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बेईमानीपूर्वक षड्यंत्र कर भूमि को हड़पने के आरोपीयों को तीन-तीन वर्ष का कारावास

न्यायालय ने पाँच-पाँच हजार रूपये अर्थदण्ड भी किया

मन्दसौर। पुलिस थाना अफजलपुर जिला मन्दसौर के एक प्रकरण में षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीशएन.एस. बघेल साहब द्वारा आरोपी पुष्कर पिता माँगीलाल पाटीदार निवासी जवासिया, नागेश्वर पिता बापूलाल शर्मा निवासी जवासिया एवं अम्बालाल पिता राधेश्याम पाटीदार निवासी करनाखेड़ी जिला मन्दसौर को धारा 420, 120 (बी) के तहत् तीन-तीन वर्ष का कारावास व पाँच-पाँच हजार रूपये अर्थदण्ड तथा अर्थदण्ड न अदा करने पर तीन माह के अतिरिक्त कारावास से दण्डित किये जाने का आदेश दिया है।

लोक अभियोजक विकास कुमार बोहोरा (जैन) के अनुसार 02 मई 2012 को 11.05 बजे के लगभग ग्राम धमनार स्थित पुष्करलाल पिता तुलसीराम पाटीदार निवासी धमनार के स्वामित्व की सर्वे क्रमांक 734/3/मिन-1 रकबा 2.457 हैक्टयर कृषि भूमि एक लाख अस्सी हजार रूपये प्रतिबीघा के मान से सुनीता ओसवाल एवं पिंकी देवड़ा को विक्रय करने का सौदा कर बेईमानीपूर्वक आशय से उत्प्रेषित करते हुए प्रवंचित कर ईश्वरलाल, नवीन पाण्डे, नीतिन पाण्डे, नागेश्वर एवं अम्बालाल पाटीदार के साथ मिलकर उक्त भूमिस्वामी के भाई ईश्वरलाल को पुष्करलाल पिता तुलसीराम दर्शाते प्रवंचना कर राशि सोलह लाख बीस हजार रुपये प्राप्त कर छलकारित किया तथा उपरोक्त भूमि को फर्जी रूप से धोखाधड़ी करने के आशय से ईश्वरलाल को पुष्करलाल दर्शाकर विक्रय करने हेतु आपराधिक षड़यंत्र किया।

पुलिस थाना अफजलपुर में 12 जून 2012 को इस आशय की लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत की गई कि ग्राम धमनार स्थित सर्वे क्रमांक 734/3/मिन-1 रकबा 2.457 हैक्टयर कृषि भूमि एक लाख अस्सी हजार रूपये प्रतिबीघा के मान से क्रय की गई थी। जिसमें पुष्करलाल के नाम से ईश्वरलाल ने स्वयं का फोटो लगाकर फर्जी मतदाता परिचयपत्र लगाकर अभियुक्तगण ने मिलकर विक्रयपत्र निष्पादित करवाया है। बाद में मूल भूमिस्वामी पुष्करलाल पिता तुलसीराम पाटीदार ने विज्ञप्ति प्रकाशित करवाई कि उक्त विक्रयपत्र फर्जी है। अभियुक्तगण ने आपस में षड़यंत्रकर दस्तावेजों की कूटरचना कर छलपूर्वक सोलह लाख बीस हजार रूपये प्राप्त कर लिये है। इस लिखित रिपोर्ट के आधार पर थाना प्रभारी अफजलपुर द्वारा पुलिस अधीक्षक मन्दसौर से प्रकरण दर्ज करने की अनुमति चाही, जिस पर से अनुमति प्राप्त कर एफ.आई.आर. दर्ज की गई जो अपराध क्रमांक 155/12 पर पंजीबद्ध कर चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

अभियोजन ने अपनी ओर से कुल दस साक्षियों के कथन कराये। न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्षियों के कथनों एवं प्रकरण में समग्र साक्ष्य के विवेचन तथा अभियोजन के तर्को से सहमत होकर यह निष्कर्ष निकाला कि अभियुक्तगण पुष्कर, नागेश्वर एवं अम्बालाल ने षड़यंत्र रचकर फरियादी से बारह लाख रूपये का विक्रयपत्र निष्पादित करवाकर विक्रयराशि बेईमानीपूर्वक प्राप्त कर छलकारित किया है। जो कि धारा 420 एवं 120 (बी) भा.द.वि. के तहत् दोषसिद्ध पाये जाने से अभियुक्तगण को तीन-तीन वर्ष का कारावास व पाँच-पाँच हजार रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया है। प्रकरण में शासन की ओर से सफल पैरवी लोक अभियोजक श्री विकास कुमार बोहोरा (जैन) द्वारा की गई।

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