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मन्दसौर फिर दहल उठा बस दुर्घटना से

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बड़ावदा/जावरा/रतलाम/खाचरौद। जावरा-उज्जैन स्टेट हाइवे पर उज्जैन जिले के खाचरौद थाना क्षेत्र के रामनगर फंटे के समीप हुए सड़क हादसे में घायलों का कहना है कि हादसा बहुत भयानक था। वे बस में बुरी तरह फंस गए थे। हादसा होते ही घायलों की दर्दभरी चीखे क्षेत्र में गूंज उठी। कुछ घायल तो घबराहट और दर्द के कारण बुरी तरह रो दिए। आसपास खेतों में काम कर रहे और वहां से गुजर रहे लोगों ने घायलों को बस से बाहर निकाला। इसी बीच सूचना मिलने पर पुलिस अधिकारी, जवान व स्वास्थ्यकर्मी आदि मौके पर पहुंचे और घायलों को अस्पताल भिजवाया।

बस में सवार कई यात्रियों के अनुसार बस तेज गति से जा रही थी। बस ट्रेलर व ट्रॉला से कुछ ही दूरी पर थी। ट्रेलर व ट्रॉला की भिड़ंत हो गई, वे कुछ समझ पाते और बस चालक गाड़ी कंट्रोल कर पाता उसके पहले ही बस ट्रेलर से जा भिड़ी। घटना स्थल बड़ावदा से करीब चार किमी दूर है। सूचना मिलने पर बड़ावदा थाना प्रभारी राजेंद्र पंवार दल के साथ कुछ ही देर बाद मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने घायलों को बस में से निकलवाकर अस्पताल भिजवाने में मदद की और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। फायर ब्रिगेड के कर्मचारी दमकल लेकर पहुंचे और करीब 25 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इसी बीच पता चला कि घटना स्थल खाचरौद थाना क्षेत्र का है तो खाचरौद पुलिस का दल भी मौके पर पहुंचा। दुर्घटना के चलते तीनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने से सड़क व सड़क के किनारे पड़े हुए थे। इससे सड़क पर जाम लग गया। बड़ावदा थाना प्रभारी पंवार ने जेसीबी बुलवाकर वाहनों को हटवाया। करीब डेढ़ घंटे बाद जाम खुला और यातायात सामान्य हो पाया।

दुर्घटना में मृत पायल सकलेचा तीन बहनों में सबसे बड़ी थीं। इंदौर में पढ़ाई कर रही सबसे छोटी बहन सलोनी सकलेचा (20) को लेकर बड़ावदा लौट रही थी कि रास्ते में हादसा हो गया। गंभीर रूप से घायल पायल व सलोनी को जावरा के सरकारी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद रतलाम रेफर किया गया। रतलाम लाते समय पायल ने रास्ते में दम तोड़ दिया। सलोनी को सागोद रोड स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। पायल के पिता प्रकाश सकलेचा व अन्य लोग जिला अस्पताल पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद पायल का शव परिजन को सौंप दिया गया। पायल व सलोनी की मझली बहन परिधि सकलेचा ने 10 वर्ष पहले दीक्षा ली थी और वे मधुर व्याख्यानी अर्हमप्रिया श्रीजी के नाम से विख्यात है। पायल के पिता प्रकाश सकलेचा श्री राजेन्द्र सूरी जैन दादावाड़ी के कोषाध्यक्ष हैं। पायल के निधन से बड़ावदा में सन्नााटा छा गया। शोक स्वरूप जैन धर्मावलंबियों ने प्रतिष्ठान बंद कर दिए।

मायके से लौट रही थी गरिमा

दुर्घटना में मृत गरिमा पति नीलेश सोड़ानी भी बड़ावदा की रहने वाली थीं। वह जावरा में स्थित ट्रैक्टर शोरूम पर कार्यरत थीं। गरिमा अपने मायका इंदौर से लौट रही थी कि हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे जावरा और जिला अस्पताल और वहां से इंदौर रेफर किया था। इंदौर के वेदांता अस्पताल ले जाने पर उसने दम तोड़ दिया। गरिमा माहेश्वरी समाज की बहू मंडल की एक्टिव सदस्य होकर ब्यूटी पार्लर संचालिका भी थीं। पति नीलेश सोडानी का बड़ावदा में फुटवियर संस्थान है। उनकी दो संतानें तन्नाू (8) आदर्श (6) हैं। गरिमा का शव इंदौर से जिला अस्पताल लाया गया।

 

वृद्ध माता-पिता को बताने की हिम्मत नहीं हुई

-फैक्टरी कर्मचारियों ने पहले आसपास के लोगों को बताया

 

इंदौर से मंदसौर आ रही बस दुर्घटना में मारे गए केशव राव निवासी अग्रसेन नगर की दुर्घटना में मौत की खबर मिलते ही क्षेत्र में माहौल गमगीन हो गया। मृतक के वृद्ध माता पिता को सीधे दुर्घटना की खबर बताने की किसी की हिम्मत नहीं हुई। राजाराम एंड ब्रदर्स फैक्टरी के साथी कर्मचारियांें ने पहले उनके आस-पास के लोगों को बताया। शाम को ही अंत्येष्टि करना थी, इसलिए फिर धीरे से माता-पिता को भी यह हृदय विदारक बात बताई तो वे विलाप करने लगे। उनका विलाप वहां खड़े लोग देख नहीं पाए और बड़ी मुश्किल से उन्हें सांत्वाना देते रहे।

मृतक केशव पिता दामोदर राव (45) निवासी अग्रसेन नगर स्थानीय राजाराम एंड ब्रदर्स फैक्टरी के सेल्स विभाग में कार्यरत थे। रविवार को किसी निजी कार्य से पत्नी वैशाली (42) बेटियों निधि (15) और मुग्धा (3) के साथ इंदौर गए थे। सोमवार सुबह बस से लौट रहे थे और फैक्टरी मेनेजर से बात भी की थी कि दोपहर तक वापस पहुंच जाऊंगा। पर केशव के पहुंचने से पहले ही उसकी मौत की खबर आ गई। फैक्टरी मेनेजर दिलीप जैन सहित अन्य कर्मचारी भी गमगीन हो गए। जैन के मुताबिक केशव बहुत ही होशियार थे और उनकी शाखा के अलावा अन्य जगह का भी कार्य सौंप देते थे तो अच्छी तरह से निपटा देते थे। केशव की पत्नी व बच्चियां रतलाम अस्पताल में भर्ती थी ऐसे में उसके निवास पर वृद्ध माता-पिता को सूचना देना शव लाने के एक घंटे पहले ही तय किया गया। इससे पहले कॉलोनी में आस-पास के लोगों को सूचना देने फैक्टरी के वरिष्ठ कर्मचारी गए थे। शाम लगभग 4 बजे सूचना माता-पिता को भी दी गई। उनका विलाप सुनकर सभी की आंखों में आंसू आ गए। शाम को 6 बजे केशव का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनकी पत्नी व बेटियों को भी रतलाम से बुला लिया गया।

 

दस मिनट पहले ही कंडक्टर से बात की थी मालिक ने

बस दुर्घटना में दूसरे मृतक जवाहरलाल मेघवाल (51) निवासी नोगांवा के गांव में भी गमगीन माहोल में अंतिम संस्कार किया गया। मृतक जवाहरलाल 20 साल से रातड़िया बस के संचालक शिखर रातड़िया के यहां कार्य कर रहे थे। ढाई साल पहले मंदसौर-इंदौर बस सेवा प्रारंभ की थी, तभी से जवाहरलाल ही बस चला रहे थे। बस रोजाना शाम 7 बजे मंदसौर से और दूसरे दिन सुबह 7 बजे इंदौर से रवाना होती थी। आज भी जवाहरलाल बस को लेकर मंदसौर आ रहा था पर वह आधे रास्ते में ही आखिरी सफर पर चला गया। दुर्घटना के 10 मिनट पहले जब बस नागदा से घिनोदा के बीच थी तभी बस मालिक शिखर रातड़िया ने कंडक्टर से बात की थी। इसके बाद दुर्घटना की खबर आई। जवाहरलाल के घर पर भी पत्नी व दो बेटों के अलावा वृद्ध बूढ़े पिता है। परिवार को दोपहर में खबर की गई। शाम को शव गांव में पहुंचा और अंतिम संस्कार किया गया।

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