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मंदसौर शहर 191 कमरों की निगरानी के बावजूद अपराध मुक्त नहीं!

मंदसौर. शहर में अपराधियों पर नजर रखने के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे कम क्षमता के कारण नजर नहीं रख पा रहे है। अलग-अलग चौराहों से लेकर भीड़ वाले स्थानों पर पुलिस विभाग द्वारा करीब 191 कैमरे लगा रखे है। जो तीन अलग-अलग प्रकार के है। लेकिन सीमित क्षमता के कारण इन कैमरों की नजरों से बचने में कोई भी सफल हो रहा है। यही कारण है कि पिछले दिनों में शहर में नपाध्यक्ष की हुई हत्या के बाद इन कैमरों पर भी सवाल उठे थे। परिजनों ने भी सीधे सवाल खड़े किए थे कि जब इतने कैमरें लगे है तो आरोपी के भागने और इससे जुड़े फूटेज इसमें क्यों नहीं आए।

दरअसल, इन तीन प्रकार के कैमरों में जो सबसे अधिक कारगर माने जा रहे है। वह वाहनों के नंबर स्कैन करने वाले कैमरे है, लेकिन उनका झुकाव भी निश्चित कर रखा है। 45 डिग्री ही झुकाव फिक्स है। ऐसे में इन कैमरों के नीचे से निकलने वाले वाहन तो इसमें दिख सकते है, लेकिन आऊट साईड से निकलने वाले वाहन इसमें नहीं दिखते है। फिक्स लगे कैमरों से लेकर पीटीजेड वाले कैमरों की क्षमता भी कम है और वह अधिक दूरी तक की गतिविधियों को नहीं स्कैन कर सकते है। ऐसे में अपराधियों पर निगाह रखने और दूर तक की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उच्चस्तरीय क्षमता तथा अधिक दूर तक की गतिवधियों को कैद करने वाले कैमरों की आवश्यकता है।

36 स्थानों पर लगे 191 कैमरें
शहर में अलग-अलग स्थानों पर करीब 36 जगह पर 191 सीसीटीवी कैमरे लगे है। जो तीन प्रकार के है। इसमें से सिर्फ दो को छोडक़र सभी कैमरे चालू स्थिति में है। नालछा माता क्षेत्रके सिर्फ दो कैमरे तकनीकि कारणों के चलते बंद है। इसके अलावा शहरीय क्षेत्रके बाजार व चौराहों के साथ बायपास क्षेत्रके कैमरें चालू है। जिनसे कंट्रोल रुम से पुलिस पूरे शहर पर निगाह रख रही है। इसमें से ऑटो मेटेकिन नंबर प्लेट को स्कैन करने वाले कैमरे भी लगे है। लेकिन इसमें सिर्फ 45 डिग्री ही झुकाव तय कर रखा है। ऐसे में इसकी जद में आने वाले वाहन के नंबर तो यह कैमरें देख लेते है, लेकिन साईड से निकलने वाले वाहनों के नंबर पर इन कैमरों की निगाह नहीं पहुंचती है। इसके अलावा पीटीजेड कैमरे भी लगे है। इनकी रेंज 500 मीटर तक की ही होती है। इसके साथ ही फिक्स स्थानों पर भी २ मेगा पिक्सल के कैमरे लगे है। यह भी अपनी रेंज तक की गतिविधियों को कैद करते है। शहर में अनुमानित रुप से सीसीटीवी कैमरों का यह प्रोजेक्ट करीब 5 करोड़ तक का था।

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