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भगवान पशुपतिनाथ की प्रतिमा की सुरक्षा एवम् ऐतिहासिक प्रेरणास्पद प्रसंग

इतिहास के त्याग एवं बलिदान के सामने वर्तमान की नादानी

मन्दसौर निप्र। सदियों पूर्व आतताईयों से भगवान श्री पशुपतिनाथ की प्रतिमा को सुरक्षित व संरक्षित रखने के लिए उस समय के शिव भक्तों ने विषम परिस्थितियों में भी संतुलित रहकर अपने दिल पर पत्थर व भावनाओं को काबू में रखकर प्रतिमा को शिवना मैया के गर्भ में सुरक्षित रख दिया था । उनकी कितनी बड़ी सोच थी कि हम आज अभिषेक नहीं कर पाएंगे तो क्या हुआ, यदि प्रतिमा सुरक्षित रही तो हमारी आने वाली पीढि़यां प्रतिमा के दर्शन, पूजन व अभिषेक का लाभ ले पाएगी। आज हमारी पीढ़ी उनकी ऋणी है। इतिहास गवाह है कि सैंकड़ों वर्ष पूर्व हजारों दशोरा ब्राह्मणों ने धर्म की रक्षा के लिए व अभी कुछ दशक पूर्व पण्डित मस्तरामजी ने इस धर्म स्थल की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे।

उक्त बात अनुराग संस्था द्वारा भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर प्रबन्ध समिति के पदेन अध्यक्ष व कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव, सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक यशपालसिंह सिसोदिया व नगरपालिका अध्यक्ष प्रहलाद बंधवार को 26 अक्टोबर 2017 को लिखे पत्र में व्यक्त की है। हमारा मूल लक्ष्य प्रतिमा को हर हाल में बचाना है। जब प्राचीनकाल में शिवभक्त इतना बड़ा त्याग कर सकते हैं तो क्या हम थोडी-सी समझदारी भी नहीं दिखा सकते हैं। यदि आज हम प्रतिमा को सुरक्षित व संरक्षित रखने के लिए गंभीर रुप से कटिबद्ध नहीं हुए तो आने वाला समय व पीढि़यां हमें कदापि क्षमा नहीं करेगी।

जब तक विश्व प्रसिद्ध अद्वितीय, ऐतिहासिक महत्व की अतिसुन्दर, कलात्मक विशाल भगवान श्री प्शुपतिनाथ महादेव मन्दसौर में शिवना मैया के तट पर विराजमान हैं तब तक मन्दसौर का नाम सारी दुनिया में गौरव के साथ लिया जाता रहेगा व प्रत्येक नागरिक अपने आप को गौरवान्वित अनुभव करता रहेगा। हम किसी प्रकार की नादानी नहीं करें। प्रतिमा की सुरक्षा ही हमारे लिए सर्वोपरि है। वर्तमान में शिवभक्त ऐतिहासिक तथ्यों व उस विषमकाल में शिवभक्तों की बुद्धिमत्ता से प्रेरणा लेकर भगवान श्री प्शुपतिनाथजी की कृपा हम सब पर अनन्त काल तक बनी रहे ऐसा सर्वथा उचित निर्णय लें।

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