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बैंक में फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर ऋण प्राप्त करने के अपराध में पटवारी सहित एक अन्य को अर्थदण्ड

बैंक में फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर ऋण प्राप्त करने के अपराध में पटवारी सहित एक अन्य को तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास एवं पाँच-पाँच हजार रूपये अर्थदण्ड

मन्दसौर। पुलिस थाना नाहरगढ़ जिला मन्दसौर के एक प्रकरण में चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश श्री ए.के.मंसुरी द्वारा आरोपी बालमुकुन्द पिता प्रभुलाल सूर्यवंशी निवासी ग्राम झावल, थाना अफजलपुर तथा पटवारी नागेश्वर सांवरा पिता भेरूलाल सांवरा निवासी महुआ को 420 भा.द.वि. के अपराध में तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास तथा धारा 468, 471 भा.द.वि. के अपराध में तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास एवं कुल पाँच-पाँच हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किये जाने का आदेश पारित किया है।

लोक अभियोजक प्रफुल्ल यजुर्वेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि दिनांक 02 नवम्बर 2017 को फरियादी नानालाल पिता माँगीलाल जाट निवासी खण्डेरियाकांचर ने पुलिस थाना नाहरगढ़ पर रिपोर्ट की थी कि स्टेट बैंक ऑफ इन्दौर शाखा नाहरगढ़ से उसके द्वारा कभी भी कोई ऋण प्राप्त नहीं किया गया किन्तु उसके नाम का उपयोग करते हुए किसी फर्जी व्यक्ति द्वारा ऋण प्रकरण पर अपने आपको नानालाल बताते हुए स्वयं का फोटो चस्पा कर बैंक से पाईप लाईन व थ्रेशर मशीन हेतु 2,80,000ध्- रूपये ऋण प्राप्त किया गया। प्रकरण में विवेचना अधिकारी नाहरगढ़ के तत्कालीन थाना प्रभारी आशुतोष मिश्रा द्वारा बैंक से ऋण प्रकरण सम्बन्धित दस्तावेज, नानालाल की असल ऋण पुस्तिका जप्त की तथा अनुसंधान में यह पाया कि आपराधिक षड़यंत्रपूर्वक नानालाल के नाम से फर्जी प्रमाणपत्र, ऋणपुस्तिका आदि तैयार कर बैंक से ऋण निकाल लिया तथा नानालाल के नकली हस्ताक्षर भी किये गये। प्रकरण में अभियोजन द्वारा राज्य हस्तलेख परीक्षक सहित 19 साक्षियों के कथन कराये तथा 64 दस्तावेज प्रदर्शित कराये। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य के विवेचन के आधार पर विद्वान न्यायाधीश महोदय श्री ए.के.मंसुरी द्वारा यह अभिनिर्धारित किया गया कि आरोपी बालमुकुन्द ने स्टेट बैंक ऑफ इन्दौर शाखा नाहरगढ़ में नानालाल पिता माँगीलाल जाट बनकर फर्जी कागजात प्रस्तुत कर 2,80,000ध्- रूपये का ऋण प्राप्त किया तथा आरोपी नागेश्वर सांवरा ने ग्राम पंचायत के पटवारी होते हुए आरोपी बालमुकुन्द को नानालाल जाट के नाम से ऋण प्राप्त करने हेतु नानालाल की ऋण पुस्तिका की कूटरचना की व असली के रूप में ऋण प्राप्त करने हेतु सहयोग कर आपराधिक षड़यंत्र किया। प्रकरण में अभियोजन की ओर से सफल पक्ष समर्थन लोक अभियोजक प्रफुल्ल यजुर्वेदी द्वारा किया गया।

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