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मंदसौर कांग्रेस को मजबूत करने के लिए राजेन्‍द्र सिंह गौतम की घर वापसी हुई!

कांग्रेस की गुटीय राजनीति मंगलवार को फिर सड़क पर दिखी। सुबह सर्किट हाउस पर मुंगावली विधायक व कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष महेंद्रसिंह कालूखेड़ा ने कांग्रेस से निष्कासित पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्रसिंह गौतम को पार्टी में शामिल कर लिया। उनका विधिवत सदस्यता फार्म भरा गया। इसके बाद तो कांग्रेस में काफी हलचल हो गई। संजीत में धरने पर बैठे जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने वहीं से एक पत्र व्हाट्सएप पर भेजा कि अभा कांग्रेस, प्रदेश कांग्रेस व जिला कांग्रेस कमेटी ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है। निष्कासन यथावत है। हालांकि कालूखेड़ा ने कहा कि हम भी वर्षों से कांग्रेस में हैं और पूरी तरह पार्टी के विधान अनुसार ही सदस्यता दी गई है।
गौतम की वापसी की कोई पूर्व तैयारी नहीं होने से किसी को भनक भी नहीं थी। मंगलवार को सुबह कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष कालुखेड़ा ने सर्किट हाउस पर गौतम के सदस्यता फार्म पर खुद हस्ताक्षर किए। जिला महामंत्री राघवेंद्रसिंह तोमर व शशिकांत गर्ग ने उनकी सदस्यता का अनुमोदन किया। वहां मौजूद मीडिया सहित कांग्रेसजनों के सामने कालूखेड़ा ने कहा- 2009 के लोस चुनाव में गौतम कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ चुनाव लड़े थे। तब पार्टी ने उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित किया था। साढ़े सात साल बीतने के बाद उनकी वापसी कर ली गई है वे जिले में कांग्रेस को मजबूती देने के लिए काम करेंगे। राजेंद्रसिंह गौतम ने कहा कि पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ना उनकी सबसे बड़ी भूल थी। मेरे गुरु महेंद्रसिंह कालूखेड़ा ही थे। अब भी वे ही रहेंगे और उनके मार्गदर्शन में कांग्रेस को मजबूती देने का काम करेंगे।
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि कांग्रेस विधायक महेंद्र सिंह कालूखेड़ा ने मंदसौर की राजनीति में फिर से हलचल मचा दी है। कालूखेड़ा के नीमच-मंदसौर दौरे से कांग्रेस की गुटबाजी उभरकर सामने आ गई है। मंगलवार को महेंद्र सिंह कालूखेड़ा ने नीमच में पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को आड़े हाथों लिया था। जिसके बाद बुधवार को कालूखेड़ा ने मंदसौर में कुछ ऐसा किया कि जिला कांग्रेस में हड़कंप मच गया। कालूखेड़ा ने कांग्रेस से 6 साल के लिए निष्कासित पूर्व जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह गौतम की पार्टी में वापसी करा दी। राजेंद्र सिंह गौतम ने मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ा था, जिसके कारण उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। गौतम की वापसी पर कालूखेड़ा का कहना है कि वो पार्टी को मजबूत करेंगे।
महेंद्र सिंह कालूखेड़ा ने किस आधार पर राजेंद्र सिंह गौतम की कांग्रेस में वापसी कराई। इसे लेकर सवाल खड़े हो गए है। जिलाध्यक्ष प्रकाश रातड़िया का कहना है कि गौतम को AICC ने निष्कासित किया है। गौतम की वापसी के लिए न तो AICC ने और न ही PCC ने कोई निर्देश मिले है। ऐसे में उनकी वापसी समझ से परे है। जिलाध्यक्ष ने साफ किया है कि वो गौतम की वापसी को वैध नहीं मानते।
मुंगावली से मंदसौर पहुंचे कालूखेड़ा ने तो जैसे मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया है। उन्होंने कहा कि हारे हुए नेता संगठन को जेब में रखकर घूम रहे है। कालूखेड़ा ने मीनाक्षी नटराजन का नाम लिए बिना कहा कि जिन पर सोनिया और राहुल गांधी ने भरोसा जताया। वो पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे है।

अब आगे क्या?
कांग्रेस की राजनीति में अब आने वाले समय में काफी हलचल रहेगी। लंबे समय से महेंद्रसिंह कालूखेड़ा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन व उनके गुट को चुनौती दे रहे हैं। नटराजन व उनके समर्थक नेता भी कालूखेड़ा समर्थकों को दूर ही रखते हैं। इससे चलते खाई बढ़ती ही जा रही है। मंगलवार को कालूखेड़ा ने पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष गौतम की वापसी कराई है। जो केवल नटराजन की जिद के कारण ही पार्टी में नहीं आ पा रहे थे। गौतम की किसानों में अच्छी लोकप्रियता है। इसके अलावा वे कांग्रेस की तरफ एकमात्र ऐसे नेता है तो प्रतिद्वंद्वी दल को उनकी भाषा में ही जवाब देना जानते हैं। अगर उनकी कांग्रेस में वापसी होती है तो कहीं न कहीं कांग्रेस के धरना, आंदोलनों में जान आ सकती है।

दोनों महामंत्रियों को दिए शोकॉज नोटिस
जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश रातड़िया ने बताया कि लोस चुनाव में मीनाक्षी नटराजन के विरुद्घ चुनाव लड़ने के कारण राजेंद्रसिंह गौतम अभा कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने निष्कासित किया है। इस संबंध में कोई भी निर्णय अभा कांग्रेस या प्रदेश कांग्रेस कमेटी ही ले सकती है। किसी भी नेता को इस संबंध में घोषणा करने का अधिकार नहीं है। हाईकमान ने निष्कासित किया था वापसी का निर्णय भी वही से होगा। इस संबंध में जिला कांग्रेस ने भी किसी को अधिकृत नहीं किया है। इसलिए दोनों जिला महामंत्रियों को कारण बताओ सूचना पत्र भेजा गया। यदि ऐसी कोई भूमिका की गई है तो अनुशासनहीनता की श्रेणी है। इनसे अधिकतम 3 दिन की अवधि में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
सात बार विधायक, एक बार सांसद रहा, प्रदेश उपाध्यक्ष हूं
इधर विधायक कालूखेड़ा ने कहा कि मैं भी सात बार से विधायक हूं, एक बार सांसद रहा हूं। अभी पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष हूं तो क्या में पार्टी का विधान नहीं जानता हूं। जो भी हुआ है वह विधिवत ही हुआ है।

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