बाल विवाह रोकने पोर्टल पर होंगे देशभर के अधिकारियों के नंबर

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जिले में बाल विवाह की रोकथाम के लिए पिछले साल 20 फरवरी को ही महिला सशक्तिकरण विभाग ने 100 रुपए का टाॅक टाइम देने की योजना शुरू की थी। इसके साथ ही वाट्सएप नंबर भी जारी किया। इसे देखकर देशभर के विभिन्न राज्यों से बाल विवाह की सूचना बाल संरक्षण अधिकारी राघवेंद्र शर्मा को मिलने लगी। समाचार-पत्रों में प्रकाशित खबरों को देखकर शुक्रवार को सांसद सुधीर गुप्ता ने बाल संरक्षण अधिकारी शर्मा से योजना की जानकारी ली। इस दौरान उन्हें पता चला कि बाल विवाह रुकवाने को लेकर देशभर में केवल एक ही अधिकारी का नंबर ऑनलाइन है। इसकाे गंभीरता से लेेते हुए सांसद ने महिला बाल विकास मंत्रालय केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी से चर्चा करने व देशभर के सभी अधिकारियों के नंबर ऑनलाइन दर्ज कराने को लेकर प्रयास करने का भरोसा दिया।

विवाह पूर्व रजिस्ट्रेशन की राह भी दिखाई थी- विवाह पूर्व रजिस्ट्रेशन की राह भी मंदसौर ने दिखाई थी। इसे अब पूरे प्रदेश में लागू किया है। इससे मामलों में भी कमी आई है। बाल संरक्षण अधिकारी शर्मा ने बताया विवाह पूर्व रजिस्ट्रेशन को लेकर मंदसौर में जून 2016 से प्रयास किए थे।

इसलिए जारी होना चाहिए पोर्टल पर सभी के नंबर
बाल विवाह के मामले में बाहर जिलों व राज्यों से आने वाली शिकायताें में कई बार अधिकारियों को सूचित करने के बाद भी गंभीरता से नहीं लिया जाता। दिसंबर में पंजाब के मानसा जिले की बुढ़लाड के बहादुरपुर से मिली बाल विवाह की सूचना पर स्थानीय अधिकारियों को सूचित करने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। करीब 11 घंटे मंदसौर जिले के बाल संरक्षण अधिकारी ने प्रयास किया तब जाकर बाल विवाह रुकवाया जा सका। मंदसौर में बेहतर काम किया जा रहा, बाल विवाह रोकने को लेकर मंदसौर में बेहतर काम किया जा रहा है। अधिकारियों ने सही दिशा में ध्यान आकर्षित कराया है। मैं मार्च में दिल्ली में ही रहूंगा और इसे लेकर केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्री मेनका गांधी से भी इसे लेकर चर्चा करूंगा। लोगों की सुविधा के लिए पोर्टल पर सभी अधिकारियों के नंबर होना ही चाहिए। सुधीर गुप्ता सांसद

बाल विवाह को केंद्र सरकार ने बच्चों के साथ क्रूरता मानते हुए किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के संशोधन में बालकों के साथ क्रूरता के रूप में परिभाषित किया है। इसके अनुसार बाल विवाह कराने पर परिजन को 3 साल की सजा व एक लाख रुपए जुर्माना किया जाएगा। इसके अलावा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत भी बाल विवाह कराने वाले व इसमें सहयोग करने वालों को दो-दो साल की सजा व जुर्माना होगा। मामले में दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। एक मामले में दिल्ली की एक अदालत ने बाल विवाह को ज्यादती से भी बड़ा अपराध माना है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम में आयोजक प्रायोजक सभी के लिए सजा के प्रावधान किए गए हैं। बाल विवाह बच्चो के साथ क्रूरता के साथ ही उनके अधिकारों का हनन है।

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