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भाजपा के एम्बेसेडर ने शहर की जर्जर सफाई व्यवस्था को किया प्रमाणित

मुख्यमंत्री द्वारा स्वच्छता के लिये मंदसौर नगरपालिका को दिये गये कास्य पदक की खुली पोल-विजय गुर्जर

मंदसौर – भारतीय जनता पार्टी के जनप्रतिनिधि और सरकार आम नागरिको की समस्याओं को लेकर इतने गंभीर है, इसका प्रमाण पिछले दिनो के घटनाक्रम से जनता के सामने आ गया है। स्वच्छ भारत और स्वच्छ मदंसौर के बडे़-बडे दावे करके लाखो रूपया सफाई के नाम पर मंदसौर के नागरिको से टेक्स के रूप में वसूल करके उन रूपयों को स्वच्छता के नाम पर खर्च करके भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे स्वच्छता अभियान मे प्रदेश में पांचवा स्थान पाकर मुख्यमंत्री से कास्य पदक लेकर सम्मानित होने वाली मदंसौर नगरपालिका के झुठ की पोल भाजपा के स्वच्छता अभियान के एम्बेसेडर ने खुदी के यहां सफाई नहीं होने के विरोध मे धरने पर बैठकर जनता के सामने खोलकर रख दी। यह बात पार्षद विजय गुर्जर ने बताई है।  आगे विजय गुर्जर ने कहा कि मदंसौर शहर के नागरिक वर्षो से सफाई की दुर्दशा पर आसु बहा रहे है। साथ ही शहर के नागरिक लाखों रूपया सफाई के नाम पर टेक्स के रूप मे देने के बाद और नगरपालिका के जिम्मेदारों के बडे-बडे दावों के बाद भी अपने हाथो से घर के बाहर की नालियो और सफाई करने को मजबुर है। इस बात से लगातार सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों को आमनागरिकों द्वारा अवगत कराने के बाद भी अभी तक सत्ताधारी जनप्रतिनिधि सफाई की अव्यवस्था की बात को मानने के लिये तैयार नहीं थे। मगर सफाई के लिये पदक पा चुकी मंदसौर नगरपालिका के जिम्मेदार ब्राण्ड एम्बेसेडर को केवल अपने यहां का कचरा उठाने के लिये धरने पर बैठना पडे तो यह बात शहर की जनता को सरलता से समझ मे आ जाती है कि नगरपालिका परिषद के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियोें की कितनी प्रशासनिक क्षमता है और वह शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर कितने तत्पर और गंभीर है, शायद यही वजह है कि शहर के नागरिक  भाजपा के जनप्रतिनिधियों की इस कार्यप्रणाली की व्यवस्था से हताश होकर अपने घरे के पास सफाई करवाने के लिये सफाई कर्मचारियों को पैसे देकर सफाई कराने के लिये मजबुर हो गये। अगर अधिकारी सत्ताधारी, जनप्रतिनिधि और सरकार को गुमराह करते है और उनकी नहीं सुनते है, तो शहर के आम नागरिकों को अपने कार्यो के लिये और प्रशासनिक व्यवस्था के लिये किसके पास जाना चाहिये और किस पर भरौसा करना चाहिये।  अंत मे पार्षद विजय गुर्जर ने भारत सरकार को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे स्वच्छता अभियान मे कास्य पदक पा चुकी मदंसौर नगरपालिका के जिम्मेदार केवल पदक पाने तक ही सफाई व्यवस्था पर ध्यान देती रही और उसके बाद मदंसौर शहर में सफाई केवल चुनिन्दा लोगो, भाजपा के जनप्रतिनिधियों और व्हीआईपी लोगों के घरों के बाहर तक सीमित होकर रह गई है। आम नागरिकों के घरों की सफाई व्यवस्था की जवाबदारी मदंसौर नगरपालिका का कोई भी जिम्मेदार, जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है, बल्कि भाजपा के जिम्मेदार पदाधिकारी खुद ही सफाई कर्मचारी के आगे बेबस और असहाय नजर आ रहे है।

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