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मंदसौर की नीलू डाडिया का महिला हॉकी में चयन

मंदसौर जैसे छोटे शहर की अतिसाधारण से खेल मैदान पर हॉकी खेलने वाली नीलू डाडिया ने शहर का नाम ऊंचा करते हुए भारतीय महिला हॉकी टीम में जगह बनाई है। नीलू 16 से 22 दिसंबर तक बैंकॉक में आयोजित चौथे अंडर 18 महिला एशिया कप में भारतीय टीम की ओर से खेलेगी। नीलू इससे पहले देश की सभी प्रमुख अंडर 16 व अंडर 18 महिला हॉकी प्रतियोगिताओं में खेल चुकी है। वह दो बार हालैंड में भारत की और से मैत्री मैच भी खेल चुकी है। पहली बार नीलू भारतीय टीम में फूल बेक के रूप में शामिल हुई है।
केंद्रीय विद्यालय मंदसौर में कक्षा छठी में अध्ययनरत रहते हुए नीलू ने हॉकी खेल में रूचि दिखाई। यहां शहर की ख्यात हॉकी कोच व संरक्षक अमरसिंह शेखावत के नेतृत्व में हॉकी कोच अविनाश उपाध्याय के सानिध्य में वह हॉकी खेलना सीखने लगी। मात्र तीन साल में वह अपने खेल में इतनी पारगंत हो गई कि उसका देश की ख्यात हॉकी एकेडमी ग्वालियर में उसका चयन हो गया। इसके बाद उसने वापस पलटकर नहीं देखा और आगे बढ़ती चली गई। उसने हॉकी में फूल बेक स्थान पर खेलकर अनेक अंडर 14 व अंडर 16, अंडर 18 की राष्ट्र्रीय हॉकी प्रतियोगिताओं में मध्यप्रदेश का नाम रोशन किया। वर्ष 2014 में हालैंड के साथ टेस्ट मैच खेलने के लिए भारतीय टीम की और से वह हालैंड गई।
नीलू ने कुछ समय पहले ही Hello Mandasur से चर्चा में बताया था कि उसका बचपन से ही हॉकी खेल के प्रति रूझान था। उसका सपना था कि वह भारतीय टीम की ओर से खेले। कड़ी मेहनत और अनुशासन और लक्ष्य की ओर बढऩे का दृढ़ निश्चय ही उसे नीत नई ऊंचाईयां दे रहा है।

यह होंगे मैच
बैंकांक में आयोजित होने वाले महिला हॉकी एशिया कप प्रतियोगिता में भारत के अलावा चीन, जापान, कोरिया, मलेशिया, थाईलेंड, चाइनीजताईपई और सिंगापुर की टीम शामिल है। भारत पुल ए में है। इसमें चीन, मलेशिया और चाइनीज ताईपई टीम शामिल है। पुल बी कोरिया, जापान, थाईलेंड और सिंगापुर है। भारत का पहला मैच 16 दिसंबर को चाइनीजताईपई से होगा।

मैं तुम्हें भारतीय टीम की नीली जर्सी में देखना चाहता हूं
कोच अविनाश उपाध्याय ने बताया कि नीलू में सीखने की ललक शुरू से थी। उसे जो भी सीखाया जाता वह उसे जल्दी ही आत्मसात कर लेती। वह खेल मैदान पर एक्सरसाईज के अलावा हॉकी के गुर सीखने के लिए तीन घंटे कड़ा अभ्यास करती। उत्कृष्ट विद्यालय मैदान पर उबड़-खाबड़ होने के बाद भी उसका डिफेंस लगातार बेहतर होता गया। करीब तीन चार साल के खेल में ही वह बेहतर खिलाड़ी हो गई। यही वजह हैकि ग्वालियर हॉकी एकेडमी में उसका सिलेक्शन हो गया। उसने वहां भी कड़ा अभ्यास जारी रखा और अंतराष्ट्रीय हॉकी के नियमों एवं मापदंडों के अनुसार खेल के गुर सीखे। मंदसौर के लिए नीलू का भारतीय टीम में चयन बड़ी उपलब्धि है। वह अक्सर मुझसे पूछती कि सर आप का सपना क्या है। मैं उसे एक ही बात कहता है कि बेटा में तुम्हें भारतीय हॉकी टीम की नीली जर्सी में देखना चाहता हूं। आज उसने मेरा यह सपना पूरा कर दिया।

पिता शिक्षक हैं
नीलू के पिता राजकुमार डाडिया लौहपुरुष वल्लभभाईपटेल हायरसेंकडरी स्कूल क्रमांक दो में गणित के शिक्षक है। उन्होंने हैलो मंदसौर को बताया कि नीलू बचपन से ही हॉकी के प्रति रूचि रखती है। यही वजह हैकि वे नीलू को हॉकी सीखने के लिए शेखावत सर व उपाध्याय सर के पास ले गए। उन्होंने ही बेटी को हॉकी के गुर सीखाए। कोच के कारण ही वह आज भारतीय टीम में शामिल है। नीलू का बचपन से एक ही लक्ष्य था कि वह भारतीय हॉकी टीम से खेले। नीलू खेल के साथ पढ़ाईमें भी अव्वल है। कक्षा दसवीं में उसने 75 प्रतिशत अंक हासिल किए। 12वीं गणित विषय से उत्तीर्ण की। वर्तमान में वह स्नातक के प्रथम वर्ष फिजिकल साइंस की स्टूडेंट है। बेटी की माता का वर्ष 2013 में गंभीर बीमारी से निधन हो गयाथा। नीलू की मां सुनिता ने भी नीलू को खेल के लिए हमेशा सपोर्ट किया। सुनिता के जाने के बाद बेटी की पूरी जवाबदारी का ध्यान वे ही रखते है। नीलू की बड़ी बहन की शादी हो चुकी है।

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