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मंदसौर में दी इस जान लेवा बीमारी ने दस्तक

मंदसौर। जानलेवा बुखार स्क्रब टाइफस को लेकर जिले में अलर्ट जारी कि या गया है। नीमच व रतलाम की तुलना में मंदसौर में सर्वाधिक 53 पॉजीटिव मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति है। स्क्रब टाइफस की रोकथाम के लिए अब विभाग ने प्रयास तेज कर दिए हैं।

शुक्रवार को आईडीएसपी यूनिट की राज्य स्तरीय टीम मंदसौर पहुंची। जिला अस्पताल में आईडीएसपी, मलेरिया अमले सहित चिकित्सकों की बैठक ली। स्क्रब टाइफस को रोकने के लिए कि ए जा रहे कार्यों की समीक्षा कर विभाग के अधिकारियों एवं चिकि त्सकों को चूहों पर नियंत्रण करने के निर्देश दिए। बाद में टीम ने तीन गांवों में भ्रमण कि या। बुखार से पीड़ित लोगों का स्वास्थ्य जांचा। लोगों को स्क्रब टाइफस से बचने के उपाय बताए। मलेरिया अमले को भी सभी मरीजों की स्लाइड बनाने के निर्देश दिए।

जिले में इस साल तेजी से फै ले स्क्रब टाइफस की जकड़ में अब तक 53 लोग आ गए। इसके अलावा ही रतलाम में 8 एवं नीमच में 2 पॉजीटिव मिलकर आंकड़ा 63 पर पहुंच चुका है। मंदसौर में प्रतिदिन स्क्रब टाइफस पॉजीटिव मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को गंभीर मानते हुए रोकथाम के प्रयास शुरू कि ए हैं। चूहों के पिस्सूओं से फै लने वाली इस बीमारी को रोकने के लिए चूहों पर कंट्रोल करने के उपाय कि ए जा रहे हैं। जिले में अलर्ट भी जारी कि या गया है।

भोपाल से आईडीएसपी का दल मंदसौर पहुंचा। इनमें उप संचालक डॉ. प्रमोद गोयल, स्टेट सर्विलेंस डॉ. शीला मीना एवं शैलेंधसिंह शामिल है। राज्य स्तरीय दल ने शुक्रवार सुबह जिला अस्पताल में चिकित्सकों एवं आईडीएसपी, मलेरिया अमले के साथ बैठक की। स्क्रब टाइफस और मलेरिया के बढ़ने के कारणों को समीक्षा की। मलेरिया अमले को गड्ढों में भरे पानी मच्छरों के उत्पन्न होने से रोकने, लार्वा व फिवर सर्वे लगातार जारी रखने एवं सभी मरीजों की स्लाइड बनाकर मलेरिया की जांच करने के निर्देश दिए।

गांवों में पहुुंचकर देखी स्थिति

राज्य स्तरीय टीम ने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक के बाद ग्राम कोटड़ी, मेलखेड़ा एवं चंदवासा में पहुंचकर स्थिति देखी। अधिकारियों ने लोगों से स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी ली। चंदवासा में पांच वर्षीय बालक के शरीर पर लाल धब्बे होने पर उसके पेट व पीठ को देखा। जांच कर दवाइयां दी गई। इस दौरान ग्रामीणों को स्क्रब टाइफस के बचाव के संबंध में समझाइश देते हुए बताया कि अपने घरों में चूहे हों तो उन्हें पकड़े पिंजरे लगाकर रखे। यह कोशिश की जाए कि चूहे घर में घुसे। झाडिय़ों या घास में जाने के दौरान भी सावधानी रखे। सिर दर्द, बदन दर्द, सर्दी, जुखाम कु छ भी शिकायत होने पर घर पर नहीं बैठे सीधे डॉक्टर के पास जाए।

स्क्रब टाइफस के रोगी कैसे है

बैठक में भोपाल के दल ने स्क्रब टाइफस को रोकने के उपाय बताए। बढ़ने के कारणों को भी जाना। इस दौरान आईडीएसपी यूनिट मंदसौर के प्रभारी महेश धनोतिया ने तारीख दर तारीख जानकारी प्रस्तुत की। 53 पॉजीटिव के स की जानकारी दी। इस दौरान दल के अधिकारियों ने पूछा कि पॉजीटिव मरीज कै से है। रिपोर्ट प्रस्तुत कर बताया गया कि 53 में से 48 पूरी तरह से स्वस्थ है, बाकी का उपचार चल रहा है। स्क्रब टाइफस मरीजों की बेहतर के यर को लेकर अधिकारियों ने मंदसौर आईडीएसपी यूनिट के कार्य पर संतोष जताया।

रोकथाम के कर रहे प्रयास

-स्क्रब टाइफस की रोकथाम के लिए लगातार प्रयास कि ए जा रहे हैं। राज्य स्तरीय दल ने बैठक में आवश्यक उपाय बताए है। स्क्रब टाइफस कु छ दिनों से जिले में थम गया है। दल ने मेलखेड़ा सहित कु छ गांवों में पहुंचकर सर्वे कि या है। लोगों को बचाव के उपाय बताए गए। प्रभावित गांवों में हम भी विशेष सतर्कता बरत रहे है। चूहों पर कंट्रोल करने के भी प्रयास कि ए जा रहे है। -डॉ. महेश मालवीय, सीएमएचओ, मंदसौर

 

स्क्रब टाइफस के बारे में ये बातें जानते हैं क्या आप?

आज कल स्क्रब टाइफस नाम की बीमारी के कई मामले सामने आ रहे हैं। पिस्सुओं के काटने से होने वाली इस बीमारी में भी डेंगू की तरह प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती है। यह खुद तो संक्रामक नहीं लेकिन इसकी वजह से शरीर के कई अंगों में संक्रमण फैलने लगता है।

आज कल स्क्रब टाइफस नाम की बीमारी के कई मामले सामने आ रहे हैं। पिस्सुओं के काटने से होने वाली इस बीमारी में भी डेंगू की तरह प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती है। यह खुद तो संक्रामक नहीं लेकिन इसकी वजह से शरीर के कई अंगों में संक्रमण फैलने लगता है।

कैसे फैलता है : पिस्सू के काटते ही उसके लार में मौजूद एक खतरनाक जीवाणु रिक्टशिया सुसुगामुशी मनुष्य के रक्त में फैल जाता है। सुसुगामुशी दो शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है सुसुगा : छोटा व खतरनाक और मुशी मतलब माइट।  इसकी वजह से लिवर, दिमाग व फेफड़ों में कई तरह के संक्रमण होने लगते हैं और मरीज मल्टी ऑर्गन डिसऑर्डर के स्टेज में पहुंच जाता है।
इन्हें ज्यादा खतरा : पहाड़ी इलाके, जंगल और खेतों के आस-पास ये पिस्सू ज्यादा पाए जाते हैं। लेकिन शहरों में भी बारिश के मौसम में जंगली पौधे या घने घास के पास इस पिस्सू के काटने का खतरा रहता है।

लक्षणों को पहचानें : पिस्सू के काटने के दो हफ्ते के अंदर मरीज को तेज बुखार (102-103 डिग्री फारेनहाइट), सिरदर्द, खांसी, मांसपेशियों में दर्द व शरीर में कमजोरी आने लगती है। पिस्सू के काटने वाली जगह पर फफोलेनुमा काली पपड़ी जैसा निशान दिखता है। इसका समय रहते इलाज न हो तो रोग गंभीर होकर निमोनिया का रूप ले सकता है। कुछ मरीजों में लिवर व किडनी ठीक से काम नहीं कर पाते जिससे वह बेहोशी की हालत में चला जाता है। रोग की गंभीरता के अनुरूप प्लेटलेट्स की संख्या भी कम होने लगती है।

ऐसे करें इलाज
लक्षण व पिस्सू द्वारा काटने के निशान को देखकर रोग की पहचान होती है। ब्लड टेस्ट के जरिए सीबीसी काउंट व लिवर फंक्शनिंग टेस्ट करते हैं। एलाइजा टेस्ट व इम्युनोफ्लोरेसेंस टेस्ट से स्क्रब टाइफस एंटीबॉडीज का पता लगाते हैं। इसके लिए 7-14 दिनों तक दवाओं का कोर्स चलता है। इस दौरान मरीज कम तला-भुना व लिक्विड डाइट लें। कमजोर इम्युनिटी या जिन लोगों के घर के आसपास यह बीमारी फैली हुई है उन्हें डॉक्टर हफ्ते में एक बार प्रिवेंटिव दवा भी देते हैं।

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