रम श्रीमती पुष्पलता सिंह सहित महिला सशक्तिकरण संचालनालय तथा एकीकृत बाल विकास परियोजना के राज्य, संभाग और जिलास्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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