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ब्रहविद्यापीठ का भव्य शिलान्यास श्री ज्ञानदेवसिंह जी महाराज के कर कमलो से सम्पन्न हुआ

मंदसौर निप्र। अक्षय तृतीया के पावन शुभ अवसर पर 28 अप्रेल शुक्रवार को रामघाट स्थित विरक्ताश्रम की पावन भूमि पर श्री श्री 1008महामण्डलेश्वर स्वामी जी अनन्दत देवगिरी जी महाराज श्री स्वामी वामदेव ज्योतिर्मठ वृन्दावन की पावन प्रेरणा से श्री केशव संत्सग मण्डल न्यास मंदसौर द्वारा प्रस्तावित श्री स्वामी वामदेव ब्रहविद्यापीठ का भव्य शिलान्यास समारोह निर्मल पंचायती अखाडा हरिद्वार के अध्यक्ष परम पूज्य आन्नत श्री विभूषित श्री श्री 1008 श्री मंहत स्वामी श्री ज्ञानदेवसिंह जी महाराज के कर कमलो से सम्पन्न हुआ। वृदावन के पूज्य स्वामी श्री विनोदानंद जी महाराज का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।
शिलान्यास भूमि पूजन वैदिक विधी विघान से शास्त्र मर्मज्ञ पंडित श्री उमेश जी शास्त्री वृदावन द्वारा सम्पन्न कराया गया।
संतो का पुष्प हारों से बहुमान नगर पालिका अध्यक्ष प्रहलाद बंधवार संत्सग मंडल ट्रस्ट अध्यक्ष जगदीशचन्द्र सेठिया, सत्यनारायण गर्ग, सचिव कारूलाल सोनी, बंशीलाल टांक, सत्यनारायण सोमानी, श्याम चैधरी, अरूण शर्मा, विनोद मेहता, पं. सदाशिव त्रिवेदी आदि ने किया।
पूज्य स्वामी ज्ञानदेवसिंह जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि जहां-जहां महापुरूषों के चरण पडते है वह स्थान परम पवित्र हो जाता है और जिस स्थान पर महा पुरूष संत भगवान का भजन बंदगी करते है वह स्थान अन्य स्थानों से विशेष अलोकिक दिव्य तथा पूज्य हो जाता है। ऐसे पवित्र स्थलों पर जाने मात्र से कैसा भी विक्षीप्त दुखी तनाव ग्रस्त क्यों न हो वहां बैठने से एक दम शांति का अनुभव होने लगता है। संस्कृत में व्याकरण का होना भी आवश्यक है संस्कृत ग्रंथों में ज्ञान का अथाह सागर समाया हुआ है। परंतु उसे प्राप्त करने का सुअवसर तभी प्राप्त हो सकता है जब हमें संस्कृत का ज्ञान प्राप्त हो । भगवान पशुपतिनाथ की कृपा से यहां पर ब्रम्हविद्या पीठ की स्थापना से लक्ष्य प्राप्त में अवश्य होगा। स्वागत उदबोधन सत्यनारायण गर्ग ने दिया संचालन वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश जोशी ने किया आभार कारूलाल सोनी ने माना।

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