Breaking News
वाजिद खान

जन्म दिनांक: 10 मार्च 1981
शिक्षा: स्कूली
व्यवसाय: कलाकार
उपलब्धि: गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज।

एक कलाकार जिसने बढ़ाया मंदसौर का मान

वाजिद खान (जन्म: 10 मार्च 1981, मंदसौर,मध्य प्रदेश, भारत) एक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आयरन नेल आर्टिस्ट (कलाकार), चित्रकार, पेटेंट धारक, व अविष्कारक हैं। 37 साल का यह युवा देश दुनिया में मंदसौर की पहचान बन गया है। वह खुद को कलाकार कहलाना पसंदकरता है, कलाकार जिसने किसी एक कला का बंधन स्वीकार नहीं किया। इनोवेशन उसके खुन में है।ईश्वर ने उन्हें बनाते समय जो उनके पास सर्वोच्च था, डाला है।

बात कर रहे हैं अंतर राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार वाजिद खान की। जिले के छोटे से गांव सोनगिरी के गरीब परिवार में उनका जन्म हुआ। पांच भाईयों और दो बहनों के साथ शुरूआती जीवन आम बच्चों की तरह ही बीता। लेकिन मन चंचल और सौच कालत्मक थी। साधारण वस्तुओं से वे असाधारण प्रस्तुती देने की कोशिश करते और इसी वजह से घर के बढ़ो की डांट खाते। पढ़ाई में कमजोर थे। कक्षा पांचवीं के बाद ही घरवाले कला के शौक से परेशान हो गए। खेती करने वाले पिता बेहद नाराज रहते थे। इसी दौरान वाजिद दुनिया की सबसे छसेटी प्रेस बनाने में लगे थे। स्टील और लोहे से उन्होंने सबसे छोटी आयरन प्रेस बना कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। 14 साल की आयु तक आते-आते पानी में चलने वाला सबसे छोटा जहाजव हैलीकॉप्टर बना दिया। इन आविष्कारों पर वाजिद को पूर्व राष्ट्रपति महामहिम डॉ. एपीजे अब्दूल कलाम से प्रशंसा एवं प्रोत्साहन व राष्ट्रीय नवप्रर्वतन संस्थान में डॉ कलाम के साथ समय व्यतीत करने का गौरव प्राप्त हुआ। साल 2003 में इन्होंने एक प्रकाश संवेदक और गियर लॉक का आविष्कार किया। वाजिद खान को 140 आविष्कारों के लिए श्रेय प्राप्त है।

युवावस्था में उन्होंने खुद को इंदौर में शिफ्ट कर लिया। यहां मां-बेटे का प्यार दिखाती नेल आर्ट की कलाकृति में उमड़ी भावनाओं ने दर्शकों को भावुक किया। 2012में ऑटोमोबाइल आर्ट लांच कर दिया। ऑटोमोबाइल पार्ट्स से आर्ट दीवार पर एक घोड़ा बनाया गया जो दूर से देखने पर जॉकी के साथ दौड़ता हुआ नजर आता है। इसके थ्री डी इफेक्ट्स आज भी इंदौर शहर के एक मशहूर बंगले की दिवार पर हैं। उन्होंने अपनी कला को मुंबई से दुबई और लंदन में कला प्रदर्शित किया। 2014 में बेटी बचाओं मुहीम में शामिल हुए और चिकित्सा उपकरणों से रोती हुई एक मासूम बच्ची की कलाकृति बनाई। इसी साल श्रीलंका के आर्किटेक्ट बाबा का गिट्टी से फोटो बनाकर अमेजिंग आर्ट पर अपना हुनर दिखाया। 2015 में बंदूक की गोली से महात्मा गांधी का फोटो बनाया। वाजिद की उंगलियों का जादू दुनिया को 2022 में कतर में होने वाले फिफा वर्ल्ड कप में देखने को मिलेगा। वाजिद को कतर में 10 हजार स्क्वेयर फीट का स्कल्पचर का कांटेक्ट मिला है जिसे वे कई नायाब चीजों से तैयार कर रहे हैं। यह दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा हस्तनिर्मित स्कल्पचर होगा।

वाजिद ने ‘नेल आर्ट‘ से महात्मा गांधी का चित्र भी बनाया। जिसे साल 2012 में ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड‘ में शामिल किया गया। उन्होंने नेल आर्ट से मदर मैरी, ईसा मसीह, काबा शरी़फ, सांई बाबा, रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक उद्योगपति धीरूबाई अंबानी, बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, संयुक्त अरब अमीरात के वजीर-ए-आलम मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम और उनके पुत्र हामदान बिन मोहमें बिन राशिद अल मकतूम का चित्र बनाया है। वाजिद ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, इंदौर में लेक्चर दिया। मुंबई, दुबई व लंदन में आर्ट शो हो चुके हैं। आईआईएम अहमदाबाद व आईआईटी मुंबई में लेक्चर हुए जबकि ऑक्सफोर्ड में लेक्चर का प्रस्ताव है।