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भारत का एक नया सिरदर्द – रोहिंग्या मुसलमान घुसपैठ

हम भारत के लोग प्रतिदिन सुबह अपनी दिनचर्या किसी ना किसी समस्या से शुरू करते हैं और सारा दिन उसको सुलझाने के बाद अगले दिन फिर किसी नई मुसीबत का सामना करने के लिये तैयार रहते हैं और ये हमारी रोजमर्रा जिंदगी का हिस्सा है हम अपनी इन व्यक्तिगत गतिविधियों की किसी के सामने चर्चा भी करना नहीं चाहते क्योंकि ये हमारा व्यक्तिगत मामला है लेकिन राष्ट्र जीवन में आने वाली समस्याऐं अलग तरह की होती हैं और उनके बारे में बात सार्वजनिक रूप से करनी पडती है। राष्ट्रीय समस्याओं की किसी भी प्रकार से अनदेखी या उपेक्षा नहीं की जा सकती। रोहिंग्या मुसलमानों की घुसपैठ भारत के सामने ऐसी ही समस्या के रूप में उपस्थित हुई है जिसका हल ढूंढने की बजाए उस पर जमकर राजनीति शुरू हो गई है और हो भी क्यों नहीं समस्या के साथ मुस्लिम शब्द जो जुडा हुआ है।

आष्चर्य तब हुआ जब भारत का मुसलमान रोहिंग्या मुस्लिम घुसपठियों के पक्ष में खडा हो गया और सरकार द्वारा की जाने वाली संभावित कार्रवाई के विरोध मे मुखर हो गया। ना तो उन्होने मामले को समझने की कोषिष की और ना ही उनके दूरगामी परिणामों पर विचार किया। वास्तव में ये रोहिंग्या मुसलमान कहलाए जाने वाले लोग मूलतः बांग्लादेष के निवासी हैं और म्यांमार में अवैध घुसपैठ से इनकी बढती आबादी से उत्पन्न हो रही समस्याओं से परेषान होकर म्यांमार ने उन्हे देष से निकालने की प्रक्रिया शुरू की जिसके बाद उधर से भागकर ये लोग बांग्लादेष के रास्ते भारत में घुसपैठ करने लगे और देष के विभिन्न सीमावर्ती क्षेत्रों से लेकर दिल्ली और हैदराबाद जैसे शहरों में अपने ठिकाने बनाने में सफल हो गए। इतना ही नहीं तो बोध गया में हुए आतंकी हमले में इनकी संलिप्तता पाए जाने के बाद ऐजेंसियों के कान खडे हुए और इनके बारे में जानकारी एकत्र की गई तो पता चला कि 1 लाख से भी अधिक रोहिंग्या मुसलमान भारत में घुसपैठ कर चुके हैं। यदि इस रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठ समस्या की एतिहासिक पृष्ठभूमि पर विचार करें तो ध्यान में आता है कि इनकी वास्तव में दुष्मनी बौद्धों से है और इनके संघर्ष का इतिहास बहुत पुराना है। रोहिंग्या मुसलमानों ने पहले बौद्धांे पर सदियों तक अमानवीय अत्याचार किये और जब बौद्धों ने इनका प्रतिकार शुरू किया तो इनकी स्थिति खराब होने लगी। और इसी कडी में जब उनको म्यामांर से निकाले जाने की प्रक्रिया शुरू की तो इन्होने भारत को अपना निषाना बनाना शुरू किया और ये सामान्य बात नहीं इसके पीछे आतंकवादी संगठनों की सोची समझी रणनीति है। वजह है कि भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में म्यांमार के रखाईन में कई बडी परियोजनाओं पर चल रहा काम। आतंकी संगठन इन रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या को सामने रखकर अषांति फैलाने का कुत्सित प्रयास कर रहे है जिससे परियोजनाओं के संचालन में भी रूकावट आए और दोनो देषों के सम्बन्धों पर भी इसका असर दिखाई दे। भारत के लिये चिंता का विषय यह है कि रोहिंग्या मुसलमानों की आबादी देष में लगातार बढ रही है। सरकार इनकी पहचान करवा कर इन्हे बाहर निकालने का प्रयास कर रही है लेकिन भारत का मुस्लिम समाज इनके समर्थन में खडा हो गया है यह चिंता का विषय है। यह इतना आसान काम भी नहीं है इसके लिये भारत सरकार को कई मोर्चे साधने पडेंगे क्योंकि इनमें से कुछ यूएन शरणार्थी बन गए हैं जिन्हे निर्वासित करना आसान नहीं होगा लेकिन उनकी आड में बडी संख्या में अवैध रूप से भारत आए रोहिंग्या बडा सिरदर्द बन चुका है भारत के लिये। दूसरी समस्या है इन लोगों के आतंकवादी घटनाओं के साथ सम्बन्धता की जो हमारी आंतरिक सुरक्षा के लिये गंभीर चिंता का विषय बन गया है। कई वरिष्ठ पुलिस एवं खुफिया विभाग के अधिकारियों का मानना है कि रोहिंग्या मुसलमान अत्यधिक गरीब वर्ग से आते हैं और इन्हे पैसों का लालच देकर किसी भी काम में जोडा जा सकता है और यही कारण है कि ये आतंकवादी संगठनों से कहीं ना कहीं जुड जाते हैं। भारत इनके निषाने पर प्रमुख रूप से है भारत में बौद्धों को जो सम्मान प्राप्त है वह भी रोहिंग्याओं को खलता है। रोहिंग्याओं का भारत आना और जम्मू कष्मीर तक पहुॅंच जाना वहॉं पाकिस्तान की सीमा से सटे क्षेत्रों में आवास बना लेना वास्तव में देष विरोधी कृत्य है और इस सारी व्यवस्था को बनाने में जो भी इनकी मदद कर रहे हैं वे देषद्रोही ही कहलाऐंगे।

सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर आर.पी.सिंह की चिंता इस ओर इंगित करती है कि – इन लोगों को योजना के तहत भारत भेजा जाता है क्योंकि म्यांमार के रखाईन से बांग्लादेष आना, बांग्लादेष से भारत में घुसना और यहॉं के खास इलाकों में बस जाना असामान्य नहीं हो सकता और यह असामान्य कार्य बिना स्थानीय मदद के संभव नहीं। सरकार के सामने दो चुनौतियॉं है पहली इन रोहिंग्या मुसलमानों को जो कि अवैध रूप् से भारत में आ गए हैं उनको देष से बाहर निकालने की और दूसरी उन लोगों की पहचान करने की जो भारतीय होकर भी इन घुसपैठियों की जानबूझकर मदद कर रहे हैं। कहीं ना कहीं से तो शुरूआत हुई है पर इस समस्या का जल्दी ही इलाज करना होगा क्योंकि आज की तारीख में ये भारत का बडा सिरदर्द है और नासूर बनने से इसे रोकना हीे होगा पूरे भारतीय समाज की मदद से।

– डॉ. क्षितिज पुरोहित, मंदसौर 9425105610

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