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स्व. श्यामसुंदर पाटीदार

जन्म दिनांक: 25 जुलाई 1916

शिक्षा: बीएससी, एलएलबी

व्यवसाय: खेती, अभिभाषक

उपलब्धि: 6 बार विधायक बने, पूर्व मंत्री

 

जीवन पर्यंत नैतिकता की पक्षधर रही शख्सियत

राजनीति को सही मायनों में सेवा का माध्यम बनाने वालों में स्व. श्यामसुंदर पाटीदार जैसी शख्सिियत का बड़ा योगदान रहा है। वे जिवन पर्यंत नैतिकता व साफ-सुथरी राजनीति के पक्षधर रहे। मंदसौर विधान सभा से 6 बार विधायक बने। भोपाल में जब गैस त्रासदी हुई तो उस घटना से वे इतने आहत हुए कि श्रम मंत्री पद और मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे जनसेवक के प्रति आज की पीढ़ी श्रद्धाभाव रखती है।

आजादी से पहले ही स्व. पाटीदार के परिवार में स्वतंत्रता आंदोलन के लिए संघर्ष जिवंत था, पिता भगतराम पटेल (पाटीदार) स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे। उन्हीं के संसकारो का प्रभाव श्यामसंुदर जी पर पड़ा। उनका जन्म अभिभाजित मंदसौर जिले में जावद के समिप ग्राम लासूर में हुआ। ग्राम जावद में प्रारंभिक शिक्षा के बाद विज्ञान में स्नातक, उसके बाद विधि शिक्षा ली। वे आर्य समाज और कांग्रेस गतिविधियों में सक्रिय रहे।

साल 1952, 1957, 1962, 1972, 1980, व 1985 में मंदसौर से कांग्रेस पार्टी से विधायक निर्वाचित हुए। विधायक अवधि के दौरान पाटीदार जी 1964 से 1967 तक द्वारिकाप्रसाद मिश्र मंत्रिमंडल मे श्रम, गृह निर्माण चंबल घाटी विकास, रोजगार एवं प्रशिक्षण तथा सांख्यिकी विभाग के मंत्रि रहे। 1983 से दिसंबर 1984 तक मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह मंत्रिमंडल में श्रम मंत्री का दायित्व  संभाला। भोपाल गैस कांड में नैतिकता के आधार पर उन्होंने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया। 8 बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लडे़ और 6 बार विधायक रहे पाटीदार जी ने चुनाव में कभी किसी व्यक्ति, संस्था से पृथक से कोई चंदा नहीं लिया। 1989 में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्रप्रसाद शुक्ल ने विधायकी कार्य निष्पादन उत्कृष्ट श्रेणी का निरूपित कर 21 सितंबर 1989 को विधानश्री सम्मान से अलंकृत किया। वे इंटक से भी जुड़े रहे। मंदसौर अंचल के स्लेट पैंसिल उद्योग की इकाइयों में शैल पत्थर श्रमिकों को सिलिकोसिस बिमारी का अभिशाप झेलना पड़ता था। उस पर कड़ाई से नियंत्रण के लिए श्रम कानून में परिवर्तन, आधुनिक कटिंग मशीनें तथा ।श्रमिक कल्याण व पुनर्वास योजनाएं लागू की। मध्यप्रदेश स्लेट पैंसिल कर्मकार कल्याण मंडल की स्थापना की ताकि श्रमिकों संबंधी सभी समस्याओं का समाधान हो सके। धूलकोट बांध, मुक्तिधाम स्थित बड़ी पुलिया का निर्माण पाटीदार जी ने कराया। शिवना नदी पर बांध बनाए। गांधी स्मारक ट्रस्ट और स्नेहवृत्त जैसी संस्थाऔ की स्थापना की।

चार भाइयों में कनक भानु, नीलकंठ, चतुरानन, श्यामसुंदर व दो बहनें प्रभुकुमारी, अभयकुमारी थीं। श्यामसुंदर जी का निधन 31 मार्च 2002 को हुआ। उनके दो पुत्र त्रिवेदी पाटीदार व कीर्तिदेव पाटीदार तथा सुपुत्री भारती शुक्ला हैं। इसमें इंजीनियर त्रिदेव के ज्येष्ठ पुत्र सत्यम पाटीदार भारतीय सेना में उच्च पद पर सेवाएं दे रहे हैं तथा कनिष्ठ पुत्र प्रेम पाटीदार मंदसौर में पेट्रोल पंप का संचालन करते हैं। स्व. पाटीदार जी के छोटे पुत्र कीर्तिदेव सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के उच्च अधिकारी पर से हाल ही में सेवानिवृत हुए हैं, इनकी दो बेटियां एकता पाटीदार व कृति पाटीदार उच्च शिक्षित होकर इंदौर में सेवारत हैं।