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मंदसौर से मिले पाकिस्‍तान-बांगलादेश के नकली नोट के कनेक्‍शन

आरोपी पांच बार बांग्लादेश जा चुका है, वहीं पर पाकिस्तान के लोगों से संपर्क में था। सिटी कोतवाली टीआई एम.पी. सिंह परिहार ने बताया प्रारंभिक पूछताछ में उससे जानकारी मिली कि नकली नोट पाकिस्तान में बनते हैं और बांग्लादेश पहुंचाए जाते है। वहां से भारत अाते हैं। पुलिस ने 29 मार्च 2015 को मुखबिर की सूचना पर आरोपी के सहयोगी मुबारिक पिता फकरू अजमेरी निवासी बादाखे़ड़ी, उमर पिता अयूब अजमेरी निवासी बाजखेड़ी, सिद्दीक पिता मोईन अजमेरी निवासी बागलिया व आरोपी सुभान शेख पिता मुश्तफा शेख निवासी लालगोला जिला मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल को गिरफ्तार किया था। उस दौरान आरोपियों के कब्जे से 96 हजार रुपए के 500-500 के नकली नोट जब्त किए थे। ये पाकिस्तान में छपे थे। सभी को नकली नोट उपलब्ध कराने वाला आरोपी हिमेल शेख उर्फ समीरूल इस्लाम फरार था। इस पर एसपी मनोज शर्मा ने गिरफ्तारी के लिए 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था।

रतलाम में नाहरपुरा में 24 फरवरी को नकली नोटों के साथ दो महिलाएं पकड़ाई थीं। इस मामले में हिमेल शेख उर्फ समीरूल इस्लाम का नाम भी आया था। रतलाम पुलिस उसे मंदसौर से पूछताछ के लिए ले जाएगी। पांच बार बांग्लादेश जा चुका है आरोपी, समीरूल कभी पाकिस्तान तो नहीं गया लेकिन बांग्लादेश पांच बार जा चुका है। उसने पूछताछ में यह बात कबूली है। अब बांग्लादेश व पाकिस्तान में कनेक्शन वाले लोगों और 500 के नोट पर मिलने वाले कमीशन पर पुलिस पूछताछ करेगी।

टीआई ने बताया डेढ़ साल से पुलिस समीरूल की तलाश कर रही थी। वह जो माेबाइल नंबर इस्तेमाल करता था, उसे ट्रैकिंग पर रखा था। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद पुलिस सायबर सेल के इंस्पेक्टर एम. चटर्जी की टीम ने लोकेशन ट्रेस की, हम लगातार उनके संपर्क में थे। सूचना पर मंदसौर से गिरफ्तारी के लिए सायबर सेल इंचार्ज जितेंद्रसिंह सिसौदिया, एएसआई संजयप्रतापसिंह, आरक्षक नीरज व टीम गई और पकड़कर यहां लाए। टीआई ने बताया मार्च 2015 में नकली नोट के साथ गिरफ्तार पश्चिम बंगाल के लालगोला निवासी सुभान पिता मुस्तफा शेख के बारे में जानकारी मिली कि वह केस में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद फरार हो गया। उसके बांग्लादेश भागने की जानकारी मिली है।

ऐसे भारत आते हैं नकली नोट..

सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के सरकारी प्रेस में छापे गए नकली भारतीय नोटों को बांग्लादेश के रास्ते पश्चिम बंगाल तथा नेपाल के रास्ते यूपी व बिहार होते हुए भारत के विभिन्न शहरों में पहुंचाया जाता है. इस गोरखधंधे को लश्कर की सरपरस्ती में कभी दाऊद इब्राहिम तो कभी छोटा शकील करते रहे हैं.
वर्तमान में इस काम को इकबाल काना नामक भारतीय तस्कर कर रहा है. इस काम में आईएसआई व लश्कर के अलावा हसन नामक एक भारतीय तस्कर इकबाल काना की मदद कर रहे हैं. इकबाल काना मूल तौर पर उत्तर-प्रदेश का रहने वाला बताया जाता है. यह वही हसन है, जिसने पिछले साल जनवरी महीने में दिल्ली के डाबड़ी इलाके में नकली भारतीय नोटों की एक बड़ी खेप पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते भेजी थी. इस मामले में उसके बेटे समेत दो लोगों को स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था.
सूत्रों का कहना है कि अब्दुल करीम उर्फ टुंडा ने बताया है कि पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी इस्लामाबाद व पेशावर की सरकारी प्रेस में नकली भारतीय नोटों की छपाई कराने के बाद अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहीम के खासमखास रह चुके इकबाल काना के हवाले करती है.
इसके बाद नकली भारतीय नोटों को बांग्लादेश व नेपाल भिजवा दिया जाता है. बांग्लादेश व नेपाल में बैठे एजेंट कभी टुंडा तो कभी दाऊद इब्राहीम के नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए नकली भारतीय नोटों को भारत में मौजूद स्लीपर एजेंट के हवाले करते हैं. इसके बाद इन नकली नोटों को स्थानीय तस्करों के हवाले कर दिया जाता है, जो भारत के विभिन्न शहरों के स्थानीय व साप्ताहिक बाजारों में नकली नोटों की सप्लाई करते हैं. टूंडा बताता है कि आईएसआई ने बांग्लादेश, नेपाल व भारत में उसके नेटवर्क का इस्तेमाल करने की सलाह इकबाल काना को दी थी.
इकबाल काना ने उसके सहयोग से करोड़ों नकली रुपये भारत में पहुंचाए थे. अब्दुल करीम टुंडा को ठीक-ठीक याद नहीं है कि वह अब तक कितनी बार और कितने रुपये भारत पहुंचा चुका है. वह सिर्फ इतना बताता है कि एक बार में पांच करोड़ नकली भारतीय नोट से कम सप्लाई नहीं करता था. उसे हर बार जरूरत के हिसाब से पेमेंट कर दी जाती थी. सूत्र बताते हैं कि इकबाल काना पिछले कई साल से भारतीय बाजारों में नकली भारतीय नोटों की सप्लाई करता रहा है. इसके लिए इन दिनों वह भारतीय तस्कर हसन की मदद ले रहा है.
स्पेशल सेल के अधिकारी बताते है कि हसन ने ही पिछले साल जनवरी महीने में डाबड़ी के सीतापुरी में पाकिस्तान के सरकारी प्रेस में छापे गए नकली नोट पंजाब स्थित सरगोधा प्रोसेसिंग मिल में तैयार कपड़े के थान में छिपाकर भारत भेजे थे. इन नोटों को सीतापुरी इलाके में स्पेशल सेल ने जब्त किया था. पांच-पांच सौं व एक-एक हजार रुपये ये नोट करीब सवा करोड़ के थे. इस मामले में हसन के बेटे जीशान व उसके साथी आस मोहम्मद को गिरफ्तार किया गया था.
हर साल आती है 18 सौ करोड़ की नकली करंसी
टुंडा का कहना है कि इकबाल काना लंबे अरसे से नकली भारतीय नोटों की तस्करी में शामिल है और इस काम में उसे दो दर्जन से अधिक लश्कर आतंकी व आईएसआई एजेंट मदद कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार इकबाल काना प्रत्येक साल लगभग 1800 करोड़ नकली भारतीय नोट भारत के बाजारों में सप्लाई कर देता है और उसके एजेंट भारत के विभिन्न राज्यों में फैले हुए हैं.
माना जा रहा है कि पाक सेना तथा आईएसआई के लिए काम करने वाले मेजर तैयब, मेजर अल्ताफ व मेजर इकबाल नकली नोटों की तस्करी से जुड़े हो सकते हैं. इन तीनों के नाम मुंबई हमले के समय भी सामने आए थे. कहा यह गया था कि मुंबई हमले के लिए भेजे गए आतंकियों को इन्हीं तीनों ने हथियार व गोला-बारूद मुहैया कराये थे.

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