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स्वं. डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय

जन्म दिनांक: 25 मार्च 1928
शिक्षा: एमए, आयुर्वेद रत्न
व्यवसाय: डॉक्टर
उपलब्धि: 8 बार मंदसौर-नीमच-जावरा सांसद रहे,प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भी रहे

जनसंघ भाजपा को सींचने वाले मालवा के गांधी डॉ. पांडेयसादगी, सदाचार को जीवनभर अपनाने वाली बिरली शख्सियत स्व. डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे। उनकी व्यवहार कुशलता-सक्रियता का ही असर था कि 8 बार मंदसौर-नीमच-जावरा के सांसद रहे। जनसंघ-भाजपा को देश-प्रदेश में खडे़ करने वालों की प्रथम पंक्ति में शामिल डॉ. पांडेय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। मालावा के गांधी के रूप में पहचान बनाई, उनके चले जाने से मूल्यों-सिद्धांतों वाली राजनीति का आज भी खालीपन लगता है।

जिस दौर में देश-प्रदेश में कांग्रेस का दबदबा था, तब से डॉ. पांडेय गांव-गलियारों में जनसंघ का प्रचार करते थे। पार्षद बनने के बाद डॉ. पांडेय को संघठन ने जावरा विधानसभा से कांग्रेस के तत्कालीन सीएम कैलाशनाथ काटजू के सामने प्रत्याशी बनाया था। उस चुनाव में काटजू को पराजित कर बड़ा मुकाम हासिल किया था। इसके बाद वे देश की 5वीं, 6ठीं, 9वीं, 10वीं,11वीं, 12वीं, 13वीं, 14वीं, लोकसभा से मंदसौर-नीमच के सांसद निर्वाचित हुए। प्रदेश में ज्यादातर समय कांग्रेस की सरकार होने और संसदीय क्षेत्र की आठों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस होने के बाद भी डॉ. पांडेय विजयी होते रहे। कहा जाता है कि जिस वक्त देश की लोकसभा में जनसंघ-भाजपा से केवल 2 सांसद चुनकर आते थे, उनमें एक डॉ. पांडेय भी होते थे। आज भाजपा विश्व का सबसे बडा़ राजनैतिक दल है। इस मुकाम पर पहुचाने में डॉ. पांडेय जैसी शख्सियत का बडा़ योगदान है। केंद्र सरकार के कई मंत्रालयों की समितियों में अहम पदों को भी संभाला। मंदसौर-नीमच-जावरा संसदीय क्षेत्र में सांसद रहते डॉ. पांडेय ने रेल्वे, उद्योग, चिकित्सा, शिक्षा, रोड, बिजली पानी समेत कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम कर क्षेत्र के विकास का मार्ग प्रशस्त किया और उनके कामों को आज भी याद रखा जाता है। सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले डॉ. पांडेय का राजनीतिक जीवन निष्कलंक रहा, वे अनुशासनप्रिय रहे। सच को सच और गलत को गलत बोलने में वे कभी नही कतराए और स्पष्टवक्ता की इसी छवि के कारण भाजपा में अटलबिहारी वाजपेयी जैसी शख्सियत भी पांडेयजी से प्रभावित रही। वे देश के कोने-कोने में भी पार्टी प्रचारक बनकर गए और पार्टी की नींव लगातार मजबूत की। उनके पुत्र डॉ. राजेन्द्र पांडेय जावरा से भाजपा के विधायक हैं, प्रदेश भाजपा के मंत्री भी रह चुके हैं और उनकी गिनती प्रदेश के वरिष्ठ विधायकों में होती है। डॉ. पांडेय के चार पुत्रों में से पवन पांडेय का देहांत हो चुका है। जबकि डॉ. राजेंद्र, शैलेंद्र व सबसे छोटे पुत्र सुरेंद्र पांडेय राजनीतिक, सामाजिक जीवन में लगातार सक्रिय हैं।

डॉ. पांडेय का प्रभाव ही कहा जाएगा कि उनके कई शिष्य विधायक-मंत्री, सांसद रहे, इसी तरह मंदसौर के जगदिश मंडवारिया, विजय कुमावत, नीमच के करणसिंह परमार जैसे कार्यकर्ताओं को भी पांडेयजी ने खास पहचान दिलाई। 19 मई 2016 के दिन 88 वर्ष की उम्र में डॉ. पांडेय ने अंतिम सांस ली। उनके चले जाने के बाद से राजनीति में मूल्यों, सिद्धांतों का काफी हद तक सूनापन आया है, जिसकी पूर्ति उनके पूत्र, परिवार सदस्य करते उनके आदर्शो को आत्मसात किए हुए हैं।