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बाल विवाह के खिलाफ अपनों से लड़ी जंग

लंबे समय से समाज से प्रचलित बाल विवाह नामक कुरूति को रोकने के लिये कानून बने, कई अभियान भी चलाये गये। लोगों को जागरूक किया गया। बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में बताया गया। स्कूलों में जाकर बालिकाओं को बालविवाह की खिलाफत करने का हौंसला दिया गया। बस फिर क्या था। निकल पड़ीं अपनी मंजिल की ओर वे पीड़ित लड़कियां, जिन्हें केवल हिम्मत और हौंसले की जरूरत थी। मंदसौर जिले की चार बेटियों ने लाडों अभियान से प्रेरणा लेकर अपने बाल विवाह के खिलाफ अपनों का विरोध सहनकर सरकारी सहयोग से न्यायालय तक पहुंचकर जंग जीतकर सफलता प्राप्त की। जब बेटियों का हौंसला देखा, तो बेटे भी पीछे नही रहे। उन्होने भी अपनों की खिलाफत का मन बनाया और महिला सशक्तिकरण से सहयोग की मांगकर अपने हक की लड़ाई के लिये कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया। उनकी हिम्मत से समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी। हाल ही में राज्य शासन द्वारा इन्हें पुरूस्कार स्वरूप 51-51 हजार रूपये की धनराशि प्रदान करने की घोषणा की गई तथा उन्हें ब्रांड एम्बेसेडर भी बनाया गया है।
कलेक्टर श्री स्वतन्त्र कुमार सिंह ने बताया कि बाल विवाह की खिलाफत करने वाले 10 लोगों को राज्य शासन द्वारा प्रतिवर्ष नकद पुरस्कार देकर पुरस्कृत किया जाता हैं। जिसमें मंदसौर जिले से दो बालिकाओं एवं एक बालक का चयन हुआ हैं। यहां से सुश्री नेहा कछावा, सुश्री ललिता मीणा तथा श्री गोविन्द गरासिया को चयनित किया गया है। कलेक्टर श्री सिंह ने कहा है कि समाज में लंबे समय से व्याप्त कुरूतियों को मिटाना बडा आसान नहीं होता है। उन्हें तभी मिटाया जा सकता हैं, जब पूरे समाज का सहयोग मिले। मंदसौर जिले के जिन बेटे व बेटियों ने बाल विवाह के खिलाफ आगे आकर आवाज उठाई थी, राज्य शासन द्वारा दन सभी को 51-51 हजार रूपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जायेगा।

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