बैंकों में आपको मिलते हैं ये 10 अधिकार, जान लें होगा फायदा

Hello MDS Android App

नई दिल्ली. बैंकों से जुड़े काम सभी के लिए आसान नहीं होते। जानकारी के अभाव में अकाउंट खुलवाना, लोन लेना जैसे काम मुश्किल जान पड़ते हैं। कस्टमर्स को अक्सर अपने अधिकारों की पूरी जानकारी नहीं होती, जिससे उन्हें इन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इन मुश्किलों से निजात दिलाने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा गठित बैंकिंग कोड्स एंड स्टैन्डर्ड्स बोर्ड ऑफ इंडिया (बीसीएसबीआई) ने बैंक ग्राहकों को बहुत सारे अधिकार दिए हैं। हम आपको ऐसे 10 अधिकारों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें जानकर आप इसका फायदा उठा सकते हैं।

खाता खुलवाने का अधिकार   कोई भी बैंक केवल पर्मानेंट पते के सबूत के अभाव में देश के किसी भी इलाके में रहने वाले भारतीय नागरिक का खाता खोलने से इनकार नहीं कर सकता।

फंड ट्रांसफर का अधिकार   कोई भी व्यक्ति किसी भी बैंक से नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (एनईएफटी) के जरिए 50,000 रुपए तक रकम किसी अन्य बैंक खाते में जमा करा सकता है। इसके लिए जरूरी नहीं है कि संबंधित बैंक में उस व्यक्ति का खाता हो।

चेक कलेक्शन में देरी पर मुआवजा   चेक कलेक्शन में बैंक की तरफ से निर्धारित समय से ज्यादा वक्त लगने पर ग्राहकों को मुआवजा पाने का अधिकार है। मुआवजे की रकम साधारण ब्याज दर के हिसाब से चुकाई जाएगी।

सिक्योरिटी वापस लेने का हक  यदि किसी ग्राहक ने बैंक से लोन लिया है, जिसके लिए सिक्योरिटी दी है तो इस मामले में पूरी देनदारी चुकाए जाने के 15 दिन के भीतर सिक्योरिटी वापस मिलनी चाहिए।
सूचना का अधिकार  बैंक और आपके बीच हुए करार में यदि बैंक इनमें कोई बदलाव करता है, तो उसे ऐसा करने से 30 दिन पहले नोटिस भेजकर आपको इसकी जानकारी देनी होगी।
अनधिकृत निकासी के लिए ग्राहक दोषी नहीं ग्राहक के बैंक खाते से हुई अनधिकृत निकासी के लिए बैंक ग्राहक को दोषी नहीं ठहरा सकता है। इसको साबित करने की जिम्मेदारी बैंक की होगी।
इनकार का कारण जानने का अधिकार यदि बैंक कोई सुविधा देने से इनकार करता है, तो ग्राहक को इसकी वजह जानने का पूरा अधिकार है।
थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स कोई भी बैंक किसी भी ग्राहक को जबरन थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स नहीं बेच सकता। थर्ड पार्टी प्रोडक्ट का मतलब ऐसे उत्पादों से है, जो संबंधित बैंक के नहीं होते।
प्राइवेसी का अधिकार ग्राहकों की निजी जानकारी को गुप्त रखना बैंकों की अहम जिम्मेदारी है। बैंक आपकी निजी जानकारी बिना सहमति से किसी से साझा नहीं कर सकता है।
शिकायत के निपटारे का अधिकार बैंक को कस्‍टमर्स को दिए गए अधिकारों का पालन करना होगा। उसकी शिकायत का बैंक को समाधान करना ही होगा।
उपयुक्‍त व्‍यवहार का अधिकार बैंक ग्राहक से जाति, धर्म, लिंग वगैरह के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता है।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *