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मंदसौर शहर में 4 सवारी बैठकर नाबालिग दौड़ा रहे वाहन

शहर में महू-नीमच राजमार्ग पर नाबालिग दर्शन मारू की वाहन दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया। 3 दिन तक जागरूकता अभियान चलाया व चालानी कार्रवाई की। अब वापस व्यवस्था पुराने ढर्रे पर लौट गई। शहर में रोज सैकड़ों नाबालिग दोपहिया वाहन दौड़ा रहे हैं। हादसे के बावजूद अभिभावक भी जागरूकता नहीं दिखा रहे। मामले में पुलिस-प्रशासन निरंतर अभियान चलाने व स्कूलों को पत्र जारी करने की बात कह रहा है।

किसी भी घटना के बाद शासन-प्रशासन हरकत में आता है। तीन दिन सड़कों पर अमला दिखता है और वापस व्यवस्था वही हो जाती है। लोग भी भूल जाते हैं। 2 दिसंबर को शहर में मेले से देररात घर लौटते समय नाबालिग दर्शन मारू व वेदांत शर्मा महू-नीमच राजमार्ग पर डिवाइडर से टकराकर घायल हो गए। इसमें से दर्शन की मौत भी हो गई। इसके बाद यातायात विभाग सक्रिय हुआ। शहर में जगह-जगह चालानी कार्रवाई की व बच्चों को रोककर वाहन ना चलाने की समझाइश दी। विभाग ने 3 से 4 दिन कार्रवाई व अभियान चलाकर जिम्मेदारियों को पूरा करने का प्रयास किया लेकिन ना बच्चे सुधर रहे ना बच्चों के पालक जिम्मेदारियों को समझ रहे हैं। शहर में सुबह-शाम सड़कों पर नाबालिग बच्चे तेज गति से 3-4 सवारियां बैठाकर दोपहिया वाहन दौड़ा रहे हैं। इन्हें पुलिस की कार्रवाई का भी डर नहीं है। पालक भी बच्चों को बिना कुछ सोचे-समझे वाहन उपलब्ध करा रहे हैं। विभाग के जिम्मेदार अब स्कूल प्राचार्यों को पत्र जारी करने व निरंतर अभियान शुरू करने की बात कह रहे हैं।

पालक बिना सोचे बच्चों को देते हैं वाहनों की चाबी
मामले में शहर के समाजसेवी व विभिन्न संगठनों से जुड़े सत्येंद्र सोम, देवेंद्र पौराणिक, महेश मिश्रा ने बताया कि मामले में पालकों की सबसे बड़ी गलती है। पालक बिना कुछ सोचे-समझे अपने बच्चों को वाहनों की चाबी दे देते हैं। कई पालक बच्चों के प्रेम में अंधे हो जाते हैं। शहर में कई पालकों ने तो अपने बच्चों को जरा-सी उम्र में हाईस्पीड स्पोट्र्स बाइक तक दिला देते हैं। जो शहर में तेज रफ्तार से वाहन दौड़ाते हैं। पर वह लोग इस बात को भूल जाते हैं कि कहीं अगला दर्शन उनके घर से ना हो।

नाबालिग की वजह से दूसरे होते हैं घायल
पौराणिक ने बताया कि नाबालिग कहीं भी वाहन चलाते हैं। बिना देखे कहीं भी वाहन घुसा देते हैं जिससे कई बार इनकी वजह से दूसरे लोग दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन को नियमानुसार पालकों को जेल जैसी सख्त कार्रवाई को अंजाम देना होगा तभी लोग समझ पाएंगे।

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