मंदसौर क्रिकेट स्टेडियम बना तालाब

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मंदसौर। शहर के नूतन स्कूल के मैदान पर संजय गांधी स्टेडियम शुरु से ही चर्चा में रहा है। कभी राजनीतिक हस्तक्षेप तो कभी निर्माण अनियमितता तो कभी निर्वाचन को लेकर सुर्खियों में रहने वाले इस स्टेडियम निर्माण की अनियमितता की पोल खोल कर रख दी है। स्टेडियम को क्रि केट के लिए विशेषकर बनाया गया है। स्टेडियम के मैदान को बनाने के लिए लाखों रूपए खर्च किए गए। मंहगी घास लगाई गई। और दावा किया गया कि यह स्टेडियम १२ महिनों खेलने योग्य रहेगा। चूंकि बरसों से बारिश में स्टेडियम तालाब बन जाता था। लिहाजा पानी निकासी के लिए स्टेडियम मैदान के चारों ओर नालियां बनाई गई। हाल यह है कि बारिश में यह मैदान तालाब बना हुआ है। यही नहीं यहां लगाई गई लाखों रूपए खर्च कर बनाया मैदान एवं लगाई घास पूरी तरह खराब हो गया है। यही नहीं स्टेडियम की वीआईपी गैलरी व बेडमिंटन तथा टेबल टेनिस कोर्ट में भी कई समस्याएं उभर कर सामने आई है।
स्टेडियम निर्माण के लिए बरसों पहले समिति बनाई गई समिति के अध्यक्ष कलेक्टर व सचिव जिला शिक्षा अधिकारी है। उपाध्यक्ष पद पर आम वर्ग के लिए है। स्टेडियम के लिए पहले दुकानें बनाई। उसके बाद बरसों तक राजनीति में निर्माण कार्य उलझे रहे। तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह ने आनन-फानन में स्टेडियम निर्माण कार्य में तेजी दिखाई। रेस्टोरेंट, बेडमिंटन हॉल, टेबल टेनिस हॉल, वीआईपी गैलरी का निर्माण कार्य तेजी से पूरा करवाया गया। वहीं गड्ढे नुमा मैदान को क्रिकेट मैदान बनाने के लिए लाखों रूपए खर्च किए गए। यहां ना केवल मिट्टी डाल मैदान को ऊंचा किया गया। वरन् चारों और नालियां भी बनाई। वहीं क्रिकेट पिच बनाने वाले ख्यात व्यक्ति से दो क्रिकेट पिच बनवाई। बताया गया कि पिच की गुणवत्ता किसी भी अंतराष्ट्रीय क्रिकेट के खेलने योग्य है। राष्ट्रीयस्तर के मैदान स्वरूप यहां मंहगी घास भी रौपी गई। इन निर्माण कार्यों में ना तो गुणवत्ता देखी गई और ना ही तकनीक और ना ही कोई राष्ट्रीय स्तर के आर्किटेक्ट की मदद ली गई। यही वजह है कि लाखों रूपए खर्च कर बनाया मैदान खराब है। और क्रिकेट पिच कई दिनों से पानी में डूबी हुई है। इससे पिच भी बुरी तरह खराब हो चुकी है। इसके बाद भी स्टेडियम कमेटी स्वयं को अंजान बता रही है। कमेटी के सचिव केएल कारपेंटर ने कहा कि स्टेडियम मैदान निर्माण में क्या कमियां रह गई। इसकी जानकारी ली जाएगी। स्टेडियम मैदान पानी में क्यों डूबा हुआ है। इसकी भी जांच करवाई जाएगी। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। हांलाकि अभी तक स्टेडियम मैदान देखा नहीं है। स्टेडियम मैदान मौके पर जाकर देखकर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

गंभीर अनियमितता हुई जांच दल ने भी माना 
स्टेडियम निर्माण में काफी अनियमितता हुई। निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया गया। जो निर्माण कार्य किया वह घटिया किया गया। निर्माण कार्य के लिए जो निर्धारित प्रक्रिया है उसको ताक पर रखकर तत्कालीन कलेक्टर एवं स्टेडियम समिति अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार सिंह एवं अन्य सदस्यों ने निर्माण कार्य करवाए है। इस आशय की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश अग्रवाल ने कमिश्रर को की थी। शिकायत पर डॉ अशोक भार्गव की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनी थी। अग्रवाल ने कहा कि जांच कमेटी ने भी शिकायत को सही पाया है। संबंधित के िखलाफ कार्रवाई की जाना चाहिए।

जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा 
स्टेडियम कमेटी के आजीवन सदस्य एवं रेडक्रास समिति के चैअरमेन प्रितेश चावला ने कहा कि स्टेडियम के क्रिकेट खेल मैदान की जो वर्तमान खराब हालत है। इसके पीछे जिम्मेदारों की लापरवाही है। स्टेडियम मैदान निर्माण में इंजीनियर ने तकनीकि दृष्टि से ध्यान नहीं दिया। लिहाजा लाखों रूपए खर्च कर बनाया क्रिकेट मैदान बारिश में खराब हो गया है। और क्रिकेट पिच को भी नुकसान पहुंचा है। इस मामले को उच्चस्तरीय अधिकारी जांच कर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई करें।

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