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राजेंन्द्र सिंह गौतम

जन्म स्थान: चंद्रपुरा मंदसौर
शिक्षा: स्नात्तक
व्यवसाय: कृषि – व्यापार
उपलब्धि: मंदसौर जिला पंचायत, जिला कांग्रेस व कमर्शियल कॉ-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व अध्यक्ष

सियासत में निर्भीकता का नाम ‘राजेंद्रसिंह गौतम‘

मालवा क्षेत्र की सियासत में निर्भीकता का दूसरा नाम राजेंद्रसिंह गौतम को माना जाता हैं। बात चाहेकार्यकर्ताओं, किसानों या शोषित लोगों की हो, ऐसे जब किसी पर विपत्ती आए तो गौतम तालाब में रहकर मगरमच्छ से बैर लेने में भी नहीं झिझकते। उनकी यही दबंग शैली औरों से बिलकुल जुदा रखती है।

ग्वालियर स्टेट के वक्त से चंदरपुरा गांव क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है। सिंधिया राजघराने के जमींदार ठाकुर मोहनसिंह जी गौतम जो कि 1962 में सीतामऊ और 1967 में मंदसौर के विधायक रहे। उनके यहां जन्में राजेन्द्रसिंह को राजनीति विरासत में मिली, बाल्यावस्था में राजेंद्रसिंह को शंकरसिंह जी ने गोद लिया। सिंधिया राघजराने से पीढ़ी दर पीढ़ी पुराने ताल्लुकात होने से राजेंन्द्रसिंह को साल 1980 में पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस के कद्दावर नेता माधवराव सिंधिया अपने साथ कांग्रेस में लाए। साल 1992 में गौतम जिला कांग्रेस महामंत्री बने। 1998 में प्रदेश सचिव रहे। साल 1999 में माधवराव ने कांग्रेस की लोक सभा सीट की पहली सूची में राजेंद्रसिंह को मंदसौर से टिकट दिलाया, जिसमें भाजपा के डॉ. लक्ष्मीनारायन पांडेय को कड़ी चुनौती दी। 2000 में गोतम जिप. के सदस्य निर्वाचित हुए, तब 16 सदस्यों में भाजपा के 11 और कांग्रेस के केवल 5 सदस्य थे। अध्यक्ष पद के चुनाव में गौतम 8-8 तक मुकाबला बाराबरी पर ले आए, इसके बाद गोटी से हुए चुनाव में गौतम जिपं अध्यक्ष पिर्वाचित हुए। साल 2000 में वे कांग्रेस जिला अध्यक्ष बने। 2001 में अभा कांग्रेस कमेटी के निर्वाचित सदस्य चुने गए। सैफी कमर्शियल बैंक की जिम्मेदारी भी संभाली। उनकी पत्नी योगेशदेवी गौतम भी राजनीति में सक्रिय रहीं और 1995 में पार्षद, 2005 में जिपं सदस्य, सहकारी बाजार अध्यक्ष व कमर्शियल कॉ-ओपरेटिव बैंक अध्यक्ष पद पर भी रहीं। साल 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस संसदीय क्षेत्र की सभी 8 सीटें हार गई थी, पार्टी का बुरा समय शुरू हुआ तो कोई उम्मीदवार 2004 का लोकसभा लड़ने को तैयार नहीं था। मजबूरन कांग्रेस संगठन ने मंदसौर सीट एनसीपी की कल्पना परूलेकर को देना तय किया, हाईकमान के फैसले से कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी। जिलाध्यक्ष होने के नाते कार्यकर्ताओं ने गौतम पर उम्मीदवारी का दबाव बनाया, इस पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गौतम को उम्मीदवार बनाया। सीट कांग्रेस हारी जरूर लेकिन उम्मीदवारी बरकरार रखी, मनोबल ना टूटने का फायदा साल 2009 में कांग्रेस को मिला और सीट जीती। पूर्व मंत्री महेंद्रसिंह कालूखेड़ा को अपना राजनीतिक अपना गुरू मानने वाले गौतम ने साल 2008 में नारकोटिक्स विभाग के खिलाफ आंदोलन कर 8000 किसानों के अफीम पट्टे कटने से बचाए थे। कमर्शियल कॉ-आपरेटिव बैंक के अध्यक्ष के रूप में रिकवरी कराने में बौतम ने मंदसौर के दिग्गज, नामीगिरामी राजनीतिक रसूखदारों के प्रतिष्ठानों पर भी ताले डलवा दिए थे। कार्यवाई से खासा हडकंप मचा था। बड़े पर्दो पर रहने वाले डिफाल्टर के नाम घंटाघर की प्रशंसा तत्कालीन सीएम दिग्विजयसिंह ने खुद की और तत्कालीन कलेक्टर मनोज श्रीवास्तव, एसपी संजय राणा ने अभिनंदन पत्र भी सौंपा था।