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अरबीना शेख

जन्म दिनांक: 15 अक्टूबर 1958
शिक्षा: एमए
व्यवसाय: शासकीय सेवा
उपलब्धि: स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में राष्ट्रपति अवार्ड

 

मानव सेवा के जुनून से जीता राष्ट्रपति अवार्ड

नर्स की भूमिका एक ‘मॉ‘ की तरह होती है और सिस्टर अर्बीना उस रूप में खरी उतरती है। गरीब हो याअमिर, युवा हो या बुजुर्ग, महिला हो या पूरूष ममत्व से भरे उनके स्पर्श मात्र से स्वस्थ्य महसूस करने लगताहै। सेवा के उनके इसी जुनून के कारण उन्हें गरिमामय राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में 37 साल पहले मंदसौर जिले के ग्राम बूढ़ा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से काम शूरू करने वाली अरबीना शेख नाम को अब किसी परिचय की जरूरत नहीं रही। बूढ़ा में नर्स के रूप में अपने व्यवहार से ग्रामीण क्षेत्र में भी स्वच्छ छबि बनने के बाद उनका तबादला रामपुरा नीमच हो गया। वहां वे 1982 से 1987 तक रही। इसके बाद वे फिर मंदसौर आ गई। इसके बाद 30 साल तक मंदसौर के शासकीय जिला अस्पताल में सेवाएं दी। अपने व्यवाहार और मिलनसारिता से वे जल्द ही शेख मेडम के रूप में पहचानी जाने लगी। महिलाओं के प्रति उनका व्यवहार हमेशा परिवार के किसी सदस्य की तरह रहा तो वे बच्चों पर वे ममता लुटाने से पीछे नहीं हटी।

अस्पताल में सेवाए देते देते समाजसेवा से जुड़ गई। समाजसेवी के लिए संगठनों का साथ मिला तो इसके बाद वे मानव की पीढ़ा को दूर करने के लिए ही जुट गई। काम के प्रति उनकी ललक और जुनून इसी से देखा जा सकता है कि सेवा के दौरान वे कभी घड़ी नहीं देखती। अस्पताल से निकलते-निकलते भी अगर कोई मरीज आ जाता था तो पहले उसके उपचार की प्रक्रिया पूरी करती, उनके परिवार को पूरी तरह संतुष्ट करने के बाद ही वहां से निकलती।

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में काम करने वाले रोटरी क्लब, दशपुर क्लब, हज कमेटी, लायंस क्लब के सेवा कार्यों में भी सहयोगी बन गई। स्वास्थ्य और टीकाकरण में काम करने वाली इन संस्थाओ को जब सम्मान मिला तो उन्होने अरबीना शेख का भी अलग-अलग क्षेत्र में योगदान पर सम्मान किया। स्वास्थ्य सेवा को लेकर जिलेभर में पहचान बनाने वाली अरबीना शेख के लिए 12 मई 2017 का दिन यादगार बन गया जब उन्हें दिल्ली के अशोका हॉल में महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा सम्मानित किया गया।

राष्ट्रपति पुरस्कार पाना उनके लिए इसलिए ज्यादा यादगार बन गया। पुरस्कार के लिए चयनित होने पर एक सप्ताह पहले उनके फोन पर मेसेज आया। उन्हें जब कहा गया कि उनका चयन स्वास्थ्य सेवा के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुआ है तो उन्हें भरोसा नहीं हुआ। इसके लिए उन्होंने कहा कि मैं कैसे मानंू इसका क्या प्रमाण है। यह कहकर फोन रख दिया। जब वे आम दिनों के लिए अस्पताल पहुंची तो उनका स्टॉफ और वरिष्ठ अधिकारी उनकी स्वागत में खड़े थे। वरिष्ठों ने खुद राष्ट्रपति पुरस्कार का पत्र दिखाया और बधाई दी। अरबीना शेख का नाम अब मंदसौर की स्वास्थ्य सेवा के लिए मिसाल बन गया है। नर्स के प्रोफेशन में आने वाली अन्य युवतियों के लिए वे आदर्श बन गई हैं।