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भावांतर योजना में लहसुन को लेकर छल रही है भाजपा सरकार किसानों को, 1600 रू से अधिक नहीं हो पा रहे है लहसुन के भाव – श्री कुमावत

मंदसौर। मप्र सरकार भावांतर योजना के नाम पर किसानों को छल रही है। आज किसान हर प्रकार से परेशान व दुखी है एक तरफ फसलों के भाव नहीं बढ़ रहे है तो दूसरी तरफ मप्र सरकार द्वारा चलाई जा रही भावांतर योजना में किसानों के पंजीयन तक नहीं हो पा रहे है। कुछ किसानों ने पंजीयन भी हुए है तो उनके खातों में वो राशि भी नहीं पहुंच पा रह है। जिससे किसान स्वयं को ठगा सा मान रहे है।
                  उक्त बात कहते हुए युवा इंटक के जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र कुमावत ने बताया कि भावांतर योजना के नाम पर सरकार सिर्फ और सिर्फ किसानों को छल रही है। श्री कुमावत ने कहा कि गुरूवार को मंदसौर मंडी में जो भी हुआ वह सरकार की नाकामी को दर्शाता है। पहले तो सरकार द्वारा मंदसौर क्षेत्र की महत्वूपर्ण फसल लहसुन को भावंातर योजना में शामिल नहीें किया गया। कांग्रेस के आंदोलन के बाद सरकार दबाव में आई और उसने लहसुन को भावांतर में शामिल करने की घोषणा की।  घोषणा के बाद हमारे घोषणावीर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान ने खूब वाह वाही लूटी। लेकिन अब सरकार भावांतर में किसानों को लहसुन फसल की राशि नहीं देना पड़े इसलिए रोज नए नए हथकण्डे अपना रही है। सरकार की नीति के अनुसार यदि किसी किसान की लहसुन 1600 रू प्रति क्विंटल के भाव से कम बिकती है तो उसे भावांतार योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इस पर सरकार का तर्क है कि वह क्वालिटी निम्न स्तर की है। श्री कुमावत ने कहा कि अब सरकार अपने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर व्यापारियों पर दबाव बना रही है कि लहसुन के बोली के समय लहसुन के भाव 1600 रू तक नहीं आने दे। ताकि सरकार को किसानों को भावांतर का पैसा नहीं देना पड़े।
                    भावांतर योजना के नाम पर मप्र की सरकार किसानों को कितना छल रही हैं यह बात अब किसानों को अच्छे से समझमें आने लगी है। श्री कुमावत ने कहा कि जिस किसान की फसल की क्वालिटी कुछ निम्न है उसी किसान को भांवातर योजना की सर्वाधिक आवश्यकता है लेकिन सरकार ने तो अपने नियम ही पलट दिए। श्री कुमावत ने कहा कि यदि किसी किसान की लहसुन 4000 से 6000 रू प्रति क्विंटल या इससे अधिक बिक जाए तो उसे तो वैसे ही भावांतर योजना की आवश्यकता नहीं है। लेकिन अब स्पष्ट हो चुका है कि मप्र की भाजपा सरकार की भावांतर योजना के नाम पर किसानों खुद को छला सा महसूस कर रहें है।
                     श्री कुमावत ने मांग कि है कि सरकार जल्द से जल्द अपने 1600 रू प्रति क्विंटल वाले नियम को बदलें ताकि क्षेत्र के लहसुन उत्पादक किसानों को राहत मिल सकें। नियम में जल्द परिवर्तन नहीं किया गया तो कांग्रेस द्वारा आंदोलन किया जाएगा।

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