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भारत की सांस्कृति समृद्धि में कालिदास के साहित्य का बड़ा योगदान : ब्रजेश जोशी व डॉ. घनश्याम बटवाल का हुआ सम्मान

दो दिवसीय कालिदास प्रसंग का समापन भजन संध्या के साथ हुआ

मन्दसौर। महाकवि कालिदास का नाम दशपुर से जुड़ना हमारे लिये सौभाग्य व प्रेरणा का कारण रहा है, वे विश्व कवि थे, देश के हर प्रान्त व अंचल के लोग कालिदास से अपना संबंध निरूपित कर गौरवान्वित होते है।

ये विचार सांसद सुधीर गुप्ता ने संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय कालिदास प्रसंग के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में सबोधित करते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिदृष्य में महाकवि कालिदास का नाम शेक्सपियर से भी ऊँचा माना जाता है। हमारे देश की सांस्कृतिक समृद्धि के पीछे कालिदास के साहित्य का बड़ा योगदान है।  समारोह की अध्यक्षता करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रियंका गोस्वामी ने कहा कि महाकवि कालिदास का साहित्य हमारी संस्कृति की गहराई को अभिव्यक्त करता है। ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम’’ का संदेश महाकवि की रचनाओं से मिलता है।
विशिष्ठ अतिथि विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने कहा कि महाकवि कालिदास ने अपने मेघदूत काव्य में दशपुर, अष्टमूर्ति और शिवना का उल्लेख किया है, इससे हमारे नगर की प्राचीनता सिद्ध होती है। उन्होंने बताया कि देश के 2 सिद्ध स्थलों में मंदसौर का भी नाम है जो हमारे लिये गौरव की बात है। कालिदास समारोह को आने वाले वर्षों में और अधिक भव्यता प्रदान की जाएगी।

विशेष अतिथि जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अध्यक्ष मदनलाल राठौर ने कहा कि महाकवि कालिदास का साहित्य हमारी संस्कृति का संवाहक है। उनके साहित्य पर केन्द्रित ऐसे समारोह परम्पराओं का पुर्नजागरण करते है। उनका साहित्य जन-जन में हमारी आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत का संदेश देता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री से मंदसौर में कालिदास समारोह की मांग करने व इस आयोजन में सक्रिय सहयोग देने वाले वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश जोशी और यहां आयोजित समारोह के प्रत्येक आयोजन में विशेष सहयोगी की भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ पत्रकार डॉ. घनश्याम बटवाल को अतिथियों ने शाल-श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। आरंभ में स्वागत भाषण कालिदास संस्कृत अकादमी उज्जैन के अनिल बारोट ने स्वागत भाषण दिया। अतिथियों ने समापन समारोह का आरंभ  श्री पशुपतिनाथ की प्रतिमा पर माल्यार्पा व दीप प्रज्जवलन कर किया।

अतिथियों का स्वागत अनिल बारोट, जिला प्रेस क्लब अध्यक्ष नरेन्द्र अग्रवाल, पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंध समिति के सदस्यगण योगेश गुप्ता, पं. अरूण शर्मा तथा राजाराम तंवर, पं. किशोर शास्त्री, गोपालकृष्ण शर्मा एड., भगवतीलाल गेहलोत, बंसीलाल टांक, गायत्रीप्रसाद शर्मा, सचिन पारिख, धनराज धनगर आदि ने किया।

मंचीय आयोजन के बाद राजकोट गुजरात के प्रसिद्ध भजन गायक अशोक भयाणी एवं उनके दल ने भजनों की सुमधुर रसवर्षा कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके प्रसिद्ध भजनों बम बम लहरी, सांसों की माला में, महादेव की जय हो, श्रीमन् नारायण-नारायण, रामजी चले न हनुमान के बिना आदि पर श्रोता झूम उठे। अंत में श्री अशोक भयाणी को भजन संध्या में उपस्थित सभी मातृशक्ति ने मंच पर पहुंचकर भगवान श्री पशुपतिनाथ की तस्वीर भेंट की। समारोह का संचालन डॉ. घनश्याम बटवाल ने किया। आभार ब्रजेश जोशी ने माना।

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