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स्व. डॉ. टोपनदास शर्मा

जन्म दिनांक: दिसंबर 1912
शिक्षा: आयुर्वेदाचार्य
व्यवसाय: वैद्य
उपलब्धि: जनकूपुरा बड़ा चौक का निर्माण करवाया।

पुराने शहर के शिल्पकार डॉ. टोपनदास

50 के दशक में नगरपालिका के पार्षद रहे डॉ. टोपनदास शर्मा से शहर की नई पीढ़ी परिचित नहीं होगी। पर हम बताना चाहते हैं कि वे पुराने शहर के कई हिस्सों के शिल्पकार थे। विभाजन के दौरान पाकिस्तान से भारत आकर मंदसौर में बसे और यहां की जमी को अपना मानकर दिलोजान से सेवा की। आयुर्वेद व युनानी चिकित्सा में सिद्धहस्थ थें। उन्होंने पूरे जीवन काल गरीबों की मुफ्त सेवा की। इसी सेवा के कारण पुराने शहर में अभी भी परिवार के डॉक्टर पुत्र व पौत्रों को लोग डॉ. टोपनदास जी के नाम से ही जानते हैं।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के टंडोजाम कस्बे में एक ब्राह्मण परिवार में इनका जन्म हुआ।  पिता पं. हेमंतदास शर्मा कस्बे में पुजारी का काम करते थे। माताजी श्रीमती दयादेवी गृहणी थीं। प्रारंभिक शिक्षा कस्बे में ही हुई। इसके पाद पाकिस्तान में ही आयुर्वेद व यूनानी चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई की और आयुर्वेद में भिषिगाचार्य की डिग्री हांसिल की युवावस्था में आने के दौरान ही पिता का स्वर्गवास हो गया। विवाह धर्मादेवी से हुआ। 1947 में विभाजन की मार इस परिवार को भी झेलना पड़ी। डॉ. टोपनदासजी पत्नी व एक पुत्र के साथ भारत आ गए और मंदसौर आकर बस गए।

मंदसौर आने के बाद जनकूपुरा में रहे। यहीं उन्होंने अपना औषधालय शुरू किया। उनके पुत्र डॉ. कुशल शर्मा बताते हैं कि शुरूआत में ही पिताजी को लोगों के बीच एक कुशल और अनुभवी वैद्य के रूप में मान्यता मिल गई। उनके हाथ में जस और दवा में इतनी सिद्धी मरणासन रोगी भी स्वस्थ्य हो जाता था। लोंगो के बीच उनकी प्रसिद्धी कॉफी थी। साल 1954 में जनकूपुरा क्षेत्र से वे नगरपालिका में पार्षद चुने गए। पार्षद कार्यकाल में उन्होंने विकास को महत्व दिया। जनकूपुरा में बड़ाचौक का निर्माण, सिलावट गली, कोलगर गली, मोदी जी की गली का निर्माण उन्हीं ने करवाया था। इन क्षेत्रों में 50 के दशक में किया गया विकास कार्य आज भी देखा जा सकता है। राजनीति के अलावा वे सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों में भी काफी सक्रिय रहते थे मंदसौर में गायत्री समाज की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रारंभिक काल में गायत्री समाज की गतिविधियां उन्हीं के विकास से संचालित होती थी। वे खानपुरा में स्थित नरहरि ब्रह्मचैतन्य आश्रम के संरक्षक भी थे।

डॉ. टोपनदास के सात पुत्र व तीन पुत्रियां हैं। वे बच्चों की शिक्षा को लेकर भी काफी जागरूक थे। उन्होंने दो पुत्रों को डॉक्टरी की पढ़ाई करवाई। बड़े पुत्र डॉ. जगदीश शर्मा व डॉ. कुशल शर्मा हैं। इसके अलावा एक पुत्र श्री प्रभाशंकर शर्मा एमपीईबी से सेवानिवृत्त हो चुकेे हैं जबकि एक पुत्र हरिविट्ठल शर्मा भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए। सबसे छोटे पुत्र महेश शर्मा प्रापर्टी का व्यवसाय करते हैं। दो पुत्रों का स्वर्गवास हो चुका है। डॉ. टोपनदास के दो पौत्र डॉ. दिनेश शर्मा डाक्टरी के उनके पेशे की शाख को कायम रखे हुए हैं। डॉ. टोपनदास का स्वर्गवाा 19 जुलाई 1974 में हुआ।