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भोजन खाने से लेकर सोने तक बदलें दिशा, जेब होगी भारी

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दिशाओं का हमारे जीवन में सर्वाधिक महत्व है। सही दिशा में चलने वाले जहाज, वाहन, अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं जबकि गलत दिशा में चलने वाले जहाज व वाहन समय का अपव्यय करने के साथ ही अपनी मंजिल भी खो बैठते हैं तथा अनावश्यक कष्ट एवं कठिनाइयां झेलते हैं। यह अलग बात है कि चतुर व्यक्ति परिस्थितियों को भांप कर दिशाओं का परिवर्तन करके अपना अभीष्ट प्राप्त कर लेते हैं और जीवन भर आनंदित रहते हैं।

अपने जीवन के दीर्घकालिक अनुभव के आधार पर मेरा यह मानना है कि मानव जीवन में अनेक कष्ट एवं कठिनाइयां केवल दिशाओं के गलत उपयोग के कारण ही आती हैं। मात्र दिशाओं में कुछ परिवर्तन करके जीवन में सुख, शांति, विकास, इच्छापूर्ति आदि को पाया जा सकता है।

  • भोजन के विषय में स्पष्ट शास्त्रीय निर्देश है कि किस कामना वाला व्यक्ति किस दिशा की ओर मुख करके भोजन करे? शास्त्र कहते हैं कि आयुष्य आरोग्य की कामना रखने वाले व्यक्ति पूर्व दिशा की ओर मुख करके भोजन करें। अनुभव सिद्ध बात यह है कि रोगी व्यक्ति को अगर पूर्व दिशा की ओर मुख करके पथ्य-आहार दिए जाते हैं तो उसे तेजी से स्वास्थ्य लाभ होता है।
  • यश प्राप्ति की कामना रखने वाले व्यक्तियों को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से मान-सम्मान की असाधारण वृद्धि होती है किंतु जिनके माता-पिता जीवित हों, उन्हें दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन नहीं करना चाहिए। इनके लिए पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुख करके भोजन करना स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है।
  • नैत्रदत्य कोण की तरफ मुंह करके भोजन करने से पाचन शक्ति कमजोर होती है तथा पेट की अनेक बीमारियां हो सकती हैं।
  • आग्रेय कोण की तरफ मुंह करके भोजन करने से अनेक सैक्सगत बीमारियां हो सकती हैं तथा स्वप्नदोष, ल्यूकोरिया, प्रदर रोग आदि में भी वृद्धि हो सकती है।
  • वायव्य कोण में बैठकर भोजन करने से वायु विकार दोष उत्पन्न हो सकते हैं।
  • भोजन हमेशा पालथी मारकर आसन पर बैठ कर ही करना चाहिए। कुर्सी पर बैठ कर टांग हिलाते हुए भोजन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है।
  • जिस व्यक्ति की आर्थिक स्थिति चिंतनीय है तथा धन प्राप्ति की इच्छा हो तो उसे पश्चिम दिशा की ओर मुख करके भोजन करना चाहिए। इस दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति भी ठीक हो सकती है परन्तु यह वृद्धि धीरे-धीरे ही होती है।
  • उत्तर दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से धन की हानि होती है। कारण स्पष्ट करते हुए ऋषि कहते हैं कि उत्तर दिशा की ओर मुख करके भोजन करने वाला व्यक्ति ‘ऋण का’ भोजन करता है। दिन-प्रतिदिन ऋणी होता चला जाता है।
  • इस विषय पर अनेक व्यक्तियों से सम्पर्क करने पर पता चला कि अच्छे खासे समृद्धशाली व्यक्ति भी उत्तर दिशा की ओर मुख करके भोजन करते-करते उत्तरोत्तर हानि को प्राप्त करते गए। इतना ही नहीं, उनका स्वास्थ्य भी धीरे-धीरे क्षीण होने लगा। हर माह 400-500 रुपए की औषधि  खाने के बाद ही वे अपना कार्य कर पाते थे। सुझाव देने पर जब वे पश्चिम दिशा की ओर मुख करके भोजन करने लगे तो आर्थिक समृद्धि का जो दौर प्रारंभ हुआ तो शीघ्र वे पूर्वावस्था में आ गए।
  • भोजन की तरह ही शयन की दिशा का भी प्रभाव स्वास्थ्य, आर्थिक एवं मानसिकता पर पड़ता है। शयन करते समय शयनकर्ता का सिर पूर्व की ओर होने से अच्छी नींद आती है। मस्तिष्क तरोताजा एवं शरीर स्वास्थ रहता है। धार्मिक, आस्थावान एवं आध्यात्मिक लाभ की कामना वाले व्यक्तियों को हमेशा पूर्व दिशा की ओर सिर करके सोना चाहिए।
  • दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोने से भी अच्छी नींद आती है तथा आय में वृद्धि होती है। पश्चिम दिशा की ओर सिर करके शयन करने से आयु का क्षय होता है एवं तनाव उत्पन्न होता है। अपने घर में शयन करते समय पूर्व दिशा की ओर सिर करके ही सोना चाहिए। उत्तर दिशा की ओर सिर करके शयन करने से आयु का क्षय होता है एवं तनाव उत्पन्न होता है। पश्चिम दिशा की ओर मुख करके सोने से चिंताएं भी उत्पन्न होती हैं।
  • ससुराल में दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके शयन करना चाहिए। यात्रा में पश्चिम दिशा की ओर सिर करके शयन करना उत्तम माना जाता है। यात्रा में उत्तर दिशा की ओर मुंह करके सोने से हानि हो सकती है। घर में पूर्व-उत्तर कोण (ईशान कोण) में उपासना गृह बनाकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके उपासना करने से शीघ्र ही ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। दोपहर तक पूर्व दिशा की ओर तथा दोपहर के बाद पश्चिम दिशा ओर मुख करके पेशाब करने से शारीरिक, आर्थिक एवं मानसिक हानि उठानी पड़ सकती है।

उत्तर दिशा में सिर रख कर सोने के लिए अकसर हमें मना किया जाता है। क्या ये नियम पूरी दुनिया में सभी स्थानों पर लागू होता है? क्या है इसका विज्ञान? कौनसी दिशा सोने के लिए सबसे अच्छी है?

आपका दिल शरीर के निचले आधे हिस्से में नहीं है, वह तीन-चौथाई ऊपर की ओर मौजूद है क्योंकि गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ रक्त को ऊपर की ओर पहुंचाना नीचे की ओर पहुंचाने से ज्यादा मुश्किल है।जो रक्त शिराएं ऊपर की ओर जाती हैं, वे नीचे की ओर जाने वाली धमनियों के मुकाबले बहुत परिष्कृत हैं। वे ऊपर मस्तिष्क में जाते समय लगभग बालों की तरह होती हैं। इतनी पतली कि वे एक फालतू बूंद भी नहीं ले जा सकतीं। अगर एक भी अतिरिक्त बूंद चली गई, तो कुछ फट जाएगा और आपको हैमरेज (रक्तस्राव) हो सकता है।

ज्यादातर लोगों के मस्तिष्क में रक्तस्राव होता है। यह बड़े पैमाने पर आपको प्रभावित नहीं करता मगर इसके छोटे-मोटे नुकसान होते हैं। आप सुस्त हो सकते हैं, जो वाकई में लोग हो रहे हैं। 35 की उम्र के बाद आपकी बुद्धिमत्ता का स्तर कई रूपों में गिर सकता है जब तक कि आप उसे बनाए रखने के लिए बहुत मेहनत नहीं करते। आप अपनी स्मृति के कारण काम चला रहे हैं, अपनी बुद्धि के कारण नहीं।सोने की दिशा :जब आपको रक्त से जुड़ी कोई समस्या होती है, मसलन एनीमिया या रक्ताल्पता तो डॉक्टर आपको क्या सलाह देता है? आयरन या लौह तत्व। यह आपके रक्त का एक अहम तत्व है। आपने पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्रों (मैगनेटिक फील्ड) के बारे में सुना होगा। कई रूपों में अपनी चुंबकीयता के कारण पृथ्वी बनी है। इसलिए इस ग्रह पर चुंबकीय शक्तियां शक्तिशाली हैं।

अगर आप उत्तर की ओर सिर करते हैं और 5 से 6 घंटों तक उस तरह रहते हैं, तो चुंबकीय खिंचाव आपके दिमाग पर दबाव डालेगा।जब शरीर क्षैतिज अवस्था में होता है, तो आप तत्काल देख सकते हैं कि आपकी नाड़ी की गति धीमी हो जाती है। शरीर यह बदलाव इसलिए लाता है क्योंकि अगर रक्त उसी स्तर पर पंप किया जाएगा, तो आपके सिर में जरूरत से ज्यादा रक्त जा सकता है और आपको नुकसान हो सकता है। अब अगर आप अपना सिर उत्तर की ओर करते हैं और 5 से 6 घंटों तक उसी अवस्था में रहते हैं, तो चुंबकीय खिंचाव आपके दिमाग पर दबाव डालेगा। अगर आप एक उम्र से आगे निकल चुके हैं और आपकी रक्त शिराएं कमजोर हैं तो आपको रक्तस्राव और लकवे के साथ स्ट्रोक हो सकता है।या अगर आपका शरीर मजबूत है और ये चीजें आपके साथ नहीं होतीं, तो आप उत्तेजित या परेशान होकर जाग सकते हैं क्योंकि सोते समय दिमाग में जितना रक्त संचार होना चाहिए, उससे ज्यादा होता है। ऐसा नहीं है कि एक दिन ऐसा करने पर आप मर जाएंगे। मगर रोजाना ऐसा करने पर आप परेशानियों को दावत दे रहे हैं।

आपके साथ किस तरह की परेशानियां हो सकती हैं, यह इस पर निर्भर करता है कि आपका शरीर कितना मजबूत है।तो किस दिशा में सिर करके सोना सबसे अच्छा होता है? पूर्व सबसे अच्छी दिशा है। पूर्वोत्तर ठीक है। पश्चिम चलेगा। अगर कोई विकल्प नहीं है तो दक्षिण। उत्तर बिल्कुल नहीं। जब तक आप उत्तरी गोलार्ध में हैं, यही सही है – उत्तर के अलावा किसी भी दिशा में सिर करके सोया जा सकता है। दक्षिणी गोलार्ध में, दक्षिण की ओर सिर करके न रखें।

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