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बुराई के खिलाफ लड़ना व उसे बंद करवाना,वास्तविक में महिला क्रांति का अनुठा व अदम साहस का परिचय है – श्री कोठारी

मंदसौर। मध्यप्रदेश के कई कस्बों, गांवों व शहरों में शहरी व ग्रामीण महिलाओं द्वारा शराब दुकान को बंद करवाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। शराब की दुकानों कां बंद कराने के लिये महिला संगठनों का उग्र आक्रोश प्रदेश के साथ साथ अन्य राज्यों में भी देखने को मिल रहा है, महिलाएॅ संगठित होकर सामूहिक रूप से, शराब दुकानों को बंद करवाने का अदम साहस दिखा रही है। जो सराहनीय है, अपितु प्रशंसनीय भी है। शराब की दुकानों में आग लगाना, दुकान नहीं खुलने देना, सामुहिक रूप से प्रदर्शन करना,हाथों में लठ्ठ लेकर शराब दुकानों को बंद करवाना, शराब की बोतलों को फोड़ना जैसे प्रदर्शन कर दुकान का संचालन बंद करवाना। ऐसे कई मामले वर्तमान में शराब के विरोध में अखबारों व मिडिया के माध्यम से देखने व पढ़ने को मिल रहे है। बुराई के खिलाफ लड़ना व उसे बंद करवाना, वास्तविक में महिला क्रांति का अनुठा व अदम साहस का परिचय है। किसी भी बुराई का अंत संगठित विरोध के माध्यम से किसे जाने से उसके परिणाम निश्चित ही सार्थक साबित होते है। इसी का परिणाम है कि बस्तियों में व शहर के बीच में चलने वाली कई मदिरालय दुकानों का अन्यत्र स्थापित होना पड़ा, वर्तमान परिपेक्ष में शराग के दुष्परिणामों का सबसे ज्यादा खामियाजा घर की गृहणियों को ही भुगतना पड़ता है। शराब पीने वाले पर तो इसका नशा हावी होता ही है। लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर परिवार की भावी पीढी पर दिखाई देता है। शराब व्यक्ति का तो पतन करती ही है, लेकिन साथ ही पूरे परिवार का भी पतन हो जाता है। शराब के नशे के व्यक्ति से सबसे ज्यादा पीड़ा, उत्पीडन घर की गृहणियों को ही झेलना पड़ता है। गुजरात, बिहार मेें पूर्णरूप से शराबबंदी लागू है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान ने नर्मदा यात्रा के दौरान लोगों से शराब बंद करने की अपील की है, अभी हाल ही में मध्यप्रदेश के मोहनखेड़ा में भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी की मिटिंग में शराब बंदी को लेकर मुख्यमंत्री ने अपना वक्तव्य दिया है, लेकिन सरकार के ही काबिना मंत्री जयंत मलैया ने शराबबंदी की संभावनाओं से इंकार करते हुए कहा कि प्रदेश मे शराब बंदी करना नामुमकिन है, चॅूकि वर्तमान में प्रदेश सरकार को शराब की दुकानें आवंटन करने में सालान 7500 सौ करोड़ का राजस्व की प्राप्ति होती है, जो कि प्रदेश के सालान बजट का 60 प्रतिशत है। शराब के कारोबार से विभिन्न राज्यों को मिलने वाली आय लगभग 1.50 करोड़ के आसपस है। ऐसोचेम के अनुमान के मुताबिक यह व्यवसाय 30 फीसदी सालाना की दर से फलफूल व तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 1060 अंग्रेजी दारू व 2624 देशी शराब की दुकानों का संचालन आबकारी विभाग की देखरेख में किया जा रहा है। प्रदेश में भी शराब के व्यवसाय से हजारो गुना राजस्व की वृद्धि को देखा गया है। वर्ष 2004- 05 में प्रदेश सरकार को शराब की दुकानों से मिलने वाला राजस्व मात्र 800 करोड़ के आसपास था, जो महज 12 साल में 7500 (सात हजार पाॅच सौ करोड़) के आसपास पहुॅच गया है। इससे इस बात को नकारा नहीं जा सकता है। कि इस व्यवसाय व शराब के नशा करने वाले उपभोक्ता की दिन प्रतिदिन बढ़ती तादात को नकारा नहीं जा सकता है। वर्तमान में नशे का सबसे ज्यादा शिकार युवा पीढी को देखा जा सकता है। जितने भी सड़क हादसे हुए है उनमें सबसे ज्यादा नशे की हालत में पाये जाने पर ही हुए है। ज्यादातर अपराध भी नशे के मदहोश में किये जाते पाये गये है। इस बात की पुष्टि स्वयं प्रदेश के डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला ने की है। निश्चित ही प्रदेश के मुखिया द्वारा शराब बंदी का निर्णय स्वागत योग्य होगा,इस निर्णय से शराब से व्याप्त बुराई को जडमूल से खत्म करने का अवसर मिलेगा व असमय होने वाली दुर्घटनाओं से भी निजात मिल सकेगी, जिससे नशामुक्ति व भयमुक्त समाज की स्थापना में यह साहयसिक कदम मिल का पत्थर साबित होगा।

Post source : कमल कोठारी, मंदसौर

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