मन्दसौर ने बनाया श्री पटवा को पहली बार मुख्यमंत्री

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तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री सुन्दरलाल पटवा की जन्मभूमि यद्यपि कुकड़ेश्वर रही किन्तु कर्मभूमि बनने का अवसर मन्दसौर को मिला। मन्दसौर ने उन्हें मुख्यमंत्री पहली बार बनाया। वर्ष 1977 में श्री पटवा मन्दसौर से जनता पार्टी के टिकट पर विधायक बने, उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी श्री धनसुख भाचावत को हराया। जनता पार्टी को प्रदेश में बहुमत मिला। श्री कैलाश जोशी मुख्यमंत्री बने। कुछ समय बाद मुख्यमंत्री बनने का मौका श्री वीरेन्द्रकुमार सखलेचा को मिला। इस दौरान श्री सखलेचा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो श्री पटवा को वर्ष 1980 में कुछ समय के लिये मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिल गया, बाद में चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में आई।
वर्ष 1977 में चुनाव में प्रदेश में जनता पार्टी को बहुमत मिला तब अविभाजित मन्दसौर जिले की सभी सातों सीटों पर कांग्रेस पराजित हुई थी। जावद के श्री सखलेचा चुनाव जीत गए थे। चुनाव परिणाम के दौरान इस संवाददाता ने श्री सखलेचा को पूछा था कि विधायक दल के नेता का चुनाव कब होगा। तब उन्होंने तारीख की घोषणा की। उस दौरान श्री पटवा भी उसी परिसर में थे वे आश्चर्य से देख रहे थे कि यह प्रश्न उनसे क्यों नहीं पूछा गया। संयोग से श्री सखलेचा विधायक दल के नेता बन मुख्यमंत्री बन गये। वर्ष 1980 में श्री पटवा को भी मौका मिल गया।
श्री पटवा मनासा, मन्दसौर, भोजपुर आदि से विधायक रहे। छिंदवाड़ा से कांग्रेस के दिग्गज कमलनाथ को पराजित कर सांसद बन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केन्द्रीय मंत्री बने। वर्ष 1990 से 1992 तक पुनः प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इस दौरान श्री पटवा के आमंत्रण पर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह कुकड़ेश्वर दौरे पर आये थे जहां उन्होंने विभिन्न कार्यक्रम में भाग लिया। बाद में श्री पटवा ने प्रदेश की राजधानी भोपाल में अपना निवास बनाया। 92 वर्ष की उम्र तक वे सक्रिय रहे।
26 माह के मुख्यमंत्री काल में उन्होंने मंदसौर को अपने दिल में रखा। बाद में भी वे इस अंचल के विकास के प्रति सचेत रहे। जब कांगे्रस प्रतिपक्ष में थी तब तत्कालीन ब्लाॅक कांग्रेस अध्यक्ष श्री नाथूलाल कामराज के नेतृत्व में कांग्रेसजनों ने श्री पटवा का घेराव किया। तब पुलिस बल उनकी सुरक्षा के लिये आया तो उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि कांग्रेस अपना प्रतिपक्ष का धर्म निभा रही है। श्री पटवा अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा करते थे कि अब सत्ता में है अतः प्रतिपक्ष का रोल अदा न करे।
मुख्यमंत्री रहते श्री पटवा ने मंदसौर एवं मनासा में सिंचाई योजनाओं की आधारशिला रखी तथा उन्हें पूरा कराया। क्षेत्र के विधायक श्री यशपालसिंह सिसौदिया ने श्री पटवा के जमाने की योजना को मूर्तरूप दिया।
श्री पटवा ने कुकड़ेश्वर कस्बे से राजनीतिक यात्रा शुरू कर भोपाल, दिल्ली में अपना स्थन बनाया। कूटनीतिक राजनीति उन्होंने राजनेता श्री अर्जुनसिंहजी से सीखी थी। इस कारण उन्हें राजनीति में अभूतपूर्व सफलता भी मिली।

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