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मंदसौर में पानी के बाद अब हवा-सूरज से भी बन रही बिजली

जिला अभी तक गांधीसागर बांध से बिजली उत्पादन के लिए ही प्रदेश में जाना जाता था, पर अब इसकी पहचान पवन व सोलर ऊर्जा से बिजली पैदान करने वाले प्रमुख जिले में होने लगी है। मालवा क्षेत्र का यह पहला जिला है जहां हवा-पानी के साथ सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन हो रहा है। सुखद बात यह है कि जो पहाडिय़ां कोई काम नहीं आ रही थी, अब वही पहाडिय़ां बेशकीमती हो गईहै। इसके अलावा नीमच सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में कदम बढ़ा रहा है तो रतलाम पवन व सोलर ऊर्जा प्रोजेक्ट से बिजली बनाने लगा है। अकेले केवल मंदसौर जिले में वर्तमान में 15 पवनऊर्जा प्रोजेक्ट से 457 मेगावाट बिजली पैदा कर रहा है। वहीं सोलर ऊर्जासे वर्तमान में 122 मेगावाट बिजली उत्पादित हो रही है। वहीं गांधीसागर बांध से 115 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।
अक्षय ऊर्जा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मंदसौर में वर्तमान में 15 प्रोजेक्ट पवन ऊर्जाके है। यह पवन चक्कियां 457 मेेगावाट बिजली उत्पादन करने की क्षमता रखती है। सबकुछ ठीक रहा तो डेढ साल के भीतर तीन पवन ऊर्जाप्लांट और तैयार हो जाएंगे। ऐसे में संभावना हैकि कुल 18 प्रोजेक्ट से 1040.4 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता जिले की हो जाएगी। यहां वर्तमान में सोलर ऊर्जा के 8 प्रोजेक्ट 122 मेगावाट बिजली उत्पादित कर रहे है। नेशनल थर्मल पॉवर कारपोरेशन ने रुनिजा-गुजरखेड़ी गांव में 250 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाने का कार्यशुरु किया है। अप्रेल-2017 तक यह प्लांट बिजली बनाना शुरु कर देगा। इसके अलावा तीन सोलर प्लांट से 18 मेगावाट बिजली और उत्पादित होगी।

ऊर्जा प्लांट निर्माणाधीन
जिले में सौर ऊर्जा से बिजली पैदा करने के लिए काफी उजली संभावना है। जिले के लदूना, छोटी पतलासी व नलखेड़ा में करीब 145 मेगावाट के सौर ऊर्जा बिजली संयंत्र लगाए जाएंगे। इसके अलावा नीमच के कराडिय़ा महाराज में 5 मेगावाट व 24 मेगावाट के 2 प्लांट लगेंगे। वहीं रतलाम जिले के गोयल व कमलाखेड़ी गांव में 30 मेगावाट के प्लांट लगाए जाना है। जावद तहसील के सूठोली गांव में 25 मेगावाट का सौर ऊर्जा प्लांट निर्माणाधीन है।

मगरे से किसान हो रहे मालामाल
छोटी-छोटी पहाडिय़ां, जिन्हें मालवा क्षेत्र में मगरा कहा जाता है, पर किसानों की जमीन से केवल बारिश में ही एक फसल किसान ले पाते है, यह फसल भी मौसम व अच्छी बारिश पर निर्भर होती है। यहीं कारण है कि कुछ साल पहले तक मगरे की जमीन को खरीदने के लिए हजारों रुपए बीघा में भी खरीदार मुश्किल से मिलते थे, अब पवन ऊर्जा से बिजली बनाने वाली कंपनियां इन जमीन को 1 से 2.5 लाख रुपए प्रति बीघा के मान तक खरीद चुकी है। इसके बाद भी कई किसानों ने अपनी थोड़ी जमीन ही बेची है, ऐसे में बिजली कंपनियां अपने प्लांट की सुरक्षा के लिए पड़ोसी किसानों को ही नौकरी पर रख रही है, या उन्हें निगरानी के लिए निश्चित रकम दे रही है।

नीमच व रतलाम भी उगल रहा बिजली
रतलाम जिले में अभी तक 23 पवन ऊर्जा संयंत्र लगे है। इससे 536.85 मेगावाट बिजली उत्पादित हो सकती है। वहीं यहां सोलर ऊर्जाके दो प्रोजेक्ट से 50 मेगावाट बिजली तक पैदा हो रही है। अधिकारियों के मुताबिक 1 साल में करीब 300 दिन सोलर ऊर्जा से बिजली बनती है। वहीं पवन ऊर्जाप्लांट से सर्वाधिक बिजली मार्चसे जुलाईमाह के बीच उत्पादित होती है। मंदसौर में शामगढ़ व बेहपुर क्षेत्र में अधिकांश पवन ऊर्जा सयंत्र लगे है। इनमें दोनो जगह दो बड़े सयंत्र स्थापित है, जिनकी क्षमता 100-100 मेगावाट की है। वहीं नीमच में भगवानपुरा गांव में सोलर ऊर्जा से बिजली बनाने का 130 मेगावाट क्षमता का सयंत्र लगा है।

फैक्ट फाइल
मंदसौर जिले में पवन ऊर्जा संयंत्र 15
रतलाम जिले में पवन ऊर्जा संयंत्र 23
मंदसौर जिले में सौर ऊर्जा संयंत्र 08
नीमच जिले में सौर ऊर्जा संयंत्र 02
रतलाम जिले में सौर ऊर्जा संयंत्र 02

संयंत्रो के फायदे
करोड़ो का निवेश।
स्थानीय लोगों को रोजगार।
प्रदेश में बिजली उत्पादन के मामले में विशिष्ठ पहचान।
किसानों की बंजर जमीन का उचित दाम।
जिले से बिजली का निर्यात।
एक मेगावाट संयंत्र पर खर्च होते है 6 करोड
निजी बिजली कंपनियों के प्रबंधकों की मानें तो एक मेगावाट विंड एनर्जी संयंत्र को लगाने में करीब 6 से 7 करोड की लागत आती है। इससे प्रतिवर्ष 15 से 20 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन हो सकता है, चूंकि मंदसौर और रतलाम जिले में हवा का दबाव ज्यादा है और यहां कि पहाडिय़ों पर विंड एनर्जी के लिए पर्याप्त हवा का दबाव मिलता है। यहीं कारण है कि निजी बिजली कंपनियां इन क्षेत्रों में संयंत्र लगा रही है।

बेहतर वातावरण है
मंदसौर व रतलाम में पवन ऊर्जा से बिजली बनाने के लिए बेहतर वातावरण है। यही वजह है कि अनेक बिजली कंपनियों ने विंड एनर्जी पॉवर स्टेशन लगाने में रुचि दिखाई है। मंदसौर व रतलाम में बिजली उत्पादन शुरु भी कर दिया है। वर्तमान में तीनो जिलो में पवन व सौर ऊर्जा से करीब 1338 मेगावाट बिजली उत्पादित हो रही है। अप्रेल में यह बढ़कर करीब 1600 मेगावाट बिजली उत्पादित होने की क्षमता हो जाएगी। प्रदेश में मंदसौर ही ऐसा जिला है जो जल, हवा व सूर्य से बिजली उत्पादित कर रहा है।
– एसवी बजाज, अक्षय ऊर्जा अधिकारी, मप्र ऊर्जा विकास निगम, मंदसौर-नीमच-रतलाम

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