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मंदसौर के युवा ने पाई विश्व में ख्याति : जीका वायरस पर तैयार की पुस्तक

मंदसौर निप्र।  प्रतिभा किसी की मोहताज नही होती उसे आवश्यकता होती है बस एक छोटे से प्रयास की। ऐसा ही एक प्रयास मंदसौर के युवा ने किया और वह भारत ही नही बल्कि  विदेशों  में भी अपनी लेखनी के माध्यम से पहचान बना गया। विश्व के कई देशोंके नागरिक जीका वायरस  नाम की एक खतरनाक बिमारी से जुंझ रहे है। ऐसे में नगर के एक होनहार छात्र ने कॉलेज स्तर पर इस बिमारी को लेकर एक छोटा सा  प्रोजेक्ट तैयार किया था जिसे ऑनलाईन देखकर एक विदेशी पब्लिकेशन  कंपनी ने संज्ञान में लेते हुए  उसे एक 50 पेंज की पुस्तक के रुप में प्रकाशित कर दिया। जिसके बाद यह पुस्तक धड़ल्ले से विदेशो में बिक रही है। जिससे इस युवा ने न केवल अपना बल्कि मंदसौर शहर का नाम भी दुनिया में गौरवान्वित कर दिया।

नगर के युवा विकास  व्यास जिसने सन 2016 में मंदसौर के बीआर नाहटा कॉलेज ऑफ फार्मेसी से फार्मेसी की पढाई पुरी की है। विकास के पिता किशन व्यास शासकीय नौकरी में सेवारत है वहीं माता श्रीमती लक्ष्मी व्यास एक  ग्रहणी है। विकास ने अपनी पढाई सत्र के दौरान विश्व के करीब 60 देशो को अपनी चपेट में ले चुकी एक बिमारी जिसका नाम जीका वायरस है, के बारे में संपूर्ण जानकारी व बचाव को लेकर एक  छोटा सा प्रोजेक्ट तैयार किया जिसे कॉलेज प्रशासन ने अपनी वेबसाईट पर प्रकाशित कर दिया। इस बीच विकास ने अपने कॉलेज की पढाई पूरी कर ली। कॉलेज की वेब साईट पर प्रकाशित हुऐ इस प्रोजेक्ट पर इस बिमारी से पिड़ीत देश जर्मनी की एक कंपनी लेम्बर्ड एकेडमी पब्लिकेशन को इतना रास आया की उन्होने इस प्रोजेक्ट को संज्ञान में लिया और कंपनी के ऐडिटर एंडी फोस्क्यू ने मंदसौर में विकास से संपर्क स्थापित किया और उनसे इस प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी ली। एडिटर एंडी फोस्क्यू ने विकास को यह सूचना दी की  उनके द्वारा बनाये गये प्रोजेक्ट के अनुसार कंपनी एक पुस्तक का निर्माण करना चाहती है और इसमेंउन्हें कंपनी की सहायता चाहती है इसलिये आप इस विषय को लेकर और  गहराई से लिखे। इस विषय पर कंपनी ने बकायदा विकास से कांटेक्ट साईन किया।  विकास ने इसे एक लक्ष्य मानकर फरवरी 2016 में इसकी शुरुआत की और सितंबर 2016 में कंपनी ने करीब तीन वेरिफिकेशन के बाद इस पुस्तक का प्रकाशन कर दिया। इस पुस्तक का नाम जीका वायरस व्हाय शुल्ड वी कन्सर्न ? (जीका वायसरः चिंता का विषय क्यों ?) रखा गया  है। इस पुस्तक में इस बिमारी की संपूर्ण जानकारी दी गई है और यह पुस्तक वर्तमान में भारत में ऑनलाईन शॉपिंग साईड अमेजन व विश्व में मोर बुक्स डॉट डीई साईड पर खरीदी जा सकती है। शहर के युवा विकास की एक छोटी सी शुरुआत ने एक बड़ा रुप ले लिया और मंदसौर नगर का नाम पूरे विश्व में  रोशन किया। विकास इस उपलब्धि का श्रेय परिवार व अपने शिक्षकों को देते है।

जीका वायरस क्या है – जीका वायरस एक गंभीर बिमारी है  जिसकी शुरुआत सन 1952 में अफ्रिका के युगान्डा में हुई थी जिसने बढ़ते -बढ़ते  वर्तमान में विश्व के करीब 60 देशो को अपनी चपेट में ले लिया और पूरे विश्व में आज तक करीब 5 लाख  लोग इस बिमारी से  ग्रस्त हो चुके है। जानकारी के अनुसार भारत में भी अहमदाबाद में इस बिमारी के बारे में पता चला है।  जिस तरह से चिकनगुनिया और डेंगू ऐडिस नामक मच्छर के काटने से होता है उसी प्रकार जीका वायरस भी इसी मच्छर के काटने से होता है और इसके लक्षण तीन महीने में व्यक्ति को पता चलते है। जिसमें शरीर दर्द करना, बुखार आना, ऑंखे आना और स्कीन पर रेशेस पड़ जाना।  जिस तरह से एचआईवी एक दूसरे के संपर्क में आने से बढ़ता है उसी प्रकार यह वायरस भी इसी तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुॅच जाता है। अगर यह वायरस किसी प्रग्नेंट महिला में फैल जाये तो उसके शिशु का मानसिक व शारीरिक विकास नही हो पाता और वह जीवन भर इस बिमारी से जुझता है। यह बिमारी धीरे-धीरे व्यक्ति को अपने चपेट में ले लेती है और इससे व्यक्ति की जान भी जा सकती है। वर्तमान में किसी भी देश में इस बिमारी  से बचाव का वेक्सीन तैयार नही हो पाया है। मुख्यतः इस बिमारी का प्रकोप ब्राजील, अमेरिका, फ्लोरिडा, स्पेन, मेक्सिको, स्पेन, साउथ अफ्रिका, जर्मनी सहित कई देशो में फैल चुका है।

 

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