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बैंक विरोधी एवं जनविरोधी सुधारों के खिलाफ राष्ट्र व्यापी बैंक हड़ताल : मन्दसौर में रहा व्यापक असर

मन्दसौर निप्र। यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बेनर तले देश के शीर्ष 9 बैंक यूनियन के आव्हान पर 10 लाख बैंक कर्मचारी-अधिकारी राष्ट्र व्यापी हड़ताल पर रहे। बैंक कर्मचारियों में आक्रोश है कि बैंकिंग सुधार एजेण्डे के तहत बैंकिग विरोधी, जन-विरोधी निर्णय लिये जा रहे हैं, जिससे जनता व बैंक दोनों को हानि हो रही है।  राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत मंदसौर नगर में भी सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के अधिकारी व कर्मचारी हड़ताल पर रहे। जिससे बैंकिंग गतिविधियां, क्लीयरिंग हाऊस आदि कार्य प्रभावित हुए।  यू.एफ.बी.यू. के आव्हान पर गांधी चौराहा पर बैंक के अधिकारियों व कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया तथा जोश-खरोश के साथ नारेबाजी की। बैंक सेवा शुल्क वृद्धि वापस लेने, औद्योगिक घरानों के खराब ऋणों को बट्टे खाते में न डालते हुए सख्ती से वसूल करने, बैंकिंग सुधारों के नाम पर बैंकिंग विरोधी, जन विरोधी कदम नहीं उठाने आदि मांगों के समर्थन में हड़ताल की गई।  विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि बैंक सेवा शुल्क के नाम पर बचत खाता धारकों व चालू खाता धारकों पर विभिन्न प्रभार लगाकर जमाकर्ताओं को दंडित किया जा रहा है एवं इस राशि का उपयोग औद्योगिक घरानों के खराब ऋण, जिनकी वसूली करने में बैंक प्रबंधन व शासन गंभीर नहीं है के नुकसान की भरपाई करने में किया जा रहा है जो कतई उचित नहीं है। जानबूझकर ऋण नहीं चुकाने वाले कार्पोरेट घरानों का ऋण 92 हजार करोड़ के स्तर तक पहुंच गया है, जिसकी वसूली सख्ती से की जानी चाहिये।  आज बैंक गंभीर स्थिति में है, उसके लिये पूंजी की कमी से जुझ रही है। इसके लिये खराब ऋणों की वसूली के बजाय एक आर.डी.आय., एमओयू एग्रीमेंट, बैंक बोर्ड ब्यूरों, एनपीए आर्डिनेंस जैसे अनुपयोगी व बैंकों को निजीकरण की ओर धकेलने वाले कदम उठाये जा रहे है। एक ओर सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों के विलय की बात करते है ताकि वे बड़ी बैंक बन जाये, दूसरी ओर स्मॉल पेंमेंट बैंक जैसी अवधारणा ला रहे है जो विरोधाभासी है।  वक्ताओं ने मांग की कि जान बूझकर ऋण नहीं चुकाने वालों  पर सख्ती से कार्यवाही की जावे, इन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जावे, बैंक सेवा शुल्क वृद्धि वापस ली जाये, सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों को सुदृढ़ करने हेतु सभी संभव उपाय किये जावे। यदि मांगे नहीं मानी गई तो आगामी 15 सितम्बर को यू.एफ.बी.यू. के करीब 1 लाख सदस्य दिल्ली में मार्च टू पार्लियामेंट प्रदर्शन में भाग लेंगे।  विशाल प्रदर्शन सभा को कामरेड महेश मिश्रा, कृष्णगोपाल मोड़, संजय सेठिया, श्रीनिवास मोड़, अनिल जैन, रमेशचन्द्र जैन, सुरेन्द्र संघवी, सुभाष भण्डारी, विजय प्रधान, शिव राजेन्द्र शास्ता, राम अजमेरा, अयाज खान मंसूरी, अब्दूल हमीद खान, महावीर जैन, संतोष गुर्जर, गजेन्द्र तिवारी, लीलाशंकर चौहान, के.सी. सेन बीएसएनल, आदि ने संबोधित किया।

सीतामऊ में भी दिखा असर मंगलवार को राष्ट्रीयकृत बैंक शाखाओ भारतीय स्टेट बैंक, सेन्ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया व बैंक आफ इण्डिया की हडताल से ग्राहको व व्यापारीयो को बैकिंग कार्य के लिए परेशानी झेलना पडी। नगद आहरण के लिए एटीएम में भीड लगी रही।

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