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भारतीय सैनिकों का बलिदान व अपमान कब तक सहेगा हिन्दुस्तान

भारतीय सैनिकों का बलिदान व अपमान कब तक सहेगा हिन्दुस्तान

वैसे तो कहने को जब से केन्द्र में जब से नरेन्द्र मोदी की सरकार बनी है तब से पड़ौसी देश पाकिस्तान के आतंकवादी व देश के अन्दर पल रहे आतंकवादियों के गुर्गों पर कार्यवाहियां तेज हुई है व भारत ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया है व सर्जिकल स्ट्राईक भी किये है। लेकिन इन आतंकवादियों, उग्रवादियों व पत्थरबाजों पर इसका कोई असर नहीं हुआ। कश्मीर में हुर्रीयत नेता खाते भारत की है, रहते भारत में है लेकिन जय के नारे पाकिस्तान के लगाते है। इनका साथ पूर्व में रही सरकारों के मुखिया देते है तथा इन सभी के ईशारों पर वहां पत्थरबाजी हो रही है।
मानसिक विकलांग पत्थरबाज, हुर्रियत नेता व भारत के विश्वासघाती कश्मीरी नेता कश्मीर के हालात को सुधारने में अड़ंगा लगाये हुए है। आज केन्द्र सरकार सबसे ज्यादा पैकेज कश्मीर राज्य को दे रही है। पूरे कश्मीर की अवाम का सबसे ज्यादा ख्याल रख रही है। वहां तैनात सैनिक अपनी जान हथेली पर रखकर वहां की जनता की सुरक्षा कर रहे है। कुछ समय पूर्व आई भयानक बाढ़ में भारतीय सैनिकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर वहां निवासरत लोगों को बाढ़ से जीवित व सुरक्षित निकाला। जो जीता जागता उदाहरण है। उनका एहसान मानना तो दूर, एहसान फरोशी का उदाहरण है। पत्थर बाजी कर भारत की भरोसेमंद सेना को बदनाम करने पर तुले हुए है व हिन्दुस्तान के झण्डे का अपमान व पाकिस्तान के झण्डे का बहुमान कर रहे है। देश के ऐसे गद्दारों को देश छोड़कर चले जाना चाहिये या उन्हें देश से निकाला दे देना चाहिये या देशद्रोह का मुकदमा कायम होना चाहिए। और सेना को खुली छूट दे देना चाहिए ताकि वह इन टेड़ी पुंछ की कहावत वाले हुर्रियतबाजों, नेताओ, आतंकवादियों व इनके गुर्गों को पत्थरबाजी का सबक सीखा सके। आज आवश्यकता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व केन्द्र सरकार कड़े व सख्त निर्णय लेकर कश्मीर का हालात काबू में करे और कश्मीर में धारा 370 खत्म कर देश में समान व्यक्ति, समान कानून लागु करे। देश की उम्मीद भरी निगाहे नरेन्द्र मोदी पर टीकी हुई है।

Post source : संजय जैन, मंदसौर मो.नं. 9893253230

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