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बुरा न मानो होली है…… मंदसौर के नेताओं की प्रकृति व कार्यशैली पर राजनीति व्यंग्य

होली विशेष- बुरा न मानो होली है……

नेताओं की प्रकृति व कार्यशैली पर राजनीति व्यंग्य

1. सुधीर गुप्ता – अपनी डपली अपना राग

2. मीनाक्षी नटराजन – काठ की हांडी दुबारा नहीं चढ़ती

3. कैलाश चावला – जब नाचना हो तो घुंघट कैसा

4. जगदीश देवड़ा – गुरू कीजिये जानकर, पानी पीजिये छानकर

5. यशपालसिंह सिसौदिया – अपनी घोड़ी छाया में बांधना

6. नरेन्द्र नाहटा – फूकने से पहाड़ नहीं उड़ते

7. बंशीलाल गुर्जर – न रहेगा बांस न बजेगी बासूरी

8. देवीलाल धाकड़ – गरीब की लुगाई, सबकी भौजाई

8. राजेन्द्रसिंह गौतम – ऊँट किस करवट बैठेगा

9. प्रकाश रातड़िया – दीपक तले अंधेरा

10. मदनलाल राठौर – ना नौ मन तेल होगा, ना राधा नाचेगी

11. मुकेश काला – काजल की कोठरी में धब्बे का डर

12. राधेश्याम पाटीदार – गधा मरे कुम्हार का, धोबिन सती होय

13. विपिन जैन – बिल्ली के भाग से छिंका गिरना

14. महेन्द्र चौरड़िया – गये थे रोजा छुड़ाने, नमाज गले पड़ी

15. नरेश चंदवानी – चांदी का चम्मच लेके . . . .

दिनेश नागर


किया तुमने सभी का पूरा बंटाधार मोदी जी, विरोधी जो थे उनको कर दिया बेजार मोदी जी, पिला डाला है पानी सबको नानी याद दिलवाकर, ऐसे तो सब पहुंच जाएंगे हरिद्वार मोदी जी….बुरा न मानो होली है- हास्य कवि प्रवीण शुक्ला

 


बुरा ना मानो होली हैं

दूल्हनें यहां जलाई जाती हैं, दूल्हों की लगती बोली हैं, बुरा ना मानों होली है।
नेताओं के भाषण झूठे हैं, तमाम वादें घोषणाएं पोली है, बुरा ना मानों होली है।
आरक्षण का घुन लग गया, बेरोजगारों की भटकती टोली है, बुरा ना मानों होली है।
समस्याओं की मारी जनता, भ्रष्टाचारियों ने दूकानें खोली है, बुरा ना मानों होली है।
प्यार, भाईचारे के किस्से नहीं, बैरभाव,नफरत की रंगोली है, बुरा ना मानों होली हैं।
कानून की धज्जियां उड़ाने वाले, चोर पुलिस की आंख मिचौली है, बुरा ना मानों होली है।
घोटाले पर घोटाले हो रहे हैं, बैंकों को लूटती अमीरों की टोली है, बुरा ना मानो होली हैं।
फेसबुक और व्हाटसएप में उलझी जनता, पड़ोसियों से अनजान अनबोली हैं, बुरा ना मानों होली है।
पैसों के दम पर कायम रिश्ते, कीमतों ने भावनायें तोली है, बुरा ना मानों होली है।
हिंसा, हत्या, बलात्कार के तांडव, देखकर मानवता डोली है, बुरा ना मानों होली हैं।
देश प्रेम का अकाल पड़ा है, भारत मां ने आंखें भिगोली है, बुरा ना मानों होली है।
सच्ची बातें हैं जरा गौर कीजिए, ये ना समझना हंसी ठिठोली है, बुरा ना मानों होली हैं।
फागुन की फुहार रंग जायें संसार, शुभकामनाएं आशाएं पिरोली है, बुरा ना मानों होली हैं।

 

अर्चना खंडेलवाल

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