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भारत में सड़क सुरक्षा के अभाव के कारण हो रही है बेहताशा दुर्घटनाएं

मन्दसौर। हमारे देश में आए दिन बेतहाशा दुर्घटनाओं की खबरें समाचार पत्रों के माध्यम से मिलती रहती है, देश में सड़क दुर्घटनाएं होना आम बात हो गई है। दुर्घटना शब्द हमारे मन, मस्तिष्क को उथल पुथल कर देता है, क्योंकि आए दिन कहीं न कहीं बड़ी दुर्घटनाएं के संदेश हमें मिल ही जाते है। लेकिन हमारा मन उस समय बड़ा चिंतित हो जाता है जब इन दुर्घटनाओं में हमारे अपने दुर्घटनाग्रस्त हो जाते है, लेकिन कुछ न कर पाने की स्थिति में सिर्फ अफसोस व दुख जताकर मन को समझाने के प्रयास में लग जाते है।
सड़क दुर्घटना कभी भी कहीं भी हो सकती है। सड़क पर या गाड़ी पर चलने वालों के लिये दुर्घटना के प्रति एक अनिश्चितता का माहौल जुड़ा रहता है। जरा भी लापरवाही हुई कि दुर्घटना घटी, वर्तमान समय में सड़कों पर सबसे अधिक ट्राफिक होने की वजह से दुर्घटनाओं की संभावना भी सबसे अधिक बलवति होती जा रही है। लंबी यात्राएं करना, घर से बहुत दूर व्यवसायिक कारण से जाना, बच्चों का दूर स्कूल जाना सामान्य सी बात हो गई है। प्रतिदिन बच्चे व अन्य नागरिक समय पर गंतव्य स्थल पर पहुंचने के लिये संघर्ष करते दिखलाई देते है। कोई अपने निजी वाहन से तो कोई टेम्पों, टेक्सी या सरकारी वाहनों से आवाजाही में लगे रहते है। गंतव्य स्थल तक प्रायः सभी को पहुंचने की जल्दी होती है। इसी जल्दी पहंुचने की जद्दोजहद में व्यक्ति इस समय अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है, जिससे दुर्घटना घट जाती है और इससे भारी क्षति होती है। घर से बाहर निकलने पर सबसे ज्यादा चिंतित परिजन होते है। आए दिन दिल दहलाने वाली दुर्घटनाओं से परिवार में भय का वातावरण निर्मित रहता है, जब तक व्यक्ति सकुशल घर वापस लौट जाए। सामान्यतः दुर्घटनाओं में क्षति से जख्म व घाव तो भर जाते है, लेकिन बड़ी दुर्घटनाएं जीवन में ऐसी पीड़ा, दर्द व घाव देकर जाते है, जिनकी भरपाई कर पाना संभव नहीं हो पाता है।
आज हमारे देश में सड़क दुर्घटनाएं बड़ी तेजी से बढ़ रही है। विश्वभर में सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाएं भारत में होती है। आंकड़े बताते है कि वर्ष 2016 में ही 1 लाख 15 हजार लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुई है। जबकि 4 लाख लोगों को गंभीर दीर्घकालीन क्षति या विकलांगता का शिकार होना पड़ा है। भारत में हर रोज 400 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु हो जाती है। इस हिसाब से प्रत्येक घण्टे में 16 व्यक्तियों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में हो जाती है। इन सबके पीछे महत्वपूर्ण कारण यह है कि हमारे देश में सड़क सुरक्षा का अभाव है।
बेलगाम होती स्पीड से गाड़ी को चलाना शहरी क्षेत्र व ग्रामीण इलाकों के मध्य स्पीड ब्रेकर ना होना भी दुर्घटनाओं का मूल कारण है। कागजी तौर पर वाहन चालकों के नियम पर्याप्त रूप से सख्त है लेकिन इनका सख्ती से पालन ना करवाना भी दुर्घटनाओं की बढ़ोत्तरी का मुख्य कारण है। चालक के पास ड्रायविंग लायसेंस होना जरूरी होता है, लेकिन ड्रायविंग लायसेंस ड्रायविंग टेस्ट पास किये बिना ही मिल जाते है। सड़कों पर चलने वाले अधिकतर वाहन ओवरलोड चलते है। यात्री बस में ओवरलोड सवारियों केा बिठाना, खुली जीपों में छत पर बैठाना, फूट स्टेण्ड पर लटककर जाना, लगेज स्टेण्ड पर लटककर जाना, अकस्मात होने वाली इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिये ट्राफिक पुलिस को सख्त रवैया अपना होगा। गाड़ियों का रख-रखाव व फिटनेस सर्टिफिकेट का समय-समय पर नवीनीकरण करवाने का सख्ती से पालन करवाना होगा। हेलमेट, सीट बेल्ट नहीं लगाने पर चालानी कार्यवाही भी सख्ती से करें। गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात ना करना, इन सभी चीजों पर यदि सख्ती से पालन करवाया जाए तो निश्चित रूप से अकारण होने वाली दुर्घटनाओं पर रोक लग सकती है। यदि हमें सड़क दुर्घटनाएं रोकनी है, तो इन्‍हें  थामना है, तो जरूरी सावधानियांे को अपनाना होगा। यातायात नियमों का पालन करना होगा। अपने वाहनों का रख-रखाव सर्विसिंग सही समय पर करवाते रहना चाहिए। तभी हम अपने जीवन में गति को सरलता से बिना किसी नुकसान के गतिशील कर सकेंगे।

Post source : कमल कोठारी (सामाजिक कार्यकर्ता)

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