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यशपालसिंह सिसौदिया

जन्म दिनांक: 7 जनवरी 1959
शिक्षा: एमए, एलएलबी
व्यवसाय: कृषि राजनीति
उपलब्धि: विधायक

 

गले में हाथ डाल, दिल जीतने वाला ‘यश‘पाल

राजनीतिक पृष्ठभूमि जुड़े ‘यश‘पाल। जैसा नाम वैसा ही काम। पत्रकारिता से जीवन की शुरूआत कर राजनीति में आने का लाभ यह मिला की हर विषय की बारीकी से पकड़ मिली। किसी भी व्यक्ति के गले में हाथ डाल कर उसका दिल जीत लेने की कला उन्हें बाकी सबसे अलग रखती है।

हमेशा उर्जा से लबरेज रहने वाले अच्छे वक्ता यशपालसिंह सिसौदिया का जन्म 7 जनवरी 1959 को जिले के ग्राम निम्बोद के प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। उनके पिता पूर्व विधायक स्व. ठाकुर किशोर सिंह सिसौदिया जनसंघके समय से राजनीति से जुड़े और पहली पंक्ति के जाने-माने नेता थे। वे सहकारी बैंक के अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष भी रहे। ज्येष्ठ भाई राजेन्दसिंह सिसौदिया भी विधायक रहे हैं। युवाकाल में पत्रकारिता से जुड़े और देश के बड़े अखबारों में काम किया। इसके बाद राजनीति में आए। संगठन व सत्ता के जिस पद पर वे रहे वहां पूरे समर्पण से कार्य किया।

जनता में लोकप्रिय हुए और अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के स्नेह के पात्र भी बने। अपनी स्वच्छ व इमानदार छवी निष्पक्ष पारदर्शी, पारखी कार्यशैली से खास पहचान बनाई। पूर्व सांसद स्व. डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय ने संसदीय क्षेत्र में अपना प्रतिनिधि बनाया। साल 2000 में नगर पालिका अध्यक्ष चुने गए। साढ़े पांच साल का अध्यक्षी कार्यकाल, विकास का एक स्वर्णिम इतिहास बन गया। तरणताल संजय गांधी उद्यान में सभागृह, सब्जी मंडी विकास, नेहरू बस स्टैण्ड का सुधार, महाराणा बसस्टैण्ड का निर्माण, नए नगरपालिका भवन का निर्माण उन्हीं के कार्यकाल में हुआ। 2008 के विधानसभा चुनाव में मंदसौर की जनता ने उन्हें अपना विधायक चुना। वे एक विकासवादी जनप्रतिनिधि और फिर विधायक के रूप में सक्रिय होते चले गए। यही कारण है कि 2013 में उन्हें जनता ने फिर से विधायक चुना। बीते 10 सालों में मंदसौर विधानसभा क्षेत्र में उनके प्रयासों से विकास की एक नई इबारत लिखी गई। ग्रामीण क्षेत्रों में उन्होंने पुल-पुलिया का वे सड़को का जा बिछा दिया। स्कूलों को उन्नयन, पेयजल, सिंचाई की सुविधाएं बढ़ाई। मंदसौर शहर में पूरी सिद्दत से काम किया। आज एक आधुनिक आकर्षक शहर के रूप में मंदसौर को मिले स्वरूप के वे ही शिल्पकार माने जाते हैं। चौड़ी सड़के, विकसित चौराहे, बेहतर यातायात, काला भाटा बांध, चंबल पेयजल योजना के रूप में जल संकट के स्थाई समाधान की ऐतिहासिक सौगात, भगवान पशुपतिनाथ की नगरी मंदसौर को पवित्र नगरी का सम्मान, उज्जैन की तर्ज पर मंदसौर में कालिदास समारोह की शुरूआत। सुसज्जित स्टेडियम उनकी खेलो के प्रति विकासवादी सोच का ही नतीजा है। अब वे शहर में रिंग रोड़ व आधुनिक मल्टी पार्कींग की योजना को आगे बढ़ा रहें है। उनका स्पष्ट मानना है कि ईमानदारी से अपना काम करते रहो, आपको जनता ने चुना है उसके लिए सोचो तो राजनीतिक खींचतान के बीच भी आम जनता के दिलों पर राज करते रहेंगे।