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बीमा कंपनियों के खिलाफ फोरम ने दिया फैसला

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम के अध्यक्ष बीके द्विवेदी एवं सदस्य अजय भटनागर ने एक मामले में निर्णय देते हुए दो लाख रूपए तक का बीमा धन के लिए सव्यय आदेश पारित किया तथा परिवाद पत्र प्रस्तुति दिनांक से वसूली तक सात प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज एवं प्रार्थी के हुए मानसिक संत्रास के मद से बीस हजार रूपए का अतिरिक्त भुगतान देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही निर्णय में यह कहा कि बीमा कंपनियों की उपभोक्ता की प्रति उपेक्ष अक्षम्य अपराध के समान है। अभिभाषक आरसी नीमा ने बताया कि विजय कुमार मेहता ने पंजाब नेशनल बैंक दलौदा के माध्यम से दी ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड इंदौर से पीएनबी-ओरिएंटल रायल मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी। पॉलिसी लेने के करीब दस माह बाद विजय मेहता की ह्दय संबंधी बीमारी होने के कारण एंजियोप्लास्टि ऑपरेशन करवाना पड़ा। उपचार ऑपरेशन में हुए व्यय की राशि बीमा कंपनी से मांगी तो बीमा कंपनी ने मना कर दिया।

नहीं बताते संपूर्ण शर्ते- उन्होंने बताया कि आदेश में लिखा है कि बीमा कंपनी के एजेंटों द्वारा उपभोक्ताओं को बीमा पॉलिसी बेचते समय बीमा की संपूर्ण शर्ते नहीं बताई जाती है। तथा कई बार लोक लुभावन सपने दिखाकर पॉलिसी विक्रय की जाती है। बाद में बीमा कंपनियां उन्हें शर्तांें का अवलंबन लेकर उपभोक्ताओं के दावे का खंडन कर देती है। जिससे उपभोक्ता ठगा महसूस करता है। बीमा पॉलिसी की शर्तें बीमा पॉलिसी का भाग नहीं बनाई जाती है। बल्कि उके संबंध में बीमा कंपिनयों द्वारा वेबसाईट पर देखने का निर्देश बारिक अक्षरों में अथवा क्लिस्ट भाषा में रहती है। जिनको पढऩा और समझना विधि का ज्ञान रखने वालों के लिए भी कठिन होता है। बीमा कंपनी के ऐसे व्यवहार को कदापि अनुमति नहीं दी जा सकती है। बीका कंपनियों का उपभोक्ताओं के प्रति ऐसा व्यवहार अक्षम्य अपराध के समान है। जिसे सहन नहीं किया जा सकता है। इस संबंध में फोरम ने आवश्यक कार्रवाई के लिए आईआरडीएआई को निर्णय की एक प्रतिलिपी सहित पत्र लिखने के लिए भी आदेश दिया है।

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