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अनिता दीदी

जन्म दिनांक: 2 अप्रैल 1988
शिक्षा: गुरू गुलशनबाई
व्यवसाय: समाजसेवा
उपलब्धि: गुरू मंगलामुखी किन्नर समाज मंदसौर

अनाथों की नाथ, सभी राज्यों के किन्नरों ने दी मंदसौर गुरू की पदवी

9 साल पहले मंदसौर आईं और यहां जो प्रेम, आदर मिला तो यहीं की होकर रह गईं। अनाथों-जरूरतमंदों की सेवा में अपनी खास जगह बनाई। सबके प्रति आदर भाव, मिलनसारिता जैसे गुण ही थे कि अनिता दीदी को मध्यप्रदेश सहित राजस्थान, दिल्ली, यूपी, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, गुजरात जैसे सभी राज्यों के किन्नरों ने उनको गुरू की जगह 5 फरवरी 2016 को मंदसौर गुरू की पदवी दी।

कहा जाता है कि जीवन में सर्वमान्य बनना बड़ी बात और बेहद चुनौतीपूर्ण भी। किन्नर अनिता दीदी ने इसे सार्थक कर दिखाया। वर्तमान में अनिता मंदसौर में जाना-पहचाना नाम और किन्नर समाज की ख्यातनाम हस्ती है। किन्नर होकर जन्म लेने के बाद से दन्होंने जिंदगी के संघर्षों को नजदीक से देखा। गुरूगुलशनबाई के निधन के बाद अनिता दीदी को उत्तराधिकारी बनाने को देशभर के प्रमुख 800 किन्नरों ने सर्वमान्य माना और नाम पर सहमति बनाई थी। इंदौर में जन्मी अनिता 2009 में पहली बार मंदसौर आई थी।

यहां गुरू गुलशनबाई का सानिध्य मिला। तीज-त्यौहार पर मंदसौर शहरभर में जाना और दिल से दुआएं देने के अलावा अनिता दीदी ने खासकर निर्धन, किडनी व अन्य गंभीर बीमार, जरुरतमंदो के लिए उल्लेखनीय काम किए। पढ़ाई से वंचित रहने वाले कई बच्चों कि फिस व गणवेशके अलावा आर्थिक मदद की। 4 गरीब परिवार की बेटियों के खुद के खर्चे से शादियां भी कराई। यह सब काम उन्होंने बिना किसी दिखावे, प्रचार के किया, लेकिन कहते है कि नेक सोच के साथ किया काम व्यक्ति को खूब ख्याति दिलाता है, ऐसा ही कुछ अनिता दीदी के साथ हुआ। वर्तमान में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, उद्योगपति से लेकर आम जन तक अनिता दीदी के व्यक्तित्व का सम्मान करता है और और समाज में उनको आदर की नजरों से देखा जाता है। आमतौर पर ट्रेन, बसों में किन्नरों द्वारा दबाव बनाकर रुपए लेने को अनिता दीदी ठीक नहीं कहतीं, उनका मानना है बरसों पुरानी धार्मिक परंपरा मुताबिक जो व्यक्ति मन से कुछ दान देने की इच्छा रखता है किन्नर को वही स्वीकारना चाहिए। जबरन धमकाना, दबाव जैसे तरीके ठीक नहीं। अनिता दीदी ने दो अनाथ बच्चों को जीवन संवारने का बीड़ा उठा रखा है, दोंनो को अनिता दीदी ने पिछले दिनों ही गोद लिया। वे 3 साल के बालक अनमोल को मंदसौर के ही इंग्लिश मीडियम के बचपन स्कूल में पढ़ा रहीं है। इसी तरह 7 साल की बालिका रीना को शहर के लोकमान्य तिलक स्कूल की कक्षा तीसरीं में दाखिला दिला रखा है। अनिता दीदी ने इन दिनों की उच्च शिक्षा के लिए अभी से सोच रखा है। शहर में कई लोग अनिता दीदी को मां तो कोई बहन के तोर पर मानता है, रक्षाबंधन पर राखी भी बांधने आते। अनिता दीदी आने वाले सभी लोगों से सिगरेट, शराब, तंबाकू व अन्य तरह के नशों से दूर रहने की अपील करतीं और कई लोगों को संकल्प दिलाकर नशा भी छुड़वाया। उन्होंने हर वक्त एक ही दुआ की वह है जजमान के खुशी की।

अनिता दीदी का एक निवेदन खास कर नई जनरेशन युवा वर्ग के लिए शराब नशे से दूर रहने का है। जीवन में एक घंटे सोचना उन माता-पिता के लिए जिन्होंने आपका जीवन सुखमय बनाने के लिए बहुत तकलीफ देखी। उनका जीवन कभी दुखमय मत बनाना।