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मंदसौर में मानवता हो रही है शर्मसार – फिर मिला नवजात का भ्रूण

शहर में अनेक सोनोग्रफी जांच सेंटर हैं। शहर में लगातार इस तरह के भ्रूण मिल रहे हैं। सोनोग्राफी सेंटरों पर दिखावे के लिए ट्रैकर तो है, लेकिन वे कितना काम कर रहे है इसकी जांच समय-समय पर नहीं हो रही है। इस तरह से भू्रण का मिलना ही पीसीपीएंडटी एक्ट का सीधा उल्लंघन साफ नजर आ रहा है। इसके लिए जिला समिति बनी हुई है, लेकिन समिति ने अब तक क्या व कितना काम किया इस बारे में जानकारी सामने नहीं आई है।
अवैध अबॉर्शन हो रहे
लगातार भ्रूण मिलने की घटनाओं ने ये तो साफ कर दिया हैं कि जिले में खुले रुप से अवैध अबॉर्शन हो रहे है। इसके लिए बनी विभिन्न समितियां काम नहीं कर रही है व इस मिलीभगत के खेल में सभी शामिल है। पीसीपीएंडटी एक्ट होने के बाद सोनोग्राफी सेंटरों पर ट्रैकर मशीन लगना है। ये लगी तो है, लेकिन इनकी मॉनिटरिंग नहीं हो रही है। समितियों को प्रत्येक माह इन सेंटर पर जाकर जांच करना होती है। इसके बाद वे अपनी रिपोर्ट सीएमएचओ को देते है। कागजों में तो इस प्रकार की समितियां काम करती नजर आती है, लेकिन हकीकत में ये मैदान से दूर होती है। इसकी वजह इस काम में सभी की मिलीभगत होती है।
पहले भी हुए है ये मामले
रतलाम रेंज के नीमच, मंदसौर व रतलाम में भू्रण मिलने की घटनाएं होती रहती है। रतलाम में तो कुछ वर्ष पूर्व नवजात बच्चों के कंकाल व हड्डीया बड़ी मात्रा में जमीन से निकली थी व ये मामला अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उजागर हुआ था। इसके बाद सख्ती तो आई, लेकिन अब तक इसमे बड़ी कार्रवाई स्थानीय रुप से स्वास्थ्य विभाग ने नहीं की है। मंदसौर में एक दिन पूर्व ही काजीचौक क्षेत्र में रोड किनारे नवजात मिला था। दो युवक नवजात को अस्पताल लेकर गए थे, जहां बच्चे को स्वस्थ बताया गया था। रात करीब 11.30 बजे बाद जब क्षेत्र के शाबाज, अशरफ, शाहिद घर जा रहे थे तब उनको बच्चे के रोने की आवाज आई थी। इसके बाद युवक पहले बच्चे को घर ले गए व दूध पिलाकर पहले पुलिस के पास व बाद में अस्पताल लेकर गए थे। इसके बाद सोमवार को फिर भ्रूण मिलने की घटना हुई।

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