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मंदसौर से गुजरेगी प्राकृतिक गैस की पाइप लाइन

प्रदेश के 16 जिलों में आने वाले समय में प्राकृतिक गैस की सप्लाई बेहतर हो सकेगी। यह संभव होगा आंध्रप्रदेश के मल्लावरम से राजस्थान के भीलवाड़ा तक बिछाई जाने वाली 1746 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन से, जिसका आधा हिस्सा मध्यप्रदेश से होकर गुजरेगा। पाइप लाइन के सिलसिले में जमीन आरक्षित करने के लिए राज्य सरकार ने जिला कलेक्टरों को भूमि सुुरक्षित करने के निर्देश दिए हैं। यह पाइप लाइन प्रदेश के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
जानकारी के अनुसार पेट्रोलियम और नेचुरल गैस रेग्यूलेटरी बोर्ड द्वारा गुजरात की जीएसपीएल इंडिया ट्रांसको लिमिटेड को लाइन बिछाने के लिए अधिकृत किया गया है। जीआईटीएल में गुजरात स्टेट पेट्रोनेट, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रो कॉरपोरेशन और भारत पेट्रोलियम लिमिटेड शामिल हैं। प्रदेश में कुल 885 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई जाना प्रस्तावित है। मंदसौर से गुजरेगी प्राकृतिक गैस की पाइप लाइन, उद्योगों, घरों व वाहनोें को मिलेगा वैकल्पिक ईंधन

एमओयू किया था साइन
मध्यप्रदेश सरकार ने 13 सितंबर 2012 को इंदौर में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट में जीआईटीएल के साथ ने 2 हजार 200 करोड़ के निवेश एमओयू साइन किया था। गैस पाइप लाइन से प्रभावित वन भूमि में वन संरक्षण अधिनियम-1980 के तहत अनुमति के लिए जीआईटीएल ने वन विभाग में प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं। रोड, नहर , नदी-नाला क्रॉसिंग व शासकीय जमीन के उपयोग के लिए अनुमति के प्रस्ताव संबंधित विभागों के कार्यालय में प्रस्तुत किए गए हैं।
इन जिलों से निकलेगी, बैतूल, होशंगाबाद, सीहोर, भोपाल, राजगढ़, गुना, विदिशा, सागर, इंदौर, देवास, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच।

लाभ को लेकर संसद में किया था सवाल
प्राकृतिक गैस पाइप लाइन परियाेजना संसदीय क्षेत्र से निकल रही है। ऐसे में क्षेत्र को कितना और कैसे लाभ मिलेगा, इसे लेकर संसद में सवाल किया था। रिकॉर्ड में भी है। परियाेजना पूरी होने पर उद्याेगों के साथ घरेलू गैस की कनेक्टिविटी मिलेगी। क्षेत्र में फर्टिलाइजर उद्योग लगाने का प्रयास कर किया जा रहै, जो अब जल्दी ही पूरा हो सकेगा। सुधीर गुप्ता, सांसद, मंदसौर-नीमच संसदीय क्षेत्र

मध्यप्रदेश के 16 जिले बैतूल, भोपाल, होशंगाबाद, सीहोर, देवास, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, विदिशा, सागर, धार, झाबुआ एवं गुना से होकर निकलने वाली जीआईटीएल मल्लावरम-भोपाल-भीलवाड़ा-विजयपुर प्राकृतिक गैस पाइप लाइन के संदर्भ में जिले के कलेक्टरों एवं अन्य अधिकारियों के साथ कार्यशाला में चर्चा हुई। कार्यशाला में जीआईटीएल के परियोजना प्रमुख श्री एन. बोसबाबू एवं परियोजना सलाहकार श्री डी.पी. तिवारी द्वारा पाइप लाइन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी। श्री बोसबाबू ने पाइप लाइन से संबंधित अभियांत्रिकी एवं उससे होने वाले खतरों के संबंध में बताया। उन्होंने कहा कि पाइप लाइन से संबंधित आपदा प्रबंधन प्लान बनाने में सहयोग प्रदान करेंगे।

केन्द्र में मोदी सरकार के बहुमत से आने के बाद आम जनता के साथ ही उद्योगों को भी अच्छे दिन आने की उम्मीद है। प्रदेश के उद्योगों के साथ ही आम जनता को आने वाले समय में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता अधिक आसानी से हो सकती है। इसका कारण यह है कि मोदी के गुजरात राज्य में प्राकृतिक गैस का डिस्ट्रीब्यूशन करने वाली गुजरात स्टेट पेट्रोनेट लिमिटेड (जीएसपीएल) आंध्रप्रदेश से लेकर गुजरात तक एक पाइपलाइन परियोजना पर काम कर रही है। जानकारों के अनुसार मोदी की खास दिलचस्पी जीएसपीएल में है। अब जब केन्द्र में भाजपा सरकार काबिज हो गई है तो फिर जीएसपीएल की इस परियोजना के भी जल्द आकार लेने की उम्मीद है।

मप्र के 16 जिलों को लाभ
प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर के साथ ही 15 अन्य जिलों के लोगों को आने वाले समय में गैस की किल्लत से निजात मिलने की आशा है। प्रदेश के इन जिलों से प्राकृतिक गैस पाइप लाइन बिछाने की योजना पर जीएसपीएल द्वारा काम किया जा रहा है। हालांकि अभी इस योजना का जमीनी कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है लेकिन इस योजना के लिए सभी आवश्यक मंजूरीया मिल चुकी है। आंध्रप्रदेश से लेकर गुजरात तक जाने वाली मल्लावरम-भोपाल-भीलवाड़ा-विजयपुर (एमबीवीपीएल) पाइपलाइन परियोजना में 1881 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई जाएगी।

संयुक्त उपक्रम का गठन
गुजरात स्टेट पेट्रोनेट लिमिटेड (जीएसपीएल) के प्रमुख (प्रोजेक्ट) एन बोस बाबु के अनुसार आंध्रप्रदेश के मल्लावरम से लेकर राजस्थान के भीलवाड़ा तक 1881 किलोमीटर लंबी प्राकृतिक गैस पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए जीएसपीएल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) को मिलाकर एक संयुक्त उपक्रम का गठन किया गया है। इस संयुक्त उपक्रम का नाम जीएसपीएल इंडिया ट्रांस्को लिमिटेड है।

2200 करोड़ का निवेश मप्र में
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार 7 हजार करोड़ रुपए की इस परियोजना में 2200 करोड़ रुपए का निवेश मध्यप्रदेश में किया जाना है। इसके लिए एमपी ट्रायफेक के साथ करार भी किया जा चुका है। यह पाइप लाइन पांच राज्यों आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान और गुजरात से होकर गुजरेगी। इस प्रदेशों के 29 जिलों को इसका लाभ मिलेगा।

50-50 किलोमीटर
पाइप लाइन के दोनों ओर 50-50 किलोमीटर के क्षेत्रफल में पीएनजी, सीएनजी व घरेलु गैस की आपूर्ति करने की योजना है। मप्र में जिन जिलों से यह पाइप लाइन गुजरेगी उनमें बैतूल, होशंगाबाद, सिहोर, देवास, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, भोपाल, गुना, विदिशा, सागर, धार और झाबुआ शामिल हैं।

उद्योगों को मिलेगा लाभ
एमबीवीपीएल पाइपलाइल परियोजना के तहत इंदौर के पास से 42.15 किलोमीटर पाइपलाइन गुजरेगी। इसका सबसे अधिक लाभ इंदौर के उद्योगों को मिलेगा। इन उद्योगों को औद्यागिक गैस की आपूर्ति आसान होगी। शहर के उद्योगपतियों का कहना है कि फिलहाल अवंतिका गैस लि. द्वारा उद्योगों के लिए पीएनजी की आपूर्ति की जा रही है लेकिन यह महंगी होने से अधिकांश छोटे व मध्यम उद्योग इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। एमबीवीपीएल पाइपलाइल आने से प्राकृतिक गैस आपूर्ति सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उद्योगों को सस्ती गैस प्राप्त हो सकेगी।

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