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मंदसौर पान की खुशबू दिल्ली, मेरठ, आगरा तक जाती है

मंदसौर। अरावली पर्वतमाला की तलहटी में चेनपुरिया से लेकर भरतिया खेड़ी (भानपुरा) के सीमित क्षेत्र में पान की खेती सूर्यवंशी कुमरावत तंबोली समाज के परिवारों द्वारा सालों से की जा रही है। यहां के पान दिल्ली, मेरठ व आगरा के पान शौकिनो को लुभाते है। इन दिनों नए पान बरेजों में पान की कलम लगाने का कार्य पान कृषकों द्वारा किया जा रहा है। साथ ही पुराने बरेजों से पान कलम निकालने का कार्य भी जारी है। उल्लेखनीय है कि पान की खेती संवेदनशील होने के कारण पान कृषकों को इस खेती के लिए बांस, बल्लियों सहित सरिये आदि के कई इंतजाम करना होते है। साथ ही नए पान बरेजा में लगने वाली पान कलम की परवरिश भी एक बच्चे की तरह की जाती है।

 

मध्य मार्च से अप्रैल माह का प्रथम सप्ताह अनुकूल

नए पान बरेजों में पान कलम लगाने का उपयुक्त समय मध्य मार्च से लेकर अप्रैल माह का प्रथम सप्ताह अनुकूल रहता है। पान कलम लगाने का कार्य मौसम पर भी निर्भर करता है। पूर्व से तैयार बरेजों में पान कलम लगाने का समय सुबह और शाम के समय लगाया जाना पान कृषकों द्वारा उपयुक्त समझा जाता है और सबसे अधिक पान कलमें सुबह के समय ही लगाई जाती है। पान कलम लगाने का कार्य पहले परिजनों द्वारा किया जाता था। लेकिन अब यह कार्य पारंगत मजदूरों से कराया जाने लगा है।

6 फीट की दूरी के बीच 50 कलमें
पान कृषक प्रेमराज पहाडिय़ा, लेखराज मंडकरिया, राधेश्याम भाना, राजेश मरमट आदि ने बताया कि नए पान बरेजों में पान की कलम कतारबद्ध तरीके से लाइन के रूप में लगाई जाती है। जिसमं प्रति लाइन की चौड़ाई 2 फीट 8 इंच हाती है। और लंबाई कृषक अपनी आवश्यकतानुसार रखते है। इन लाइनों में 6-6 फीट की दूरी पर बल्लियां और बांस लगे होते है। इस 6 फीट के दायरे में पान की 50 कलमें लगाई जाती है।

मिट्टी में दबाकर घांस से ढ़ंक देते है
पान कृषकों ने यह भी बताया कि पान कलम में एक पान और 4 से 6 इंच की लंबाई वाली बेल का हिस्सा होता है। पान कलम लगाते समय बेल का हिस्सा मिट्टी में अच्छी तरह दबा दिया जाता है। साथ ही कलम को घांस से ढ़ंक दिया जाता है। सप्ताह भर तक इन कलमों पर दिन में 10 से 15 बार पानी का छिड़काव किया जाता है। दिन बितने के साथ पानी का छिड़काव भी बढ़ता जाता है। कलम लगाने से पूर्व पुराने बरेजों से पान कलम कटिंग की जाकर कृषकों द्वारा संग्रहित कर ली जाती है। जिन्हे 4 से 8 दिनों के बीच नए बरेजों में रोप दी जाती है। एक माह में कलम से अंकुल फुटकर बेल के रूप में मिट्टी से बाहर आने लगता है।

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