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अमरसिंह शेखावत – मंदसौर में हॉकी के द्रोणाचार्य

मंदसौर हॉकी के द्रोणाचार्य

मंदसौर हॉकी के खेल शिक्षक अमरसिंह शेखावत और हॉकी एक दूसरे के पर्याय हैं। सम्मान की ऊंचाई और खिलाडियों को तराशने के उनके जुनून को देखते हुए उन्हें हॉकी का द्रोणाचार्य कहा जाए तो गलत नहीं होगा। 50 सालों से खेल प्रशिक्षण देने वाले इस शख्स में 70 की उम्र में भी युवाओं सा जोश है। यही जोश खेल प्रतिभाओं निखारने के लिए उनमें जुनून का काम कर रहा है। हॉकी की निःशुल्क कोचिंग देने के साथ वे सेंट थामस स्कूल में खेल प्रशिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं भी दे रहे हैं। वे बताते थे कि जो प्रतिभावसन खिलाड़ी हॉकी की स्ट्रीक व बॉल नहीं ला सकते हैं, उन्हें खेल सामग्री तक दिला देता हूं। ऐसे जरूरतमंद की सेवा करते समय मुझे सबसे ज्यादा सुकून मिलता है। 70 साल की उम्र होने के बावजुद आज भी शेखावत बच्चों के साथ उत्साह और जोश के साथ प्रेक्टिस करते नजर आते थे, तो उनमें गुरू द्रोणाचार्य की झलक दिखाई देती थी। उनके इसी जज्बे के कारण वे सेंट थामस स्कूल में नौ साल से प्रतिभा तराश रहे थे।

यह कहानी है 70 साल के एक ऐसे युवा की जिनके साथ कदम मिलाकर 25 साल का युवा भी नहीं दौड़ सकता है। अगर यूं कहे कि शेखावत की रगों में खून में लाल व सफेद रक्त कणिकाओं के साथ हॉकी से जुड़े विभिन्ना शब्द भी दौड़ते थे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। एक ऐसा शख्स जिसका उठना, बैठना, रहना, सोना सब हॉकी ही था। महू में 13 सितंबर 1948 को जन्मे अमरसिंह शेखावत ने 1964 से हॉकी खेलना शुरू की थी। हॉकी खेलने की प्रेरणा अपने मौसाजी ओलिंपियन शंकर लक्ष्मण से मिली थी। उसके बाद हॉकी उनकी जीवन संगिनी बन गई। जो मृत्यु तक वह हॉकी मैदान के नियमित खिलाड़ी रहे।

मंदसौर के ऊबड़-खाबड़ मैदानों पर भी उनसे हॉकी के गुर सीखकर अभी तक लगभग 100 से अधिक खिलाड़ी जिला स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने गुरु का नाम चकमा रहे हैं। भारतीय टीम में चयनित हुई नीलू डोडिया इस कड़ी में ताजातरीन नाम है। शेखावत ने शहर को 31 सालों में 5 हजार से ज्यादा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया। 3 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय व 250 से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं। खेल प्रशिक्षक शेखावत ने मंदसौर में कई प्रतिभा तराशी जो नेशनल से इंटरनेशनल तक मंदसौर का नाम गौरवांवित कर चुकी हैं। मंदसौर की नीलू डाडिया वर्तमान में भारत की तरफ से खेलकर मेडल ला चुकी है। मंदसौर के स्वर्गीय सुनील यादव जूनियर इंडिया में नेशनल केंप अटेंड कर चुके हैं। राकेश दाहिया नेशनल हॉकी एकेडनी दिल्ली में प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रियंका चन्द्रवत, आदिती माहेश्वरी हॉकी के बल पर ही इंडियन ऑयल में अच्छी पोस्ट पाकर केरियर बना रहे हैं। अक्षय दुबे, गौरव भक्तानी भोपाल हॉकी अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे हैं। ऐसे कई खिलाडियो के नाम हैं जिन्हें शेखावत ने परिश्रम व मेहनत से तैयार किया। उनके द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त अविनाश उपाध्याय वर्तमान में हॉकी इंडिया की मध्यभारत शाखा के सहसचिव है। शहर में हॉकी का स्थान सबसे ऊपर है। शेखावत ने जीवन हॉकी के लिए समर्पित कर दिया।  70 साल की उम्र में शेखावत बच्चों के साथ ग्राउंड पर प्रैक्टिस करते थे।

रेल्वे से रिटायरमेंट लेकर शहर के सेंट थॉमस सीनियर सेकेंडरी स्कूल खेल शिक्षक के रूप में कार्य संभाला व यहां से चालू हुई अमर सिंह सर की दूसरी पारी मंदसौर को कई सीनियर खिलाड़ी व कोच देने वाले ट्रेनर चले जाएंगे यह भरोसा किसी को नहीं था स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना व औरों को भी इसके लिए प्रेरित करना उनकी दिनचर्या में शामिल था। आज मंदसौर हॉकी भारत भारत के नक्शे पर है तो उनकी वजह है अमर सिंह 74 साल की उम्र में जहां चलना मुश्किल होता है वही वो आज भी हॉकी क्या करते पकड़े हुए ग्राउंड पर पसीना बहाते दिखते थे। मंदसौर में आज जो भी कुछ है और अपने अपने खेलों में नाम कमा रहे हैं उन्होंने अपना गुरु व मार्गदर्शक मार्गदर्शक आज खो दिया दिया आज जिनके के अथक प्रयासों के मेहनत के कारण मंदसौर को हॉकी टर्फ टर्फ मिला उनने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह उस पर पैर भी नहीं रख सकेंगे।

 

महू में जन्मे अमरसिंह शेखावत को अपने मौसा शंकर लक्ष्मण से हाॅकी की प्रेरणा मिली।  हॉकी में अच्छा नाम कमाने के चलते शेखावत 1970 में खेल कोटे से रेलवे में भर्ती हो गए और अजमेर में पोस्टिंग मिली। 1975 में तबादला रतलाम हो गया। इसी बीच उनकी पत्नी की मंदसौर के नर्सेस ट्रेनिंग सेंटर पोस्टिंग हुई। तब से ही मंदसौर की माटी से उनका जुड़ाव हो गया। रतलाम में हॉकी का चलन नहीं होने पर केवल इसी शौक के कारण प्रतिदिन मंदसौर से अप-डाउन करते। बाद में जब हॉकी के आड़े नौकरी आने लगी तो 1986 में रेलवे से रिजाइन देकर सेंट थामस सीनियर सेकंडरी स्कूल से जुड़ गए। तब से अभी तक इसी स्कूल में पीटी सर के नाम से ख्यात थे। शेखावत के शिष्यों में स्व. सुनील यादव जूनियर इंडिया में नेशनल केंप अटेंड कर चुके थे। राकेश दाहिया अभी नेशनल हॉकी एकेडमी दिल्ली में प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रियंका चंद्रावत, अदिति माहेश्वरी हॉकी के बल पर ही इंडियन ऑइल में अच्छी पोस्ट पाकर खेल रही हैं तो अक्षय दुबे, गौरव भक्तानी भोपाल हॉकी अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे हैं। हॉकी के अलावा एथेलेटिक्स में 400 हर्डल व 14 किमी क्राॅस कंट्री में रेलवे का प्रतिनिधित्व किया। 70 साल की उम्र होने के बाद भी कोई उनकी मैदान की सक्रियता को चैलेंज नहीं कर सकता था। शेखावत को अगर खिलाड़ियों में प्रतिभा दिखती तो वह हॉकी स्टिक व बॉल भी दिलाकर खिलाते थे।

आपका स्वर्गवास दीपावली पर्व पर एक दुखद घटना के साथ हुआ. अपने घर पर दीये से लगी आग में पत्नी को बचाने के कारण अमरसिंह का गला व आगे का पेट का हिस्सा 60 प्रश तक जल गया था। उपचार के दौरान निधन हो गया। मूल रूप से महू के निवासी अमरसिंह शेखावत 1986 के बाद से ही मंदसौर में हॉकी खिलाड़ियों की पौध तैयार कर रहे थे। सभी खिलाड़ियों की मांग पर  मंदसौर में रेवास-देवड़ा रोड पर केंद्रीय विद्यालय के पास बने नए हॉकी के एस्ट्रोटर्फ मैदान का नामकरण अमरसिंह शेखावत के नाम पर रखा जायेगा।

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