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स्व. केशवप्रकाश विद्यार्थी

जन्म दिनांक: 15 अगस्त 1920
शिक्षा: मैट्रिक साहित्यरत्न
व्यवसाय: साहित्यकार, कवि, पत्रकार
उपलब्धि: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, नारायणगढ़ नपा के पूर्व अध्यक्ष

 

स्वतंत्रता संग्राम को कर्तव्य बता पेंशन ठुकराने वाला शख्स

स्वतंत्रता संग्राम सैनानी, साहित्य, पत्रकार और राजनीतीक केशवप्रकाश विद्यार्थी। वे जिले की एकमात्रशख्सियत हैं जिन्होंने आजादी के लिए संघर्ष तो किया किंतु जब सम्मान की बात आई तो पीछे हट गए। कभी हार नही मानने का उनका जज्बा लोगों के स्मृति पटल पर छाप छोड़ता था। साल 1940 में बेटियों को समर्पित ‘कन्या‘ नामक पुस्तिका निकालकर बेटियों की महत्ता को समाज के समक्ष रखा था।

नारायणगढ़ के किसान परिवार में जन्मे केशव प्रकाश का बचपन संघर्ष के दौर में बीता। पिता गोवर्धनजी किसान, पशुपालक थे। जिस उम्र में ज्यादातर दोस्त मोहल्ले में खेलते या खेती करने जाते थे, तो केशव जी कस्बे के ही स्कूल में पढ़ाई में मशगुल रहते थे। साल 1935 में महज 15 साल की उम्र में उन्होंने नारायणगढ़ में प्रजामंडल की स्थापना कर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ प्रभात फेरियां निकालने लगे। साल 1942 में भारत छोडा़े आंदोलन में हिस्सा लेने सेंधवा चले गए। ब्रिटिस हुकूमत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया तो अजमेर-उदयपुर को कर्मस्थली बनाया। उदयपुर में साप्ताहिक नवजीवन पत्रिका के सहायक संपादक रहे। अजमेर में वीर पुत्र मासिक पत्रिका में भी काम देखा। यहीं आर्य समाज की संस्था वैदिक यंत्रालय के संपर्क में आए। साल 1940 मे नारायणगढ़ आकर उन्होंने बेटियों को समर्पित ‘कन्या‘ मासिक पत्रिका प्रकाशित की। इसमें बेटियों को शिक्षित व अधिकारों के प्रति जागृत करने की पैरवी की। केशवजी साल 1947 से 1948 तक नारायणगढ़ नगरपालिका के अध्यक्ष भी रहे। बाद में मंदसौर आकर पुस्तिकाओं के प्रकाशन की प्रेस डाली। वे मंदसौर में 1950 से 1952 तक जिला कांग्रेस के प्रधान मंत्री (उस दौर का प्रमुख पद) भी रहे। केशवजी की रचनाओं में स्फुलिंग, ज्वाला, बच्चों की पुस्तक ‘बाल वाटिका‘, श्रद्धांजलि, पन्नाधाय, बलराम, नेता निकंुज (निंदनीय व वंदनीय आचरण वाले नेताओं पर लिखी पुस्तक), 1962 में चीन के भारत की ‘ललकार‘ लिखी। इसी अवधि में दैनिक पत्र निराला व मालव भी निकाला। 1968 में गीता का पद्यानुवाद किया। वे राष्ट्रीय व प्रादेशक अखबारों के पत्रकार भी रहे। 11 अप्रेल 1976 को उनका निधन हुआ। परिवार में हमेशा संस्कारों, शिक्षा, उसूलों पर बल दिया। उनकी बड़ी पुत्री चंद्रकला विद्यार्थी महारानी लक्ष्मीबाई कन्या उमावि की प्राचार्य रहीं। पुत्र विक्रम विद्यार्थी वरिष्ठ पत्रकार हैं। पुत्री शशिकला कमला नेहरू विद्या मंदिर में शिक्षिका रहीं, छोटी पुत्री इंदू रतलाम में शिक्षिका रहकर सेवानिवृत्त हुईं। 1987 मंे मंदसौर नपा ने उनकी स्मृति में कंबल केंद्र रोडका नामकरण स्वतंत्रता सैनानी केशव प्रकाश विद्यार्थी मार्ग किया हुआ है। विक्रमजी बताते हैं कि सरकार ने जब स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने वाले सैनानियों के लिए पेंशन राशि ऑफर की तो पिताजी का जवाब था-मैंने कर्तव्य समझकर आंदोलन में हिस्सा लिया, प्रतिदान के रूप में कुछ नहीं ले सकता‘ इन शब्दों के साथ पेंशन लेने से इनकार कर दिया था, इस उसूल पर आजीवन कायम रहे। इनका साहित्य https://keshavprakashvidharthi.blogspot.in पर उपलब्ध हैं।