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मंदसौर निवेशकों के लिए तैयार उद्योग विभाग

जिले में लघु एवं सुक्ष्म उद्योगों के लिए अनुकुल वातावरण है। यहां प्रदेश में सर्वाधिक 105 प्रकार की फसलें बोई जाती है। इसमें प्रदेश में सबसे ज्यादा रकबा औषधीय मसला एवं उद्यानिकी फसलों का है। यहां तेरह हजार हैक्टेयर क्षेत्र में तो केवल संतरा ही है। इसके अलावा तुलसी, कालमेघ, अश्वगंधा, सफेद मूसली, लहसुन, इसबगोल, जैसी अतिमहत्वपूर्ण फसलें 50 हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बोई जाती है। जिले में गांधीसागर बांध के कारण पर्याप्त पानी है। यहां जिले के सभी प्रमुख तहसील क्षेत्रों में चंबल से पानी लाने की जल आर्वद्धन योजना या तो पूर्णहो चुकी है या चल रही है।

यह बताएंगे निवेशक को
यहां 24 घंटे बिजली, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से पूरा मंदसौर-नीमच जिला मुख्य मार्गों से भी जुड़ा है। मुंबई-दिल्ली रेलमार्ग भी जिले से गुजर रहा है। शासन के पास उद्योग स्थापित करने के लिए पर्याप्त जमीन भी है। और उसे विकसित करने के तमाम संसाधन भी। यह तमाम बाते प्रोजेक्टर, प्रदर्शनी तथा विषय विशेषज्ञों के माध्यम से निवेशकों को बताएंगे। खासतौर पर औषधीय एवं मसला फसलों पर आधारित लघु उद्योगों तथा संतरे के बगीचों पर आधारित फू्रट प्रोसेसिंग प्लांट लगाने पर ज्यादा जोर होगा। उल्लेखनीय हैकि गुणवत्ता के मान से जिले की लहसुन, इसबगोल, अश्वगंधा देश ही नहीं विदेशों में भी ख्याति रखती है।

देते है यह जानकारी
विभाग के अनुसार मध्यप्रदेश भूमि आंवटन अधिनियम के तहत इनीशेंट ऑनलाइन अप्रोज ऑनलाइन उद्योग खोलने वाले आवेदक को करना पड़ती है। इसमें कौन सौ उद्योग, कितनी लागत, मशीनों का पूरा इस्टीमेंट, जमीन की जगह, ऋण की व्यवस्था सहित अन्य जानकारी दी जाती है।
-ऑनलाइन आवेदन के बाद उद्योग विद्याग के अधिकारी उसे क्लियर करते है।
-उसके बाद अधिकारी संबंधित उद्योग के लिए कितनी जमीन है उसका निर्धारण करते है।
-जमीन का निर्धारण कर प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर जमीन की प्रीमियम लेते है।
-प्रीमियम लेने के बाद लीज दी जाती है।कुल जिले में उद्योगजिले में कुल दस मझले उद्योग हैं। जिनमें पांच प्लांट सोयाबीन तेल के है। इसके अलावा स्टार्च फैक्ट्री, विशेष धागा बनाने की फैक्ट्री, रेलवे पटरियों के लिए स्लीपर बनाने की फैक्ट्री सहित कुल 150 उद्योग है। हांलाकि उद्योग विभाग के यह आंकड़े हकीकत में बंया नहीं कर रहे है। इनमें करीब साठ से सत्तर फैक्ट्रियां बंद पड़ी है। उद्योग विभाग मेेंं पंद्रह फैक्ट्रियों बंद करने के अनुमति मांगी है।

फैक्ट फाईल
इन्वेस्टर्स समिट- भोपाल
कब से कब तक- 22 अक्टूबर से 23अक्टूबर तक
जमीन- गरोठ एवं जग्गाखेड़ी
गरेाठ में कितनी- करीब 35 प्लाट
जिले से जाएंगे- उद्योग विभाग के महाप्रबंधक
मंत्रालय- सुक्ष्म लघु उद्योग
मझले और छोटे उद्योगो की संख्या-10
छोटे उद्योगों की संख्या-150
(समस्त जानकारी उद्योग विभाग से प्राप्त) उद्योगों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी

जानकारी भी भेज दी
22 अक्टूबर को इन्वेस्टर समिट है। समिट में जिले के उद्योगों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके अलावा उद्योगपतियों को रेल, पानी और श्रमिक की व्यवस्था की जानकारी भी भेज दी गई है।
राजेश गार्गव, महाप्रबंधक उद्योग विभाग

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