Breaking News

मंदसौर भी आया कोहरे के कहर में

मंदसौर। मंदसौर की सुबह सर्दी और कोहरे से हो रही है। मंगलवार को न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो कि सामान्य है, वहीं आज भी मौसम का हाल कुछ ऐसा ही है। जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में बर्फबारी का नया दौर शुरू हुआ है, जबकि दिसम्बर में भी इन तीनों राज्यों पर आसमान से खूब गिरी थी। जनवरी के पहले ही हफ्ते में फिर बर्फबारी शुरू हो गई। उत्तर भारत से चली शीतलहर का असर मंगलवार को शहर पर दिखा। शहर में इस सीजन का घना कोहरा पहली बार छाया। इस दौरान रात का तापमान 1.1 डिग्री कम होकर 6.4 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं दिन का तापमान भी 1.7 डिग्री की गिरावट के साथ 24.0 डिग्री दर्ज किया गया। सुबह नौ बजे तक शहर में सभी तरफ कोहरा छाया रहा। खासकर शिवना नदी व तेलिया तालाब के आसपास के क्षेत्रों में घना कोहरा रहा। सूर्य कोहरे से संघर्ष कर सुबह नौ बजे बाद ही निकल पाया। हालांकि दिन में धूप होने से ठंड से आंशिक राहत मिली।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर भारत और पूर्वी भारत के कई इलाकों में घने कोहरे के चलते जीरो विजिबिलिटी के हालात पैदा हो सकते हैं. मौसम विज्ञान की भाषा में जीरो विजिबिलिटी उस स्थिति को कहते हैं जब कोहरे के चलते दृश्यता 50 मीटर से कम हो जाती है.

इस तरह उतार-चढ़ाव हो रहा तापमान में

दिनांक न्यूनतम अधिकतम

1 जनवरी 5.2 23.0

2 जनवरी 5.0 23.2

3 जनवरी 7.7 26.4

4 जनवरी 7.0 25.5

5 जनवरी 8.0 25.2

6 जनवरी 7.0 26.2

7 जनवरी 7.5 26.3

8 जनवरी 6.4 24.0

 

अंचल में भी घना कोहरा अलाव लगाकर तापने को मजबूर लोग

मंगलवार सुबह घना कोहरा छाया रहा है। इस ठंड में पहली बार इतना कोहरा था कि सड़क पर व गांव में आसपास के घर भी नहीं दिख रहे थे। सुबह से ही लोग अलाव जलाकर अलाव का सहारा ले रहे थे सुबह नौ बजे तक लोगों ने अलाव नहीं छोड़े। इस कोहरे से पशु भी पूरी तरह से ठिठुर गए। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों का कहना है कि कोहरा होने से फसलों को भी नुकसान होता है।

 

फसलों को नुकसान

मंगलवार को छाए कोहरे एवं ठंड से फसलों पर फिर से नुकसान होने की आशंका ग्रामीणों ने जताई है। लगातार दो दिन से तापमान में गिरावट आने से फसलों को फिर से नुकसान हुआ है। पहले भी फसलों पर जमी बर्फ से पाला गिरने से बहुत नुकसान हुआ और अब कोहरे से फूल मुरझा गए। इससे किसानों को बहुत नुकसान हो रहा है। मंगलवार सुबह भी फसलों पर ओस की बूंदें जम गईं। ऐसा लग रहा था कि फसलों पर सफेद चादर बिछ गई हो।

घने कोहरे से बचने के लिए करें ये उपाय, नहीं होगी दुर्घटना

ठंड में को हरे बढ़ने के वजह से हर रोज हजारों हादसें होते हैं जिनमें कितनी जानें चली जातीं हैं। ऐसे धुंध और कोहरे के मौसम में सुरक्षित ड्राइविंग करना बेहद जरूरी है। इससे आप न केवल सड़क हादसे कम कर सकते हैं बल्कि ऐसा करके लोगों का जीवन भी बचाया जा सकता है। तो ऐसे में आपकों इन बातों का खास ख्याल रखकर घने कोहरे में भी सुरक्षित ड्राइविंग कर सकते हैं।

लो बीम पर रखें हेडलाइट
गाड़ी की हेडलाइट्स को हाई बीम पर रखने की बजाय लो बीम पर रखें. ऐसा करने से आपको देखने में आसानी होगी और सामने वाले को भी गाड़ी की सही स्थ‍िति का पता चल पाएगा। प्रदूषण से 40 प्रतिशत तक गले और सांस की तकलीफ के मरीज की संख्या बढ़ गई है।
लाइन में चलाएं गाड़ियां
कोहरा घना हो तो सड़क के बाएं किनारे को देखकर गाड़ी ड्राइव करें। इसका लाभ यह होगा कि बिना किसी भटकाव के आपकी गाड़ी सीधी लाइन में चलती रहेगी।
पीली लाइट को फॉलो करें 
गाड़ी ड्राइव करने वाले व्यक्त‍ि की आसानी के लिए सड़कों पर पीली लाइट लगाई जाती है। आप इसे फॉलो करें। इसकी मदद से आप कोहरे में भी आसानी से ड्राइविंग कर सकते हैं।

दूरी का रखें ध्यान
कोहरे में दुर्घटना से बचने के लिए यह जरूरी है कि आप सामने वाली गाड़ी से एक निश्चित दूरी बनाकर रखें. दरअसल, कोहरे में सड़कें गीली होती हैं, इसलिए संभव है कि जब तक आप ब्रेक लगाएं, तब तक आपकी गाड़ी, दूसरी गाड़ी से टकरा जाए. इसलिए यह जरूरी है कि आप दूरी का ख्याल रखें.
इंडिकेटर
आपको गाड़ी आगे कहीं से मोड़नी है तो उसके लिए पहले से ही इंडिकेटर देना शुरू कर दें। मोड़ के आने पर इंडिकेटर न दें और न ही बिना इंडिकेटर दिए मुड़ें। इससे एक्सीडेंट की आशंका बढ़ जाती है।
फॉग लाइट का लें सहारा
घने कोहरे में हेडलाइट के साथ फॉग लाइट जलाना न भूलें। यह धुंध काटने में मददगार साबित होता है। कुछ लोग धुंध में सिर्फ फॉग लाइट का सहारा लेते हैं। ये भी गलत है। दूर से आने वाले लोगों को फॉग लाइट दिखाई नहीं देती। इसलिए हेडलाइट्स बंद करके सिर्फ फॉग लाइट से काम न चलाएं।
स्पीड पर रखें कंट्रोल
कोहरे में रैश ड्राइविंग या तेज ड्राइ‍विंग न करें. स्पीड को कंट्रोल में रखते हुए गाड़ी की गति धीमी रखें। इससे आप और दूसरे भी सुरक्षति रहेंगे। ये बात भी गौर करने वाली है कि गाड़ी ड्राइव करते हुए आप ओवरटेक करने की कोशिश न करें। दूसरी गाडि़यों से दूरी बनाकर रखें।

सर्दी का कोहराम, जाने कैसे बनता है यह कोहरा

शहर में ठिठुरा देने वाली सर्दी का सितम जारी है। कोहरे, सर्द हवाओं और सिहराने वाली ठंड के बाद मंगलवार अल सुबह शहर में हुई बारिश ने और ठिठुरा दिया। आसमान पर बादल दिनभर डेरा डाले रहे। कभी रिमझिम बरसे तो कभी झमाझम। दिनभर सूरज दिखाई नहीं दिया। शाम को पूरे शहर को घने कोहरे ने अपने आगोश में ले लिया। मंगलवार को इस सीजन का सबसे घना कोहरा रहा, जिसमें विजिबिलिटी 20-30 मीटर ही रह गई।
सड़कों पर वाहन चालकों को हैड लाइट जलाना पड़ी। पीली कोठी से खेल परिसर, नगर निगम, गल्र्स कॉलेज से परकोटा होते हुए तीन बत्ती तक जाने वाले मार्ग पर शाम 5.20 बजे वाहनों की लाइट घने कोहरे को चीरते हुए नजर आ रही थीं। संजय ड्राइव रोड पर मौसम का लुत्फ उठाने आए कुछ युवक सेल्फी ले रहे थे।
 
रेल व सड़क यातायात प्रभावित
रेलवे ने बीना जंक्शन से होकर गुजरने वाली कई ट्रेनें रद्द कर दीं। कुछ ट्रेनें पांच से लेकर दो घंटे तक देरी से आईं। शाम को मुख्य बस स्टैंड से भोपाल, इंदौर, छतरपुर, जबलपुर, नागपुर की ओर आने-जाने बसें भी कुछ देरी से चलीं।
एेसे बनता है कोहरा
कोहरे को अंग्रेजी में फॉग कहते हैं, जो प्राय: ठंडी आद्र्र हवा में बनता है। इसके अस्तित्व में आने की प्रक्रिया बादलों जैसी ही होती है। गर्म हवा की अपेक्षा ठंडी हवा अधिक नमी लेने में सक्षम होती है और वाष्पन द्वारा यह नमी ग्रहण करती है। ये वह बादल होता है जो जमीन के निकट बनता है। यानी, एक बादल का वह भाग जो जमीन के ऊपर हवा में ठहरा हुआ हो, कोहरा नहीं होता बल्कि बादल का वह भाग जो ऊपरी जमीन के संपर्क में आता है, कोहरा कहलाता है।
 
कोहरा कई अन्य तरीकों से भी बनता है। लेकिन अधिकांश कोहरे दो श्रेणियों क्रमश: एडवेक्शन कोहरा और रेडिएशन कोहरा में बदल जाते हैं। दोनों ही प्रकार में कोहरा आम हवा से अधिक ठंडा महसूस होता है। ऐसा उसमें भरी हुई नमी के कणों के कारण होता है। 200 मीटर दूरी पर भी बहुत धुंधला दिखाई देता है।
 
तापमान 
न्यूनतम 13 डिग्री सेल्सियस 
अधिकतम 16.1 डिग्री सेल्सियस 
24 घंटे में 18.8 मिमी बारिश
एडवेक्शन कोहरा
यह तब बनता है, जब गर्म हवा का एक विशेष हिस्सा किसी नम स्थान के ऊपर पहुंचता है। कई बार कोहरा काफी घना भी होता है, जिससे दूर देखने में परेशानी होती है। समुद्र किनारे रहने वाले लोग एडवेक्शन कोहरे से परिचित होते हैं।
रेडिएशन कोहरा
यह तब बनता है, जब जमीन की ऊपरी परत ठंडी होती है। ऐसा प्राय: शाम के समय होता है। जमीन की ऊपरी परत ठंडी होने के साथ ही हवा भी ठंडी हो जाती है, जिस कारण कोहरा उपजता है।
पहाड़ी व घाटियों पर
कोहरा कई पहाड़ी, घाटियों में भी छाता है। वहां ऊपरी गर्म हवा ठंडी हवा को जमीन के निकट रखती है। ऐसा कोहरा प्राय: सुबह के समय होता है। सूरज निकलने के बाद ठंडी हवा गर्म होती है और ऊपर उठती है। इसके बाद से कोहरा छंटना शुरू हो जाता है।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts