मंदसौर रेप केस में कैसे और किसने खोला राज़ जाने!

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मंदसौर में सात साल की बच्ची के रेप की घटना से सिर्फ़ मंदसौर शहर नहीं, पूरा देश सकते में है. बच्ची का इलाज यहाँ से साढ़े चार घंटे की दूरी पर इंदौर शहर के एक बड़े सरकारी अस्पताल में चल रहा है. बलात्कार के बाद बच्ची के साथ बेरहम हिंसा भी हुई. शुरुआती दिनों में ऐसा लगा कि शायद उसकी जान नहीं बचेगी. लेकिन अब डॉक्टरों को उम्मीद है कि उसकी ज़िंदगी बचाई जा सकेगी. इस अपराध के बाद संदिग्धों तक पहुँचने में सोशल मीडिया और डिजिटल इंटेलिजेंस का बड़ा हाथ रहा है.

मामला और जाँच

मंदसौर शहर के एक स्कूल से सात साल की एक बच्ची 26 जून की दोपहर में बाहर निकली और उसकी तरफ किसी का भी ध्यान नहीं गया. स्कूल का सीसीटीवी कैमरा ख़राब पड़ा था और गेट के पास पर लगा सीसीटीवी कैमरा ख़राब होने के अलावा ग़लत दिशा में भी था. स्कूल की छुट्टी के तीन घंटे बाद तक जब बच्ची अपने घर नहीं पहुंची तब उसके पिता ने थाने में रिपोर्ट लिखवाई. लड़की के पिता ने शंका ज़ाहिर की थी कि हो सकता है वो 40 किलोमीटर दूर सीतामऊ कस्बे में किसी रिश्तेदार का यहाँ न चली गई हो. इस बीच पुलिस की 15 टीमों को हर तरफ़ भेजा जा रहा था, लेकिन सुराग कहीं से नहीं मिले. फिर पता चला कि बच्ची के परिवार ने पिछले कुछ दिनों में ज़मीन का एक सौदा किया था जिसकी रक़म एक करोड़ रुपए से ज़्यादा थी. अब जांच फ़िरौती और किडनैपिंग की तरफ़ झुक गई, लेकिन इसके भी सुराग नहीं मिल सके. बुधवार, 27 जून के दिन दोपहर में पुलिस के चार्ली मोबाइल स्क्वॉड को शहर के लक्ष्मण गेट इलाके के पास लहूलुहान हालत में ये बच्ची मिली थी.

 

उन्होंने बताया, “मैं सड़क पार खड़ा था. एक पल तो यक़ीन ही नहीं हुआ कि कोई इतनी छोटी-सी बच्ची को इस हालत में कैसे ला सकता है भला”. सदमे और दर्द में डूबी हुई बच्ची न तो कुछ बोल पा रही थी और न कुछ इशारे कर पा रही थी. शरीर पर दर्जन भर ज़ख्म थे और कपड़े ख़ून से सने हुए थे. एक तरफ़ बच्ची को इलाज के लिए ले जाया गया और दूसरी तरफ़ जांच अब कथित बलात्कार और हत्या की कोशिश पर मुड़ गई.

सीसीटीवी में संदिग्ध की तलाश

लेकिन उसे इस हाल में पहुँचाने वाले का कोई सुराग नहीं मिला. आखिरकार बुधवार रात एक ‘गुप्त प्रशासनिक मीटिंग’ में ये तय किया गया कि स्कूल के आसपास के पूरे इलाके में ये पता लगाया जाए कि सीसीटीवी फ़ुटेज किसके-किसके पास है. तमाम दुकानदारों से संपर्क किया गया और उनकी मदद ली गई. शहर में हमारी बात कई ऐसे लोगों से हुई जिन्होंने अपने-अपने फ़ुटेज जाकर पुलिस कंट्रोल रूम में सौंपी.

कुमार (नाम बदला हुआ) ने बताया, “मेरी दुकान के मुहाने पर सीसीटीवी पिछले साल ही लगा है. हमने तुरंत उस फ़ुटेज को निकाल कर भेजा था.”

घंटों फ़ुटेज की जांच के बाद आखिरकार तीन ऐसे वीडियो मिले जिसमें स्कूली यूनिफ़ॉर्म वाली एक बच्ची को किसी युवा व्यक्ति के पीछे जाते देखा गया था. ये केस में पहली सफलता थी, लेकिन प्रशासन उस युवक की पहचान कर सकने में नाक़ाम रहा क्योंकि उसका चेहरा साफ़ नहीं आया था, लेकिन उस युवक के जूतों के ब्रांड को साफ़ तौर से देखा जा सकता था. एक और योजना बनाई गई और इसमें प्रमुख सहारा लिया गया सोशल मीडिया का. इन तीनों सीसीटीवी क्लिपों को मंदसौर शहर में वायरल करने की कोशिश शुरू हुई इस उद्देश्य से कि कोई तो उस युवक को पहचान सकेगा. एक ही डर था जो बहुत खतरनाक़ साबित हो सकता था. शहर के लोग बताते हैं कि सोशल मीडिया पर इस बलात्कार की घटना को लेकर तमाम तरह के ‘दुष्प्रचार और भडक़ाऊ’ व्हाट्सएप मैसेज भी चल रहे थे. बात फैल चुकी थी कि ‘किसी बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला हुआ है और उसकी हालत नाज़ुक है.”

विकल्पों और समय की कमी थी

मामले पर राजनीतिक बयानबाज़ियाँ शुरू हो चुकी थीं और शहर में सद्भाव बनाए रखने का दबाव बढ़ रहा था. इस सब के बीच प्रशासन और जनता के प्रतिनिधियों ने सीसीटीवी फ़ुटेज पर सार्वजनिक मदद लेने की सोची. पुलिस प्रमुख मनोज कुमार सिंह और शहर के सामुदायिक नेताओं ने बताया है कि, “सीसीटीवी फ़ुटेज से संदिग्ध की शिनाख़्त के मामले में अप्रत्याशित सहयोग देखने को मिला.” हालांकि फ़ुटेज में दिखने वाले युवक की पहचान के बारे में भी क़रीब एक दर्जन लोगों के नाम आए.

दोबारा सहारा सोशल मीडिया का ही लिया गया. जांचकर्ताओं को डिजिटल एक्सपर्ट्स की मदद लेनी पड़ी और सभी लोगों के फ़ेसबुक अकाउंट्स को ढूँढा गया जिनके बारे में आम नागरिकों से सूचना आ रही थी. जिस प्रमुख अभियुक्त की अगले दिन गिरफ़्तारी हुई, उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर उन्हीं ब्रांड वाले स्पोर्ट्स के जूतों के साथ उसकी दो तस्वीरें भी मिलीं. पुलिस प्रमुख मनोज सिंह के मुताबिक़, “हिरासत में लिए जाने के बाद युवक ने पूरी घटना में शामिल होने की बात स्वीकार कर ली.

हालांकि जिन दो संदिग्धों को गिरफ़्तार किया गया है उनमें से एक के परिवार ने अपने बेटे को निर्दोष बताते हुए मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है. दोनों अभियुक्त फ़िलहाल पुलिस रिमांड पर हैं और मामले में अगला बड़ा और निर्णायक कदम यही हो सकता है कि पीड़ित बच्ची इलाज के बाद होश आने पर गिरफ़्तार संदिग्धों की पहचान कर सके.

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